योगी सरकार बनने के बाद से अपराधियों पर शिकंजा कसा रहा है। लेकिन शरद के सामने सारा सिस्टम फेल हो गया। चोरी और लूट के मोबाइलों को देशभर में लूटकर विदेशों तक पहुंचाता रहा और पुलिस अंजान रही।
इंटरनेशनल गैंग ने मुंबई से दुबई तक फैलाया नेटवर्क, सोता रहा इंटेलीजेंस और खुफिया विभाग
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शरद ने 28 पुलिस वालों के खिलाफ वाद दायर किया तो पुलिस जागी
20 सितंबर को इस गैंग के सरगना शरद गोस्वामी ने फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाकर 28 पुलिसवालों के खिलाफ वाद दायर किया तो वह पुलिस के रडार पर आ गया था।
जिसके बाद पुलिस ने शरद की ब्रह्मपुरी थाने में हिस्ट्रीशीट (85-ए) खोली। उस पर बीस हजार का इनाम घोषित िकया। पुलिस लगातार उसका पीछा कर रही थी और उसका गैंग बेनकाब कर दिया।
शरद समेत सात आरोपियों से बरामद 280 मोबाइल बरामद कहां से लूटे, इसकी जांच भी चुनौती है। पुलिस ने प्रेस वार्ता में तीन-चार वारदातों को ही बताया।
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एडीजी ने बताया कि इस मामले में आईपीएस धवल जायसवाल के नेतृत्व में एसआईटी जांच होगी। विदेशों से कहां-कहां और कितना पैसा आया, शरद के संबंध कितने पुलिस वालों से और गैंगों से हैं, इसकी जांच होगी।
गैंग में शामिल रुबीना उर्फ चांदनी और सोनिया की तलाश है। वहीं, पुलिस ने दावा किया कि बदमाश चोरी और लूट के मोबाइल के पार्ट्स चीन में बेचते थे। सवाल है कि चीन में खुद ही पार्ट्स इतने सस्ते मिलते हैं, तो वह कितने में खरीदते होंगे। इसको लेकर भी संदेह हो रहा है।
शरद का मुख्य साथी नदीम मुंबई में गैंग संभालता है। उसी के माध्यम से चोरी/लूट के मोबाइल विदेशों में भेजे जाते थे। आईफोन के पासवर्ड क्रेक कर उनके पार्ट्स बेचे जाते थे। मुंबई, इंदौर, बंगलूरू में भी मोबाइल बेचे जाते थे। शरद पूरा नेटवर्क बिजली बंबा बाईपास स्थित एक अपार्टमेंट से चलाता था। उसकी योजना होटल बनने पर वहां से पूरा गैंग चलाने की थी।
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