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यहां कायम कुप्रथा का वो कुचक्र जिसकी जंजीरों में जकड़ी हैं कई जिंदगियां, हकीकत आपको रुला देगी
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 24 Jul 2018 06:24 PM IST
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मैला ढोने के लिए डलिया लेकर जाती महिलाएं, सीडीओ आनंद कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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दुष्यंत कुमार की पंक्तियां 'अब तो इस तालाब का पानी बदल दो...ये कँवल के फूल कुम्हलाने लगे हैं' आजाद भारत की उस तस्वीर पर सटीक बैठते हैं जिससे आज हम आपको रूबरू कराने जा रहे हैं। कुछ ऐसा ही यूपी के एक जिले में एक कुप्रथा की जंजीरों में जकड़े लोग चिल्ला रहे हैं। बदलते समय के साथ कई कुप्रथाएं धीरे-धीरे खत्म होती गईं। लेकिन आज भी यह कुप्रथा यूपी के हरदोई जिले में बदस्तूर जारी है जो मानवता को शर्मसार कर रही है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट...
मैला ढोने के लिए डलिया लेकर जाती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
शुष्क शौचालय बीमारियों के बड़े कारण हैं। वहीं आज के दौर में सिर पर मैला ढोने की कुप्रथा शर्मनाक भी है। शुष्क शौचालय सिर्फ कागजों पर प्रतिबंधित हैं। जमीनी हकीकत देखने की फुर्सत किसी को नहीं है। शासन की ओर से विशेष मुहिम चलाकर एक बार शुष्क शौचालयों को तोड़ने का अभियान चला था। यह सफल नहीं हो पाया। शुष्क शौचालयों का इस्तेमाल करने वाले परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर शौचालय निर्माण कराने के लिए अनुदान देने की व्यवस्था है। यह भी अमल में नहीं आ पाई। सरकारी अभिलेखों के मुताबिक जनपद को शुष्क शौचालयों से मुक्त बताते हुए सिर पर मैला ढोने की प्रथा बंद होने की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। हकीकत शर्मसार करने वाली है। सांडी विकास खंड के ग्राम उल्लामऊ में अब भी 33 परिवार शुष्क शौचालयों का इस्तेमाल कर रहे हैं। मल श्रमिक मैला को सिर पर उठाकर फेंक रहे हैं। जहां मैला फेंका जाता, वहां सड़ांध से निकलना मुश्किल है। ऐसे में प्रशासन की ओर से शुष्क शौचालय न होने और सिर पर मैला ढोने की प्रथा जिम्मेदारों की लापरवाही को उजागर कर देती है।
ग्राम प्रधान आशीष कुमार सिंह
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे हुआ खुलासा
सांडी विकास खंड के ग्राम उल्लामऊ में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत शौचालय निर्माण की फर्जी रिपोर्टिंग की गई थी। अमर उजाला ने इसका खुलासा किया था। इस खबर को संज्ञान में लेकर डीएम पुलकित खरे ने उपनिदेशक कृषि डॉ. आशुतोष मिश्र के नेतृत्व में टीम भेजकर जांच कराई। जांच के दौरान एक ओर गलत रिपोर्टिंग की पुष्टि हुई तो यह भी पता चला कि इस गांव में 33 परिवार अब भी शुष्क शौचालयों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सिर पर मैला ढोने की प्रथा जारी होने की बात भी डॉ.आशुतोष मिश्र ने अपनी रिपोर्ट में कही है।
अनुदान की मांग कर चुके हैं : आशीष कुमार सिंह
उल्लामऊ के ग्राम प्रधान आशीष कुमार सिंह ने बताया कि गांव में शौचालय विहीन परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए अनुदान दिलाए जाने की मांग कई बार पंचायत राज विभाग से की जा चुकी है। गांव में शुष्क शौचालयों का उपयोग होने की जानकारी समाज कल्याण अधिकारी के अलावा पंचायत राज विभाग के जिम्मेदारों को दे चुके हैं। उन्हें नहीं मालूम कि कैसे अधिकारियों ने जनपद को शुष्क शौचालयों के इस्तेमाल से मुक्त घोषित कर दिया।
सांडी विकास खंड के ग्राम उल्लामऊ में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत शौचालय निर्माण की फर्जी रिपोर्टिंग की गई थी। अमर उजाला ने इसका खुलासा किया था। इस खबर को संज्ञान में लेकर डीएम पुलकित खरे ने उपनिदेशक कृषि डॉ. आशुतोष मिश्र के नेतृत्व में टीम भेजकर जांच कराई। जांच के दौरान एक ओर गलत रिपोर्टिंग की पुष्टि हुई तो यह भी पता चला कि इस गांव में 33 परिवार अब भी शुष्क शौचालयों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सिर पर मैला ढोने की प्रथा जारी होने की बात भी डॉ.आशुतोष मिश्र ने अपनी रिपोर्ट में कही है।
