मुरादाबाद में सिविल सेवा-2025 के घोषित परिणाम में मंडल के सितारों ने अपनी चमक बिखेरी है। सिविल सेवा में आठ होनहारों ने सफलता का परचम लहराया है। इसमें मुरादाबाद के छह युवक शामिल हैं। अमरोहा की बेटी और चंदौसी के युवक ने भी सफलता की उड़ान भरी है।
UPSC: यूपीएससी में चाय वाले के बेटे ने फिर रच दिया इतिहास, इन आठ हाेनहारों ने पाई सफलता; सितारे की कहानी
Devansh Gupta UPSC CSE Topper 2025: मुरादाबाद मंडल के सितारे सिविल सेवा में चमके हैं। आठ होनहारों ने सफलता पाई है। सिविल सेवा में चयनित होने वालों में छह युवक मुरादाबाद के हैं, एक अमरोहा की बेटी और चंदौसी के युवक ने भी सफलता का परचम लहराया है।
यूपी पुलिस के इंस्पेक्टर की बेटी बनी आईएएस, हासिल की 14वीं रैंक
अमरोहा में सिविल सेवा परीक्षा (यूपीएससी) में अमरोहा की बेटी सुरभि यादव ने शानदार सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। उन्होंने देशभर में 14वीं रैंक प्राप्त की है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है। इंस्पेक्टर पिता राकेश कुमार यादव और मां अखिलेश देवी की आंखें खुशी से नम हो गईं, जबकि गांव और रिश्तेदारों में मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया गया।
मूलरूप से नौगावां सादात क्षेत्र के गांव नसीर नगला निवासी राकेश कुमार यादव उत्तर प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं और वर्तमान में ईओडब्ल्यू वाराणसी में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने कॅरिअर की शुरुआत यूपी पुलिस में कांस्टेबल के पद से की थी। वर्ष 2007 में वह दरोगा बने और वर्ष 2021 में पदोन्नत होकर इंस्पेक्टर बने। परिवार में पत्नी अखिलेश देवी, बेटी सुरभि यादव और बेटा राजशेखर यादव हैं।
परिवार में शिक्षा का माहौल हमेशा से रहा, जिसने बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। राकेश यादव की पोस्टिंग के दौरान परिवार बरेली में रहने लगा था। सुरभि यादव ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बरेली से ही पूरी की। उन्होंने दसवीं की परीक्षा एसआर इंटरनेशनल स्कूल बरेली से और 12वीं की परीक्षा आर्मी पब्लिक स्कूल बरेली से उत्तीर्ण की।
इंटरमीडिएट में सुरभि ने 96 प्रतिशत अंक प्राप्त कर मंडल में पहला स्थान हासिल किया था। इसके बाद सुरभि ने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से बीए ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली से इतिहास विषय में एमए की डिग्री प्राप्त की।
सुरभि का सपना शुरू से ही यूपीएससी के माध्यम से देश सेवा करना था। हालांकि, उनका सफर आसान नहीं रहा। सिविल सेवा परीक्षा 2023 के फाइनल में वह मात्र दस अंकों से चयन से चूक गई थीं। लेकिन उसी परीक्षा के अंकों के आधार पर उन्हें युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत माय भारत योजना में एडिशनल डायरेक्टर/डीवाईओ के पद पर नियुक्ति मिली। वह बीते जनवरी से इस पद पर कार्यरत हैं।
तीन प्रयासों में सफलता नहीं मिलने के बावजूद सुरभि ने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य के प्रति लगातार मेहनत जारी रखी। शुक्रवार को घोषित हुए यूपीएससी के परिणाम में उन्होंने देश में 14वीं रैंक हासिल कर अपनी मेहनत का फल पा लिया। सुरभि की इस सफलता पर उनके पिता राकेश कुमार यादव ने कहा कि बेटी ने दसवीं पास करने के बाद ही यूपीएससी करने और देश सेवा करने का संकल्प ले लिया था।
