कारगिल विजय दिवस के मौके पर देश समेत कानपुर शहर का हर आम-ओ-खास दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हुए सैनिकों को नमन करता है। शहर के मेजर सलमान की शहादत पर भी सभी को ताउम्र फख्र रहेगा। सलमान 2005 में आतंकियों से मोर्चा लेते हुए शहीद हुए थे।
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जरा याद करो कुर्बानीः जानिए मेजर सलमान अहमद खान के बारे में जिनकी याद में आज भी भर आती हैं आंखें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 26 Jul 2018 04:44 PM IST
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मेजर सलमान के शौर्य की कहानी
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पिछले साल ली गई मेजर सलमान की तस्वीर के साथ उनके माता-पिता की फोटो
कारगिल युद्ध 1999 में हुआ था। 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे से अपनी जमीन वापस लेकर विजय पताका फहराई थी। परिजनों का कहना है कि जब-जब कारगिल विजय दिवस आता है, तो उन्हें सलमान की जीत का एहसास होता है। सलमान के जन्मदिन या बरसी पर भी आंखें नम होती हैं लेकिन फख्र महसूस होता है। यही वजह है उनके परिवार में शहीद मेजर सलमान की तरह एक और सलमान तैयार हो रहा है। मेजर सलमान के बड़े भाई इकरार अहमद खान के बेटे का नाम भी सलमान अहमद खान रखा है। भाई मेजर सलमान की शहादत के बाद पैदा हुए अपने बेटे को मेजर सलमान की तरह बनाना चाहते हैं।
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मेजर सलमान के शौर्य की कहानी
मेजर सलमान के परिवारवालों का कहना है कि उन्हें फख्र है कि सलमान ने देश की रक्षा के लिए जिंदगी कुर्बान की। इस्लाम हमेशा वफादारी की सीख देता है। उसने अपने मजहब और मुल्क दोनों का फर्ज अदा किया है। मेजर सलमान की शहादत पर उन्हें ईसाल-ए-सवाब के लिए धार्मिक कार्यक्रम भी होते हैं।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- जानिए कौन थे मेजर सलमान...
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मेजर सलमान के शौर्य की कहानी
मेजर सलमान अहमद खान कानपुर के किदवई नगर के रहने वाले थे। उनका जन्म 22 अक्तूबर 1978 में हुआ। मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित सिख/6 राष्ट्रीय राइफल के मेजर सलमान ने जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के एक गांव में एक आतंकी को ढेर किया। दूसरे आतंकी के भागने पर उसका पीछा करने लगे। एक घर में आतंकी के छिपे होने की सूचना मिली लेकिन वहां से स्वचालित हथियारों से उन पर हुई गोलीबारी से पांच मई 2005 को वह घायल हो गए। घायलावस्था में भी उन्होंने घर पर हथगोले फेंक कर दूसरे आतंकी को भी मार गिराया। घायल होने के बाद सात मई 2005 को वह वीरगति को प्राप्त हुए। साल 2006 में मरणोपरान्त मेजर सलमान को शौर्च चक्र से सम्मानित किया गया था।