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स्मृति शेषः बीएचयू के पूर्व कुलपति लालजी सिंह ने काशी में तय किया पढ़ाई से लेकर मोक्ष तक का सफर

Mon, 11 Dec 2017 02:43 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Mon, 11 Dec 2017 02:43 PM IST
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BHU former vice chancellor lalji singh full life story
lalji singh - फोटो : twitter
बीएचयू के पूर्व कुलपति एवं वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. लालजी सिंह का दिल का दौरा पड़ने के कारण रविवार की देर रात निधन हो गया। आज उनका अंतिम संस्कार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर होगा। बीएचयू के पूर्व कुलपति डॉ. लालजी सिंह ने जहां से शिक्षा-दीक्षा ली वहीं उन्होंने अंतिम सांस भी ली। कुलपति के कार्यकाल के दौरान वह मात्र एक रुपये वेतन लिया करते थे। आगे की स्लाइड्स में जानें...

 
BHU former vice chancellor lalji singh full life story
lalji singh - फोटो : अमर उजाला
बीएचयू के कुलपति रहे डॉ. लालजी सिंह को फादर ऑफ डीएनए फिंगरप्रिंट के नाम से भी जाना जाता था। रविवार की शाम को अपने पैतृक निवास जौनपुर से हैदराबाद जाने के दौरान बाबतपुर एयरपोर्ट पर उन्हें हार्ट अटैक आ गया था। बीएचयू आईसीयू में इलाज के दौरान डॉ. लालजी सिंह का निधन हो गया। उनका शव जौनपुर स्थित गृह आवास पर ले जाया गया। सोमवार को कई लोगों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। 

 
BHU former vice chancellor lalji singh full life story
lalji singh - फोटो : अमर उजाला
सोमवार शाम चार बजे मणिकर्णिका घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार होगा। उनके निधन से महामना की बगिया भी उदास हो गई। बीएचयू के पूर्व कुलपति की याद में आज शाम बीएचयू में छात्रों द्वारा कैंडिल मार्च निकाला जाएगा। इसके अलावा शहर में कई अन्य कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। डा. लालजी सिंह अगस्त 2011 से अगस्त 2014 तक बीएचयू के कुलपति रहे। 

 
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BHU former vice chancellor lalji singh full life story
lalji singh - फोटो : twitter

बीएचयू के पूर्व कुलपति डॉ. लालजी सिंह ने जहां से शिक्षा-दीक्षा ली वहीं उन्होंने अंतिम सांस भी ली। कुलपति के कार्यकाल के दौरान वह मात्र एक रुपये वेतन लिया करते थे। इंटरमीडिएट तक शिक्षा जौनपुर जिले में लेने के बाद उच्च शिक्षा के लिए 1962 में श्री सिंह बीएचयू चले आए थे।  यहां से उन्होंने बीएससी, एमएससी और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। 2004 में उन्हें भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें पद्मश्री से विभूषित किया गया। 

 
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lalji singh - फोटो : twitter
उत्तर प्रदेश में जौनपुर जिले के सदर तहसील एवं सिकरारा थाना क्षेत्र के कलवारी गांव के निवासी स्व. ठाकुर सूर्य नारायण सिंह के पुत्र थे। पांच जुलाई 1947 को डॉ. लालजी सिंह का जन्म हुआ था। वर्ष 1971 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने के बाद वे कोलकाता गये जहां पर साइंस में 1974 तक एक फे लोशिप के तहत रिसर्च किया। इसके बाद वे फेलोशिप पर यू.के. गए नौ माह बाद वापस भारत आए।

 
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