हम सभी जानते हैं कि एक बार जिस जगह पर कोई कब्र बन जाए तो फिर वहां दोबारा कब्र नहीं बनाई जाती, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में ऐसा नहीं है। यहां पुरानी कब्रों को ही दोबारा खोदा जा रहा है और इसके पीछे की वजह बेहद ही चौंकाने वाली है।
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Johannesberg old graves dug up
- फोटो : AFP
दरअसल, इस शहर में शवों को दफनाने के लिए जगह की कमी हो गई है, इसलिए यहां हर हफ्ते 50 से 60 कब्रों को दोबारा खोदा जा रहा है, ताकि उसमें एक और शव को दफनाया जा सके। करीब तीन दशक पहले डरबन शहर में भी कुछ इसी तरह की समस्या पैदा हुई थी। तब यहां एड्स और रंगभेद के कारण हुई हिंसा में काफी लोग मारे गए थे।
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Johannesburg
- फोटो : Pixabay
जोहानिसबर्ग में लगातार बढ़ रही जनसंख्या चिंता का विषय बन गई है। इसके अलावा यहां विदेशियों के भी आकर बसने से शहरी इलाकों में बोझ बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो अगर यहां बढ़ती जनसंख्या पर जल्द अंकुश नहीं लगाया गया तो अगले 50 सालों में यहां शवों को दफनाने के लिए एक इंच भी जगह नहीं बचेगी।
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Graves
- फोटो : Max Pixel
दक्षिण अफ्रीका के सिमिट्री (कब्रिस्तान) एसोसिएशन के चेयरमैन डेनिस इंग का कहना है, 'अब लोगों को समझना होगा कि शव को दफनाने की जगह जल्द खत्म हो जाएगी। ऐसे में कब्रों को दोबारा इस्तेमाल करने और शवों को जलाए जाने के विकल्प के बारे में सोचना होगा।'
हालांकि, अफ्रीकी समुदायों में शवों को जलाने की परंपरा नहीं है, क्योंकि वो इसे अप्राकृतिक और गैर-पारंपरिक मानते हैं। लोगों का मानना है कि ऐसा करना नरक की आग में जलने जैसा होता है। ऐसे में यहां शवों को जलाने की मंजूरी मिलना काफी मुश्किल हो सकता है।
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