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हाशिमपुरा कांड के बाद चर्चित रहा मेरठ का यह दंगा, 106 घरों को किया था आग के हवाले

Fri, 02 Nov 2018 02:40 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Fri, 02 Nov 2018 02:40 PM IST
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Hashimpura massacre before a big riot in Meerut
मेरठ न्यूज

मई 1987 को मेरठ शहर में एक दिन के अंतराल में दो ऐसे दंगे हुए जिन्होंने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। 22 मई को हाशिमपुरा में हुए दंगे की चिंगारी से शहर झुलस उठा था। धार्मिक उन्माद की भड़की चिंगारी के बाद आपसी भाई चारा भी टूट गया। पुलिस, पीएसी, पैरामिलिट्री और सेना शहर में दंगे को काबू करने में लगी थी। लेकिन 24 घंटे भी नहीं बीत पाए थे कि हाशिमपुरा से सात किमी की दूरी पर मलियाना में भी दंगा फैल गया। देखते ही देखते पूरा शहर छावनी में तब्दील कर दिया गया था।

Hashimpura massacre before a big riot in Meerut
मेरठ न्यूज

14 अप्रैल 1987 को मेरठ में धार्मिक उन्माद की चिंगारी भड़की थी। लेकिन स्थानीय फोर्स ने शहर को शांत कराने के लिए कोशिश की। गुलमर्ग सिनेमा से शुरू हुआ तनाव बढ़ता चला गया। 19 मई 1987 को तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्यमंत्री पी. चिदंबरम और यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह भी मेरठ पहुंचे थे।

Hashimpura massacre before a big riot in Meerut
मेरठ न्यूज

तत्कालीन मुख्यमंत्री ने खुद कहा था कि सुरक्षा कड़ी है और बाहर से भी फोर्स लगाई जा रही है। लेकिन तीन दिन बाद हाशिमपुरा कांड हो गया जिसमें 42 लोग मारे गए। शहर के कई हिस्सों में पीएसी तैनात कर दी गई। लेकिन दूसरे समुदाय के लोगों ने पीएसी का विरोध जताया, कुछ स्थानों से पीएसी को हटाकर सेना और पैरामिलिट्री फोर्स प्रशासन ने तैनात की।

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Hashimpura massacre before a big riot in Meerut
हाशिमपुरा दंगा

22 मई 1987 के दंगे के बाद 23 मई को मलियाना दंगे की चपेट में आ गया। मलियाना में भी मिश्रित आबादी थी। लेकिन दंगे ने दोनों ही समुदाय के लोगों में आपसी भाईचारा खत्म कर दिया। पूरा मलियाना सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में आ गया। 23 मई की रात होते ही पूरे शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया था। पता नहीं चला कि आग की लपटें कहां से उठ रही हैं और धुआं कहां तक जा रहा है। जिसने भी यह मंजर देखा, वह हाथ जोड़कर यही कहता था कि, किसी तरह शहर बच जाए।

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Hashimpura massacre before a big riot in Meerut
मेरठ न्यूज

वहीं मलियाना में भी ऐसे ही जख्म दिए गए। जहां करीब 106 घरों को आग के हवाले कर दिया गया। चारों तरफ भारी संख्या में सेना के अलावा पैरामिलेट्री और पीएसी ही शहर की सड़कों पर नजर आती थी। मलियाना का अधिकांश भाग तहस नहस हो गया। दंगाइयों ने दुकानों और घरों में आग लगाने के साथ ही पीएसी और फोर्स के सामने ही कई लोगों को मौत के घाट उतार दिया। दो दिन में दो बड़े दंगों ने लखनऊ और दिल्ली को भी हिलाकर रख दिया था। हाशिमपुरा कांड पर तो बुधवार को कोर्ट का फैसला आ गया, जहां पीड़ितों ने यही कहा कि उन्हें इंसाफ मिल गया। लेकिन मलियाना कांड पर अभी लोगों को फैसले का इंतजार है।

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