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जानें, 100 मर्डर करने वाला 1 करोड़ का इनामी डाकू कैसे बना ‘महात्मा’

Wed, 05 Apr 2017 07:44 AM IST
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Updated Wed, 05 Apr 2017 07:44 AM IST
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story of dacoit pancham singh
पंचम सिंह
सौ मर्डर करने वाला 550 डाकुओं का सरदार 1 करोड़ का इनामी डकैत बन गया। 14 साल तक चंबल के बीहड़ों पर किया राज। कत्ल, अपहरण व डकैती के लगभग तीन सौ से ज्यादा केस। मध्यप्रदेश ,उत्तर प्रदेश और राजस्थान में अपना सिक्का जमाया , लेकिन एक ही झटके में डाकू पंचम सिंह चौहान बन गए संत भाई पंचम सिंह। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी की शिक्षाएं क्या मिलीं, पंचम भी ‘महात्मा’ बन गए।

जानें, 100 मर्डर करने वाला 1 करोड़ का इनामी डाकू कैसे बना ‘महात्मा’

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पंचम सिंह
पंचम सिंह ने अपने डाकू वाले जीवन पर बातचीत करते हुए बताया कि हमारा 550 डाकुओं का एक गिरोह था और मैं डाकुओं का सरदार हुआ करता था तथा मेरा और मेरे 2 अन्य डाकू साथियों भोर सिंह व डाकू माधो सिंह के गिरोह का मध्य प्रदेश में पूरा आतंक था और  हम अन्याय के खिलाफ थे। अन्याय करने वाले कई लोगों की हमने हत्या की थी ।

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पंचम सिंह
पंचम ने बताया कि 1972 में अदालत ने मुझे, भोर सिंह और माधो सिंह को फांसी की सजा सुना दी तथा लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने राष्ट्रपति के पास मेरी फांसी की सजा माफ करने के लिए रहम की अपील की और मेरी फांसी की सजा उम्रकैद की सजा में तबदील कर दी गई। जबकि भोर सिंह व माधो सिंह को फांसी दे दी गई।
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पंचम सिंह
पंचम सिंह ने बताया कि आखिर एक दिन ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रेरणा ने मेरा जीवन ही बदल दिया और उम्रकैद की सजा होने के बावजूद 8 साल बाद सरकार ने मुझे रिहा कर दिया तथा मेरी जिंदगी का उद्देश्य ही बदल गया। समर्पण करने के बाद जब पंचम जेल में सजा काट रहे थे, तब प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मुख्य संचालिका दादी प्रकाश जेल आईं थीं । उन्हें इंदिरा गांधी ने चुनौती दी थी कि डाकुओं का मन बदल कर दिखाएं । दादीजी ने प्रेरित किया तो मन बदल गया । 
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पंचम सिंह
 एक जमाने के खूंखार डाकू रहे पंचम सिंह आज राज योगी हैं और उनका मानना है कि मन मंदिर है और धन-दौलत तथा दुनिया की हर ऐशो-आराम की चीज पास होने के बावजूद भी मनुष्य को मन की शांति नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि मन की शांति परमात्मा से जुडऩे से मिलती है। नफरत की जगह मेरे दिल में प्यार बस गया।
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