मीलों की दूरी और घर पहुंचने की मजबूरी...लोग पैदल चलने को बेबस, दोहरी भूमिका निभा रही पुलिस
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शाहजहांपुर की मुढिया सबा निवासी गुरपाल मेरठ में मवाना रोड स्थित पेपर मिल में नौकरी करता है। लॉकडाउन होने के चलते पेपर मिल बंद हो चुका है। गुरपाल का कहना है कि पिछले पांच दिन से खाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
गांव शाहजहांपुर में करीब 350 किलोमीटर दूर है ऐसे में कोई वाहन भी नहीं है। न ही कोई आने जाने का साधन। युवक का कहना है कि पैदल चलना पड़ रहा है। रास्ते में पुलिस मिलती है तो गाली देकर बोलती है। करीब 5 दिन में घर पैदल पहुंचा जा सकता है।
चंदौसी निवासी राजीवए जोगिंदर यादव केशव, सोनू, अभिषेक समेत 20 से अधिक युवक दिल्ली-देहरादून हाईवे पर पर कंपनी में काम कर रहे थे। जहां हाईवे पर निर्माण कार्य बंद हो गया। ऐसे में युवकों के सामने रोटी की भी समस्या पड़ गई। युवक मुजफ्फरनगर से पैदल ही चंदौसी के लिए चल दिए।
हापुड़ रोड पर युवकों ने बताया कि पास में पैसे तो हैं पर न तो कोई संसाधन है और न ही आने जाने की व्यवस्था। हर जगह पुलिस रोककर परेशान करती है। अब मजबूरी है। युवकों ने बताया की कावड़ यात्रा में रास्ते में शिविर या अन्य व्यवस्था में मदद तो मिल जाती है। लेकिन यहां तो कुछ भी नहीं मिल रहा।
बच्चे और महिला भी बेबस
कंपनी गार्डन के पास कई परिवार के लोग सड़क पर ही हार थककर रुके हुए थे। जिनमें महिलाएं और छोटे बच्चे भी थे। यह परिवार बदायूं से आ रहा था। जिन्हें अंबाला अपने घर जाना है। महिलाओं का कहना है कि रास्ते में खाने की कोई व्यवस्था नहीं है।
कहीं पुलिस भोजन दे दे तो ठीक है। नहीं तो ऐसी स्थिति आ रही है कि चलना मुश्किल हो रहा है। अब सब कुछ बंद हो चुका है। पता नहीं कैसे घर पहुंचना होगा। दिल्ली रोड हापुर रोड पढ़ो और अन्य मार्गों पीड़ित परिवार अपने घरों की तरफ बढ़ रहे हैं। किसी के सिर पर थैला है तो हाथों में जूते चप्पल हैं।