आपको जानकर हैरानी होगी कि आने वाले दिनों में ऐसा डिटर्जेंट मार्केट में आने वाला है जो किसी कैमिकल से नहीं बना होगा। इसे गन्ने के वेस्ट मैटेरियल यानी बचे हुए खोल से तैयार किया जा रहा है।
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गन्ने का वेस्ट मैटेरियल भी बड़े काम का, देखिए कैसे डिटर्जेंट बनाने में हो रहा है यूज
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 16 Apr 2017 05:01 PM IST
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गन्ने के वेस्ट मैटेरियल से डिटर्जेंट बनाने के शोध में लगी हैं कानपुर की अनुष्का
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गन्ने का वेस्ट मैटेरियल
इसके लिए कानपुर नेशनल शुगर संस्थान में बहुत तेजी से काम किया जा रहा है। इंस्टिट्यूट ने इसके पेटेंट की भी सारी तैयारी कर ली है। बस जैसे ही शोध कार्य पूरा हो जाएगा पेटेंट भी करा लिया जाएगा। तो आइए जानते हैं आखिर कैसे गन्ने के वेस्ट मैटेरियल से डिटर्जेंट को तैयार किया जाता है...
गन्ने के वेस्ट मैटेरियल से डिटर्जेंट बनाने का काम करती
5 महीने से इस प्रोजेक्ट पर चल रहा काम
एमिटी नोएडा से फूड एंउ एडल्ट्रेशन में बीटेक कर रही कानपुर की अनुष्का अग्रवाल इन दिनों नेशनल शुगर संस्थान में गन्ने के खोई से डिटर्जेंट बनाने का काम कर रही है। अनुष्का को यह काम नवंबर 2016 में प्रोजेक्ट वर्क के दौरान डायरेक्टर नरेंद्र मोहन के कहने पर सौंपा गया था।
पिछले 5 महीने से डिटर्जेंट तैयार करने का काम कर रहीं अनुष्का को उम्मीद है कि उनका ये रिसर्च जल्द ही पूरा हो जाएगा। ये डिटर्जेंट अन्य से एकदम अलग होगा।
एमिटी नोएडा से फूड एंउ एडल्ट्रेशन में बीटेक कर रही कानपुर की अनुष्का अग्रवाल इन दिनों नेशनल शुगर संस्थान में गन्ने के खोई से डिटर्जेंट बनाने का काम कर रही है। अनुष्का को यह काम नवंबर 2016 में प्रोजेक्ट वर्क के दौरान डायरेक्टर नरेंद्र मोहन के कहने पर सौंपा गया था।
पिछले 5 महीने से डिटर्जेंट तैयार करने का काम कर रहीं अनुष्का को उम्मीद है कि उनका ये रिसर्च जल्द ही पूरा हो जाएगा। ये डिटर्जेंट अन्य से एकदम अलग होगा।
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बीकर में गर्म किया गया गन्ने का वेस्ट मैटेरियल
डिटर्जेंट बनाने में क्या-क्या होगा इस्तेमाल
इसमें गन्ने का वेस्ट मैटेरियल खोई (बगास), डकोनोल, ऑइल बाथ, नॉमिनल कास्टिक सोडा का इस्तेमाल किया जाता है। सबसे पहले चीनी मिल से निकले गन्ने के खोई ( बगास) को 2 से 3 दिन खूब सुखाया जाता है। इसके बाद उसे पीसकर महीन दाने में तब्दील किया जाता है।
महीन बगास में डेकोनोल और नाम मात्र का कास्टिक सोडा मिलाया जाता है और 100 डिग्री टेम्प्रेचर पर उबाला जाता है।
इससे बगास डकोनोल में घुलकर लिक्विड फॉर्म में तब्दील हो जाता है। लिक्विड को फिल्टर कर पानी को अलग कर दिया जाता है और ठोस भाग को एक बार फिर सूखने के लिए फैला दिया जाता। डेकोनोल में 75 फीसदी पानी और 25 फीसदी एसिड का मिश्रण होता है। 10 ग्राम महीन खोई में करीब 4 ग्राम डिटर्जेंट तैयार होता है। एक बार डिटर्जेंट तैयार होने में करीब 4 से 5 घंटे लगते हैं।
इसमें गन्ने का वेस्ट मैटेरियल खोई (बगास), डकोनोल, ऑइल बाथ, नॉमिनल कास्टिक सोडा का इस्तेमाल किया जाता है। सबसे पहले चीनी मिल से निकले गन्ने के खोई ( बगास) को 2 से 3 दिन खूब सुखाया जाता है। इसके बाद उसे पीसकर महीन दाने में तब्दील किया जाता है।
महीन बगास में डेकोनोल और नाम मात्र का कास्टिक सोडा मिलाया जाता है और 100 डिग्री टेम्प्रेचर पर उबाला जाता है।
इससे बगास डकोनोल में घुलकर लिक्विड फॉर्म में तब्दील हो जाता है। लिक्विड को फिल्टर कर पानी को अलग कर दिया जाता है और ठोस भाग को एक बार फिर सूखने के लिए फैला दिया जाता। डेकोनोल में 75 फीसदी पानी और 25 फीसदी एसिड का मिश्रण होता है। 10 ग्राम महीन खोई में करीब 4 ग्राम डिटर्जेंट तैयार होता है। एक बार डिटर्जेंट तैयार होने में करीब 4 से 5 घंटे लगते हैं।
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इस तरह गन्ने का वेस्ट मैटेरियल भी होगा यूज
मार्केट में इस टाइप डिटर्जेंट
डिटर्जेंट भी कई तरह के होते है, जिसमें आयनिक और न्यूट्रल डिटर्जेंट मुख्य है। न्यूट्रल डिटर्जेंट में हाइड्रोफिलिक और हाइड्रोफोबिक तत्व पाए जाते हैं। हाइड्रोफिलिक युक्त डिटर्जेंट पानी में आसानी से घुल जाता है। आने वाले कुछ महीनो में यह डिटर्जेंट भी मार्केट में होगा।
डिटर्जेंट भी कई तरह के होते है, जिसमें आयनिक और न्यूट्रल डिटर्जेंट मुख्य है। न्यूट्रल डिटर्जेंट में हाइड्रोफिलिक और हाइड्रोफोबिक तत्व पाए जाते हैं। हाइड्रोफिलिक युक्त डिटर्जेंट पानी में आसानी से घुल जाता है। आने वाले कुछ महीनो में यह डिटर्जेंट भी मार्केट में होगा।