अनुदान की मांग कर चुके हैं : आशीष कुमार सिंह
उल्लामऊ के ग्राम प्रधान आशीष कुमार सिंह ने बताया कि गांव में शौचालय विहीन परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए अनुदान दिलाए जाने की मांग कई बार पंचायत राज विभाग से की जा चुकी है। गांव में शुष्क शौचालयों का उपयोग होने की जानकारी समाज कल्याण अधिकारी के अलावा पंचायत राज विभाग के जिम्मेदारों को दे चुके हैं। उन्हें नहीं मालूम कि कैसे अधिकारियों ने जनपद को शुष्क शौचालयों के इस्तेमाल से मुक्त घोषित कर दिया।
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बिट्टा देवी
- फोटो : अमर उजाला
शुष्क शौचालयों का प्रयोग बंद कराया जाएगा: सीडीओ
सीडीओ आनंद कुमार ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में आया है। पहली कोशिश यह है कि शुष्क शौचालयों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करा दिया जाए। डीपीआरओ से वार्ता हो गई है। संबंधित गांव के पात्रों को शौचालय निर्माण के लिए बजट भेजा जा रहा है। ग्राम प्रधान और सचिव को सहयोग करते हुए जल्द से जल्द शौचालय निर्माण का कार्य पूर्ण कराना चाहिए। इसके लिए वह संबंधित लोगों को प्रेरित करें। यह पता कराया जा रहा है कि किस ग्राम सचिव ने गांव में कोई भी शुष्क शौचालय न होने की रिपोर्ट दी थी।
आंकड़ों पर नजर
- 1450 है उल्लामऊ गांव की आबादी।
- 380 परिवार रहते हैं उल्लामऊ में।
- 139 परिवारों को चयनित किया गया है शौचालय निर्माण के लिए।
- 33 परिवार इस्तेमाल कर रहे हैं शुष्क शौचालय।
उल्लामऊ की बिट्टा देवी कहती हैं कि उनके घर में शुष्क शौचालय का इस्तेमाल ही किया जा रहा है। वह कहती हैं कि शौचालय निर्माण के लिए जब सर्वे हुआ था तो उनका नाम सूची में दर्ज था। अब तक शौचालय निर्माण के लिए का बजट नहीं मिला।
सीडीओ आनंद कुमार ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में आया है। पहली कोशिश यह है कि शुष्क शौचालयों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करा दिया जाए। डीपीआरओ से वार्ता हो गई है। संबंधित गांव के पात्रों को शौचालय निर्माण के लिए बजट भेजा जा रहा है। ग्राम प्रधान और सचिव को सहयोग करते हुए जल्द से जल्द शौचालय निर्माण का कार्य पूर्ण कराना चाहिए। इसके लिए वह संबंधित लोगों को प्रेरित करें। यह पता कराया जा रहा है कि किस ग्राम सचिव ने गांव में कोई भी शुष्क शौचालय न होने की रिपोर्ट दी थी।
आंकड़ों पर नजर
- 1450 है उल्लामऊ गांव की आबादी।
- 380 परिवार रहते हैं उल्लामऊ में।
- 139 परिवारों को चयनित किया गया है शौचालय निर्माण के लिए।
- 33 परिवार इस्तेमाल कर रहे हैं शुष्क शौचालय।
उल्लामऊ की बिट्टा देवी कहती हैं कि उनके घर में शुष्क शौचालय का इस्तेमाल ही किया जा रहा है। वह कहती हैं कि शौचालय निर्माण के लिए जब सर्वे हुआ था तो उनका नाम सूची में दर्ज था। अब तक शौचालय निर्माण के लिए का बजट नहीं मिला।
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नवाब सिंह
- फोटो : अमर उजाला
उल्लामऊ के ही नवाब सिंह कहते हैं कि उनकी उम्र 70 वर्ष हो रही है। गांव में कई परिवार शुष्क शौचालय का इस्तेमाल करते हैं। उनके घर में भी शुष्क शौचालय ही है। शौचालय निर्माण के लिए कई बार बजट देने की बात सुनने में आई, मिला कुछ नहीं।
इनकी भी सुनिए
सुनीता कहती हैं कि पुराने समय से ही परिवार सिर पर मैला ढोने का काम करता रहा है। हो सकता है कि दूसरे गांव में ऐसा न होता हो, लेकिन यहां तो शुष्क शौचालय हैं। इसलिए मैला ढोना पड़ता है। इसके एवज में संबंधित लोग उन्हें रुपये देते हैें।
इनकी भी सुनिए
सुनीता कहती हैं कि पुराने समय से ही परिवार सिर पर मैला ढोने का काम करता रहा है। हो सकता है कि दूसरे गांव में ऐसा न होता हो, लेकिन यहां तो शुष्क शौचालय हैं। इसलिए मैला ढोना पड़ता है। इसके एवज में संबंधित लोग उन्हें रुपये देते हैें।