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Chaitra Navratri 2022: पूर्वांचल में प्रसिद्ध हैं मां दुर्गा के ये मंदिर, भक्तों का जुड़ा है अटूट विश्वास, इस नवरात्रि करें दर्शन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 02 Apr 2022 02:07 PM IST
पूर्वांचल में प्रसिद्ध हैं मां दुर्गा के ये मंदिर
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चैत्र नवरात्र शुरू हो चुके हैं और इन नौ दिनों में मां दुर्गा की पूजा करने का विधान है। इस दौरान वाराणसी और विंध्याचल ही नहीं बल्कि पूर्वांचल के कई जिलों में  मां के प्रसिद्ध मंदिरों में भारी संख्या में भक्तों का जमावाड़ा लगता है।  नवरात्रि के नौ दिन आस्था, श्रद्धा से परिपूर्ण होते हैं, जिसमें लोग मां के नौ स्वरूपों के दर्शन के लिए मंदिर जाते हैं। भक्त महानवमी के दिन खासतौर पर मंदिर जाते हैं और माता के दर्शन करते हैं।

पूर्वांचल में कई प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर हैं, जहां भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ऐसे में अगर आप भी नवरात्रि में देवी मां के पवित्र और प्राचीन मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं तो कुछ प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में जान लें। अगर आप पूर्वांचल के रहने वाले हैं तो आपको माता के दर्शन के लिए कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है। नीचे की स्लाइड्स में देखें...
मां कूष्मांडा मंदिर वाराणसी
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देवी कुष्मांडा का मंदिर, वाराणसी: तीन लोक से न्यारी काशी में मां आद्य शक्ति अदृश्य रूप में दुर्गाकुंड मंदिर में विराजमान हैं।  माता कुष्मांडा का यह सिद्ध मंदिर प्राचीनतम मंदिरों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर आदिकालीन है। वैसे तो हर समय दर्शनार्थियों का आना लगा रहता है लेकिन नवरात्र के चौथे दिन यहां मां कुष्मांडा के दर्शन और पूजा के लिए भारी भीड़ उमड़ती है।  इस मंदिर का उल्लेख 'काशी खंड' में भी मिलता है। यह मंदिर वाराणसी कैंट स्टेशन से करीब पांच किमी की दूरी पर है।
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शैलपुत्री देवी मंदिर में दर्शनार्थियों की उमड़ी भीड़
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शैलपुत्री मंदिर, वाराणसी: देवी मां के नौ स्वरूपों में से एक माता शैलपुत्री के दर्शन करना चाहते हैं, तो पवित्र नगरी वाराणसी के अलईपुर क्षेत्र में मां शैलपुत्री का मंदिर है। यहां हर साल काफी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि यहां मां के दर्शन मात्र से ही भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। 
विंध्याचल मंदिर
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विंध्याचल: मिर्जापुर जिले में स्थित आदिशक्ति जगत जननी मां विंध्यवासिनी की चौखट पर श्रद्धा, विश्वास और आस्था का समागम दिखता है।  51 शक्तिपीठों में से एक विंध्याचल धार्मिक पर्यटन स्थल है जहां आपको माता दुर्गा के कई मंदिर देखने को मिल जाएंगे। गंगा किनारे शक्तिपीठ के अलावा अष्टभुजा देवी मंदिर , कालीखोह मंदिर, सीता कुंड इत्यादि स्थानों पर नवरात्र में खासी भीड़ जुटती है। 
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ज्वालामुखी मंदिर, सोनभद्र
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ज्वालामुखी मंदिर, सोनभद्र:  शक्तिनगर स्थित ज्वालामुखी मंदिर की अपनी एक विशेष मान्यता है। पूर्वजों की मानें तो शिव तांडव के दौरान माता पार्वती के शरीर के जो टुकड़े हुए थे, उस दौरान इस मंदिर के स्थान पर उनकी जिह्वा कट कर गिरी थी। इसके बाद ज्वाला देवी का उदय हुआ था। मान्यता है कि भक्तों के नारियल बांध कर मत्था टेकने से उनकी मुरादें पूरी हो जाती हैं। यहां पर वासंतिक और शारदीय नवरात्र में भक्तों का रेला लगा रहता है। शक्तिनगर स्थित ज्वाला देवी मंदिर का बहुत पुराना पौराणिक इतिहास रहा है।
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