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कोबरा और नेवले में 58 साल से चल रही है जंग, यकीन नहीं तो खुद देखें ये 10 तस्वीरें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Updated Wed, 14 Nov 2018 10:34 AM IST
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कोबरा और नेवले की लड़ाई
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कोबरा और नेवले की लड़ाई आपने जरूर देखी होगी लेकिन ऐसी खूनी लड़ाई आपने शायद ही देखी होगी। यूपी के मेरठ कॉलेज में 58 साल से कोबरा और नेवले में खूनी जंग चल रही है। जी हां, सुनने में अटपटा लगता है लेकिन 58 साल पहले हुई ये घटना आज भी जूलॉजी विभाग में जीवंत नजर आती है। यकीन नहीं होता तो देखें ये तस्वीरें और जानें क्या है इसकी असली कहानी :-
कोबरा और नेवले की लड़ाई
दरअसल, 58 साल पहले कोबरा और नेवले की इस खूनी जंग के दौरान मौत हो गई थी। दोनों की मौत के बाद इनको उसी स्थिति में संरक्षित करके रखा गया है जिसमें ये दोनों मिले थे।
पेड़ पर लिपटा पाइथन
सिर्फ कोबरा और नेवला ही नहीं बल्कि 60 साल पहले जंगल में मिली लोमड़ी हो या फिर पेड़ पर लिपटा पाइथन। माछरा के एक गांव में सन 65 में जन्मे दो सिर वाले बालक से लेकर दूसरे दुर्लभ जीव यहां वर्षों से संरक्षित रखे हुए हैं। जूलॉजी के छात्र-छात्राएं इस लैब में आकर अपना ज्ञान बढ़ाते हैं।
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ऊंट के शरीर की संरचना
हम बात कर रहे हैं मेरठ कॉलेज के जूलॉजी म्यूजियम की। सन 1946 में बने जूलॉजी विभाग में इस म्यूजियम का उद्घाटन सन 1971 में हुआ था। ये सारे दुर्लभ जीव म्यूजियम में इससे पहले ही आ चुके थे। उस वक्त विभाग के प्रोफेसर, छात्र-छात्राएं और दूसरे लोग जंगलों से मृत जीवों को यहां लाकर संरक्षित करके रखते थे।
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बैल की अस्थियों का ढांचा
सन 1972 में वन्य जीव अधिनियम बनने की वजह से यहां पर किसी भी मृत जीव को संरक्षित करके नहीं रखा गया। पिछले साल यूजीसी से मिली ग्रांट के बाद जूलॉजी म्यूजियम की पूरी तस्वीर बदल गई है। यहां कसेरूकी और अकसेरूकी संरक्षित जंतुओं का अच्छा खासा संग्रह मौजूद है।