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घंटाघर की घड़ी से चलता और थमता था ये पूरा शहर, नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने की थी तारीफ

Wed, 14 Nov 2018 05:26 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 14 Nov 2018 05:26 PM IST
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meerut ghantaghar clock facts from british rule in india
घंटाघर मेरठ

मेरठ का घंटाघर तो सभी जानते हैं लेकिन इससे जुड़े किस्से आप शायद ही जानते हों। इसकी टिक टिक करती घड़ी हमेशा लोगों को सही समय बताती रही है। एक समय था जब पूरा ही शहर इस घड़ी के पेंडुलम की आवाज पर चलता ओर थम जाता था। जानें इससे जुड़ी ऐसी ही कुछ खास बातें:-


ब्रिटिश राज में इस भीड़भाड़ वाले इलाके में 1913 में घंटाघर का निर्माण हुआ और इंग्लैंड से वेस्टन एंड वाच कंपनी की यह घड़ी 1914 में लगाई गई। इसके बराबर में ही टाउन हॉल है। शहर के बीचोंबीच होने के कारण घंटाघर क्षेत्र में आजादी की लड़ाई के लिए सभाएं होती थी। 
 

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घंटाघर - फोटो : अमर उजाला
दस किलोमीटर तक जाती थी पेंडुलम की आवाज

इस घंटाघर की खासियत यह थी कि हर घंटे बाद इसके पेंडुलम की आवाज दस किमी की परिधि तक पहुंचती थी, उस समय आज की तरह का शोरगुल नहीं था। इसलिए इस घड़ी के पेंडुलम की आवाज को ही लोगों ने टाइम जानने का आधार बनाया हुआ था। लोग इस घड़ी की आवाज से अपना काम करते थे। 
 
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
नेताजी सुभाष चंद्र बोस

1930 के दशक में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने टाउन हॉल की जनसभा में लोगों में जोश भरा था। इसमें दूर दूर से लोग उन्हें सुनने आए थे। कुछ बुजुर्ग बताते हैं कि नेताजी को यह क्षेत्र बहुत अच्छा लगा और उन्होंने घंटाघर की तारीफ भी की थी। यहां महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू समेत कई नेताओं ने आजादी के लिए जनसभाएं की थी।  

 
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मेरठ घंटाघर - फोटो : अमर उजाला
जर्मनी से बुलवाया गया था घड़ीसाज 

बताया जाता है कि अंग्रेजी शासन के दौरान घंटाघर की घड़ी ने अचानक समय बताना बंद कर दिया। महीनों तक जब कोई कारीगर नहीं मिला तो तत्कालीन कलक्टर ने जर्मनी की घड़ी कंपनी को इस समस्या के बारे में पत्र लिखा। कंपनी ने जवाब भेजा कि मेरठ का रहने वाला अब्दुल अजीज एक बेहतरीन घड़ीसाज है, उसे इसकी मरम्मत के लिए भेजा जाएगा। अब्दुल अजीज जब मेरठ पहुंचे तो कलक्टर ने उन्हें इस घड़ी के रख रखाव की जिम्मेदारी दी। तब से उनकी ही पीढ़ियां इस घड़ी को चालू रखे हुए हैं। उनके पौत्र आज भी घंटाघर की साफ सफाई और देख रेख करते हैं।

 
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शाहरुख खान
शाहरुख को भी पसंद आया मेरठ का घंटाघर

मेरठ का घंटाघर कितना प्रसिद्ध है इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि बॉलीवुड अभिनेता अपनी फिल्म 'जीरो' की शूटिंग पहले इसी लोकेशन पर करना चाहते थे। उन्होंने इस घड़ी को ठीक भी कराया था। लेकिन किन्हीं कारणों से बाद में इस मुंबई में ही घंटाघर का सेटअप तैयार किया गया। शाहरुख की फिल्म 'जीरो' में मेरठ के घंटाघर को खास रूप से फोकस किया गया है।

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