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Mohali News: ओवरलोडेड टिपरों के खिलाफ कराली के पास धरना छठे दिन भी जारी
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लांडरां/बनूड़ क्षेत्र की लिंक सड़कों पर ओवरलोडेड टिपरों की आवाजाही के विरोध में गांव कराली के पास पंचायतों की ओर से लगाया गया धरना मंगलवार को छठे दिन भी जारी रहा। धरने में इलाके के ग्रामीणों के साथ विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
धरने के दौरान सीपीएम के वरिष्ठ नेता कामरेड गुरदर्शन सिंह खासपुर और खेत मजदूर यूनियन के नेता सतपाल सिंह (पूर्व सरपंच) विशेष रूप से पहुंचे और प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। इस मौके पर सरपंच लखविंदर सिंह कराला, सफी मोहम्मद पप्पी (सरपंच कराली), बलजीत सिंह (सरपंच राजोमाजरा), गुरदीप सिंह (पूर्व सरपंच कराला) और धर्मवीर शैली (पूर्व सरपंच झिऊर माजरा) सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों का आरोप है कि अमलाला के पास घग्गर नदी से डिस्टिलिंग के नाम पर गैरकानूनी माइनिंग की जा रही है और मिट्टी से भरे ओवरलोडेड टिपर गांवों की लिंक सड़कों से गुजर रहे हैं। इससे सड़कों की हालत खराब हो रही है और कई हादसे भी हो चुके हैं। लोगों का कहना है कि इन टिपरों के कारण आम लोगों के लिए गांवों की सड़कों से गुजरना मुश्किल हो गया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि धरने को कई राजनीतिक दलों का समर्थन मिल रहा है, लेकिन अब तक कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर आकर समस्या के समाधान का भरोसा नहीं दे रहा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई समाधान नहीं हुआ तो वे बड़ी रणनीति बनाकर आंदोलन को और तेज करेंगे।
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धरने के दौरान सीपीएम के वरिष्ठ नेता कामरेड गुरदर्शन सिंह खासपुर और खेत मजदूर यूनियन के नेता सतपाल सिंह (पूर्व सरपंच) विशेष रूप से पहुंचे और प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। इस मौके पर सरपंच लखविंदर सिंह कराला, सफी मोहम्मद पप्पी (सरपंच कराली), बलजीत सिंह (सरपंच राजोमाजरा), गुरदीप सिंह (पूर्व सरपंच कराला) और धर्मवीर शैली (पूर्व सरपंच झिऊर माजरा) सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
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ग्रामीणों का आरोप है कि अमलाला के पास घग्गर नदी से डिस्टिलिंग के नाम पर गैरकानूनी माइनिंग की जा रही है और मिट्टी से भरे ओवरलोडेड टिपर गांवों की लिंक सड़कों से गुजर रहे हैं। इससे सड़कों की हालत खराब हो रही है और कई हादसे भी हो चुके हैं। लोगों का कहना है कि इन टिपरों के कारण आम लोगों के लिए गांवों की सड़कों से गुजरना मुश्किल हो गया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि धरने को कई राजनीतिक दलों का समर्थन मिल रहा है, लेकिन अब तक कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर आकर समस्या के समाधान का भरोसा नहीं दे रहा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई समाधान नहीं हुआ तो वे बड़ी रणनीति बनाकर आंदोलन को और तेज करेंगे।