इंटरनेशनल गैंग के सरगना अपराधी शरद गोस्वामी और उसके परिजनों के बैंक खातों में चार करोड़ से ज्यादा का लेनदेन हो गया। लेकिन पुलिस 36 लाख रुपये ही सीज करा पाई। वहीं, आयकर विभाग ने भी शरद के बैंक खातों की गोपनीय जांच शुरू कर दी है। आगे देखें आखिर कैसे अपराधी शहर के एक कोने पर इस पैसे से तैयार करा रहा था थ्री स्टार होटल और कैसे वह पुलिस के रडार पर आया: -
सरगना शरद के बैंक खाते से चार करोड़ का लेनदेन... 36 लाख सीज, थ्री स्टार होटल के निर्माण की जांच शुरू
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माधवपुरम, ब्रह्मपुरी निवासी शरद गोस्वामी बीती 20 सितंबर को फर्जी मुठभेड़ में 28 पुलिसकर्मियों पर वाद दायर करने के बाद से पुलिस के रडार पर आ गया था। पुलिस ने उसका रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया तो वह शातिर अपराधी निकला। जिसके बाद ब्रह्मपुरी थाने में उसकी हिस्ट्रीशीट खोलते हुए उस पर 20 हजार का इनाम घोषित कर दिया गया। पुलिस ने उसके बैंक खाते भी सीज करा दिए गए थे।
अब शरद अंतर्राष्ट्रीय लुटेरा गैंग का सरगना निकला तो उसके बैंक खातों की नए सिरे से पड़ताल शुरू हो गई। सामने आया कि उसके कई खातों में करोड़ों रुपये का लेनदेन हो चुका था। जबकि पुलिस दो-तीन दिनों में उसके खातों में 36 लाख रुपये ही सीज करा पाई।
माना जा रहा है कि शरद को इसकी सूचना पहले ही मिल गई थी, इसलिए प्रारंभिक जांच में 15 माह में शरद, उसकी मां सुमन और पत्नी प्रियंका के खातों में चार करोड़ के करीब का लेनदेन सामने आया। लेकिन अभी दूसरे खातों की डिटेल मिलना बाकी है।
28 पुलिसकर्मियों पर वाद में 14 को सुनवाई
शरद गोस्वामी द्वारा फर्जी मुठभेड़ बताकर 28 पुलिसकर्मियों के खिलाफ वाद दायर करने के मामले में गुरुवार को सीजेएम अपूर्व सिंह ने आगामी 14 अक्तूबर की तारीख सुनवाई के लिए नियत की है।
दागी पुलिस वालों में बेचैनी
शरद गोस्वामी पांच साल से लगातार अपराध करता-करता अंतर्राष्ट्रीय अपराधी बन गया। इसके गिरोह में 100 से अधिक बदमाश बताए गए। 11 मुकदमे दर्ज हैं और दिल्ली से भगोड़ा भी घोषित था। लेकिन वह पहली बार जेल गया। रिमांड भी मंजूर हो गया। इसको लेकर दागी पुलिस वालों में बेचैनी है।
शरद की दोस्ती बदमाशों के साथ पुलिस वालों से भी है। एक दरोगा और दो सिपाही ही नहीं, 20 से अधिक पुलिस वाले उसके गहरे दोस्त हैं। मोबाइल चोरी हो या लूट, सबसे पहले शरद के पास ही पुलिस वालों की कॉल पहुंचती थी। कौन बदमाश मोबाइल छीन रहे हैं, इसकी जानकारी कुछ पुलिस वालों को भी थी। ब्रह्मपुरी, परतापुर और कंकरखेड़ा में मोबाइल चोर और लुटेरों के साथ उसका नाम नाम सिर्फ शरद लिखा जाता था।
शरद कौन है और कहां रहता है, इसकी जानकारी मुकदमे में नहीं रहती थी। फर्जी मुठभेड़ बताकर 28 पुलिस वालों के खिलाफ वाद दायर के बाद शरद का पूरा नाम व पता सामने आया। जिसके बाद गुरुवार को शरद जेल गया और पुलिस को चार दिन का रिमांड मिल गया। इसका पता लगते ही कई दागी पुलिस वालों में खलबली मची है। इन पुलिस वालों को अंदेशा है कि कहीं उनके काले कारनामे की पोल शरद न खोल दे।
इंस्पेक्टर की भूमिका संदिग्ध
दागी पुलिस कर्मियों में एक इंस्पेक्टर का नाम भी सामने आया है। थाने के एक सिपाही ने शरद का नाम इंस्पेक्टर को बताया था। लेकिन घेराबंदी होने से पहले ही शरद ने इंस्पेक्टर को मोटा पैसा देकर शांत कर दिया। जांच में दागी पुलिसकर्मियों में उक्त इंस्पेक्टर का नाम सामने आया है। वहीं, शरद को संरक्षण देने वाला सिपाही विपिन भाटी लापता हो गया, जिसकी लिसाड़ीगेट थाने में गैर हाजिरी लिखी गई है।