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ऑक्सीजन का आपातकाल: अस्पतालों के बाहर तड़प रहे मरीज, मिल रहा सिर्फ इंतजार, तस्वीरें बयां कर रहीं सच्चाई

Mon, 26 Apr 2021 05:13 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 26 Apr 2021 05:13 PM IST
सार

मेरठ में बेड और ऑक्सीजन के अभाव में तमाम मरीज इलाज के लिए तड़प रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग से लेकर प्रशासन तक इनकी कोई सुनने वाला नहीं।

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Oxygen emergency: Patients are not being admitted to hospitals in Meerut and see photos
मेरठ में अस्पतालों में बेड फुल। - फोटो : amar ujala

उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में बेड और ऑक्सीजन के अभाव में तमाम मरीज इलाज के लिए तड़प रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग से लेकर प्रशासन तक इनकी कोई सुनने वाला नहीं। कोई मदद करना भी चाहे तो कर नहीं पा रहा है।

Oxygen emergency: Patients are not being admitted to hospitals in Meerut and see photos
अस्पताल में के बाहर तड़प रहे मरीज। - फोटो : amar ujala

रविवार को दिल्ली के भजनपुरा से एंबुलेंस में मेडिकल कॉलेज पहुंचे उत्तम सिंह को भर्ती नहीं किया गया। बोले, जीटीबी में भर्ती करने से मना कर दिया। गाजियाबाद होते हुए मेरठ कई निजी अस्पतालों में गया। कहीं भी भर्ती नहीं किया। एक घंटे से मेडिकल कॉलेज में हूं। इमरजेंसी में भर्ती होने के लिए कोशिश कर रहा हूं लेकिन, बेड फुल बताकर उन्हें भर्ती नहीं किया गया। आखिरकार वह वहां से चले गए। कहां गए, नहीं पता। उनके मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो वह स्विच ऑफ आया।

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रोते परिजन। - फोटो : amar ujala

वहीं, टीपी नगर के रहने वाले महेश कुमार सुबह नौ बजे मेडिकल कॉलेज पहुंचे। ऑक्सीजन वाला बेड नहीं है, यह कहकर इमरजेंसी में भर्ती करने से मना कर दिया। बेड खाली होने का इंतजार कर दोपहर 1:00 बजे वह भी चले गए। कसेरूखेड़ा के रहने वाले बृजपाल सिंह एंबुलेंस में बैठे रहे। इमरजेंसी में भर्ती नहीं किया गया। इंतजार करते रहे कभी तो बेड खाली होगा। मेडिकल इमरजेंसी में एक महिला अपनों के स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करती नजर आईं।

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मरीज को भर्ती कराने के लिए लाए परिजन। - फोटो : amar ujala

स्ट्रेचर नहीं मिला, कुर्सी पर ले जाना पड़ा, ऑक्सीजन भी खुद लेकर आए
एल ब्लॉक शास्त्री नगर की नैना को सांस लेने में दिक्कत थी। मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी में ले गए। स्ट्रेचर नहीं मिला तो कुर्सी पर ले गए। बाहर से परिवार वाले खुद ही ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर आए और भर्ती कराया। इसी तरह बिजेंद्र कुमार को भी सांस लेने में दिक्कत थी, मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी में आए थे। स्ट्रेचर नहीं मिला तो इनके परिवार वाले गोद में उठाकर इमरजेंसी में ले गए।

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अपनी ऑक्सीजन के साथ भर्ती हो रहे मरीज। - फोटो : amar ujala

कोविड अस्पताल से महिला की ज्वैलरी 'गायब'
हापुड़ निवासी सुरेश बाला (63) को 20 अप्रैल को मेडिकल के कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसी रात उनकी मृत्यु हो गई थी। अब उनकी ज्वेलरी नहीं मिल रही है। उनके भांजे मनीष ने बताया की वह कलेक्ट्रेट में बाबू हैं। अधिकारियों से फोन भी करा चुके हैं, मगर सुनवाई नहीं हो रही है। उनकी मौसी के कंगन, कुंडल, सैंपिल और लौंग थी। सीसीटीवी फुटेज में भी वह दिख रही है, लेकिन जब उनकी मृत्यु के बाद शव पैक किया गया तो वह नहीं थी। इसकी शिकायत प्रधानाचार्य से भी की जा चुकी है। प्रधानाचार्य का कहना है कि ज्वेलरी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है।

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