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बापू ने प्रतापगढ़ में दिया विदेशी हटाओ, खादी अपनाओ का नारा 

Wed, 02 Oct 2019 12:43 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 02 Oct 2019 12:43 AM IST
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Bapu removes foreign in Pratapgarh, Khadi adopt
कालाकांकर स्थित गांधी चबूतरा। - फोटो : pratapgarh
 सत्य और अहिंसा के पथ पर चलकर अंग्रेजों को देश छोड़ने पर विवश करने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 14 नंबर 1929 को बरतानिया हुकूमत के खिलाफ कालाकांकर से बिगुल फूंका था। संयुक्त प्रांत में ‘खादी के लिए दौरा’ अभियान के तहत शाहजहांपुर से होते हुए वह प्रतापगढ़ पहुंचे। यहां कालाकांकर में विदेशी वस्त्रों की होली जलाई। जानकार बताते हैं कि उस समय तकरीबन 60 हजार रुपये कीमत के विदेशी वस्त्र जले थे। बापू ने लोगों में देशप्रेम का जज्बा भरने के साथ ही विदेशी वस्त्र हटाओ खादी अपनाओ का नारा दिया था। 

 
Bapu removes foreign in Pratapgarh, Khadi adopt
कालाकांकर स्थित शिलालेख। - फोटो : pratapgarh
देश में किसान आंदोलन की शुरुआत 1920 में हो चुकी थी। बरतानिया हुकूमत के जुल्म से लोग आजिज आ चुके थे। एक तरफ किसान आंदोलन कर रहे थे तो दूसरी तरह सत्य एवं अहिंसा के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी विदेशी वस्त्रों के खिलाफ जंग छेड़ रखी थी। देश के लोग विदेशी वस्त्रों का तिरस्कार करें और खादी वस्त्रों के पहनावे पर जोर दें, इसके लिए उन्होंने 1929 में खादी के लिए एक अभियान चलाया। इसके तहत संयुक्त प्रांत के 29 जिलों में उनका कार्यक्रम 11 सितंबर से 24 नवंबर तक निर्धारित था। लोकतंत्र रक्षक सेनानी आचार्य ओमप्रकाश पांडेय बताते हैं कि शाहजहांपुर के बाद वह कालाकांकर आए। यहां तीन दिन तक रुके। 14 नवंबर 1929 को तत्कालीन कालाकंाकर नरेश राजा अवधेश सिंह के संयोजकत्व में बापू ने विदेशी वस्त्रों की होली जलाई। इसमें राजघराने के साथ ही क्षेत्रीय लोग भी आगे आए। कुल 60 हजार रुपये के वस्त्र जलाए गए थे। इसमें जड़ी, आभूषण व मखमली महंगे कपड़े शामिल थे। बापू ने सभा कर सत्य व अहिंसा का पाठ पढ़ाया था। इसका जिले के लोगों पर बड़ा असर हुआ। लोग खादी के पहनावे पर लोग जोर देने लगे। 
 
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कालाकांकर स्थित जवाहर लाल नेहरू बाल क्रीड़ा स्थल जहां जलाई गयी विदेशी वस्त्रों की होली। - फोटो : pratapgarh
ताजपुर से आई चिमनी से जलाए गए विदेशी वस्त्र
कालाकांकर में बापू द्वारा जलाई गई विदेशी वस्त्रों की होली में ताजपुर की चिमनी का सहयोग लिया गया था। ताजपुर से इसे काफी मशक्कत कर लाया गया था। 
 
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कालाकांकर राजभवन। - फोटो : pratapgarh
29 जिलों के दौरे पर निकले महात्मा गांधी ने जिले में जमींदारों व रैयत के बीच बेहतर संबंध देखकर खुशी जताई थी। कई जगहों पर उन्हें जमींदारों और रैयत के बीच दूरी देखने को मिली थी, लेकिन प्रतापगढ़ में बेहतर तालमेल देखकर वह प्रसन्न हुए थे। 
 
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बभनमई स्थित गांधी चरखा केन्द्र। - फोटो : pratapgarh
14 नवंबर को कालाकांकर में विदेशी वस्त्रों को जलाने की तैयारी थी। महात्मा गांधी दो दिन पहले ही कालाकांकर आ गए थे। यहां दो दिन तक नियमित रामधुन लगाने के साथ लोगों को अंहिसा का पाठ पढ़ाया। 

 
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