दिन और रात के तापमान में भारी उतार चढ़ाव के बीच मेरठ में मृत्युदर का ग्राफ अचानक ही चढ़ गया। बीते दो दिनों में सूरजकुंड शवदाह गृह में आम दिनों की तुलना में तीन गुना ज्यादा शव अंत्येष्टि के लिए पहुंचे।
जिंदगी पर भारी मौसम की मार, मेरठ में अचानक बढ़ी मृत्यु दर, दो दिन में 128 शवों का अंतिम संस्कार
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शहर में हिंदू समाज के अंतिम संस्कार के लिए सूरजकुंड सहित कंकरखेड़ा, कसेरूखेड़ा, शताब्दीनगर, बागपत रोड आदि स्थानों पर शवदाह गृह हैं। वहीं, मुसलिम समाज के शहर में करीब सौ के आसपास कब्रिस्तान हैं।
शहर के ज्यादातर लोग अंतिम संस्कार का सामान रोडवेज स्थित गंगा मोटर कमेटी की दुकान से ही खरीदते हैं। दुकान संचालक बिजेंद्र और आशीष के अनुसार, एक और दो जनवरी में हिंदू और मुस्लिम समाज के 128 लोग अंतिम संस्कार से संबंधित सामान लेकर जा चुके हैं।
55 वर्ष से ऊपर के हैं ज्यादातर
मृतकों में ज्यादातर 55 वर्ष से अधिक उम्र के हैं। गंगा मोटर कमेटी के सचिव दिनेश चंद जैन ने बताया कि सर्दी के मौसम में मृत्यु दर बढ़ जाती है। हालांकि एक और दो जनवरी को मृतकों की संख्या में काफी इजाफा हुआ।
सूरजकुंड शवदाह गृह में आम दिनों में पांच से छह शव आते हैं। एक और दो जनवरी में यह संख्या 25 से 30 तक पहुंच गई। बृहस्पतिवार को तो शव जलाने के लिए प्लेटफार्म भी कम पड़ गए।
देहात क्षेत्र में भी बढ़ी संख्या
नगर क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी दो दिन बदलते मौसम के कारण मृतकों की संख्या में इजाफा हुआ है। मवाना, किठौर, परीक्षितगढ़, सरधना, खरखौदा आदि क्षेत्रों में सर्दी वृद्धों पर भारी पड़ी है। लोगों के अनुसार, ठंड बढ़ने के साथ साथ मृतकों की संख्या बढ़ी है।
अब सूरजकुंड पर होगा गैस शवदाह गृह
दिल्ली और नोएडा की तर्ज पर अब सूरजकुंड में भी गैस शवदाह गृह बनाने की तैयारी है। इसकी अनुमानित लागत 40 लाख है। गंगा मोटर कमेटी के सचिव दिनेश चंद्र जैन ने बताया कि इलेक्ट्रिक शवदाह गृह को ही गैस शवदाह गृह के रूप में परिवर्तित किया जाएगा।
इसमें एक दिन में आठ शवों का अंतिम संस्कार हो सकेगा। आग जलने के कारण धार्मिक आस्था भी प्रभावित नहीं होगी। 55 से 60 मिनट में अंत्येष्टि हो जाएगी। 18 किग्रा गैस खर्च होगी।