देवांश गुप्ता को मिली 77वीं रैंक
मुरादाबाद के दीनदयाल नगर निवासी देवांश गुप्ता ने 77वीं रैंक प्राप्त की है। उनका यह पांचवां प्रयास था और मेंस परीक्षा व साक्षात्कार दूसरी बार था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में पुणे से मैंने बीए एलएलबी किया था। वहां पर यरवदा सेंट्रल जेल में कैदियों के लिए काम करने का मौका मिला। उस वक्त मुझे महसूस हुआ कि यहां पर काम करने का दायरा सीमित है। इसकी अपेक्षा सिविल सर्विस में धरातल पर काम करने के अवसर ज्यादा हैं। इसके बाद मैंने यूपीएससी में आवेदन किया। पहली दो बार की परीक्षा मैंने पाठ्यक्रम को समझने के लिए दी थी।
देवांश ने बताया कि आसपास हो रहे घटनाक्रम के प्रति जागरूक रहने के लिए उन्होंने प्रतिदिन अखबार पढ़ा। उन्होंने प्रतिदिन पांच से छह घंटे पढ़ाई की। उन्हें वेब सीरीज देखना पसंद है। उन्हें दोस्तों के साथ लांग ड्राइव पर जाना पसंद है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां प्रोफेसर किरन साहू को दी। वह गोकुलदास हिंदू गर्ल्स कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की सादगी बहुत पसंद है। वह मेरे प्रेरणास्रोत हैं। उन्हें किताब पढ़ना और डायरी लिखना पसंद है।
दूसरे प्रयास में सृजित को मिली 84वीं रैंक
मूलरूप से शाहजहांपुर और वर्तमान में केंद्रीय पुलिस अस्पताल परिसर निवासी सृजित कुमार ने दूसरे प्रयास में 84वीं रैंक प्राप्त की है। पिछले वर्ष उनकी 277वीं रैंक आई थी और आईआरएस सेवा मिली थी। उन्होंने बताया कि मैंने सबसे ज्यादा ध्यान उत्तर लिखने के तरीके पर दिया। जिन विषयों में कम अंक आए थे, उनका रिवीजन बढ़ा दिया था। जब तक प्रश्न हल नहीं हो जाता था, चाहे कितनी भी बार प्रयास क्यों न हो, मैं हल करने के बाद भी रुकता था।
इसकी वजह जब प्रश्नपत्र में सवाल आए तो मुझे अनुमान था कि उनको लिखना किस तरह से है। पिछली बार पहला प्रयास होने की वजह से उत्तर लिखने का अनुमान भी कम था। उन्होंने ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से घर पर रहकर ही पढ़ाई की है। उन्होंने प्रतिदिन सात से आठ घंटे पढ़ाई की। उन्हें गिटार बजाने का शौक है ।
पापा मेरे प्रेरणास्रोत
मेरे पापा सुभाषचंद्र गंगवार मुरादाबाद में एसपी यातायात के पद पर कार्यरत हैं। वह मेरे प्रेरणास्रोत हैं। उनको देखकर ही मुझे यूपीएससी की परीक्षा में बैठने की प्रेरणा मिली। जब भी मैं उनसे इस बारे में चर्चा करता था तो वह हमेशा मेरा हौसला बढ़ाते हैं। मेरे पापा और मम्मी नीलिमा सिंह यही कहते हैं कि जो लक्ष्य तुमने ठाना है तो तुम अपनी मेहनत से उसे जरूर पा सकते हो। उन्होंने हमेशा परिणाम की चिंता न करने की सीख दी।
चाय वाले के बेटे ने फिर रच दिया इतिहास, यूपीएससी में 152वीं रैंक हासिल की
चंदौसी की पंजाबी कॉलोनी के रहने वाले चाय वाले के बेटे देव डुडेजा ने यूपीएससी 2025 की परीक्षा में 152वीं रैंक प्राप्त कर इतिहास रच दिया। देव डुडेजा ने चौथी बार में पाई। तीसरी बार की वर्ष 2022-25 की परीक्षा में उन्होंने 327वीं रैंक हासिल की थी। उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा आईआरएस में ज्वाइंट आयुक्त के लिए हुआ है और वह नागपुर में दिसंबर 2025 से पंद्रह माह की ट्रेनिंग कर रहे हैं।
