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Mohali News: साक्ष्यों के अभाव में इंदरजीत हत्याकांड के तीन आरोपी बरी
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मोहाली। जिला एवं सत्र न्यायालय (मोहाली) ने चर्चित इंदरजीत सिंह हत्याकांड में नामजद तीन आरोपियों गुरदेव सिंह, अमित डागर और कौशल चौधरी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सोमवार को सुनाए फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा और संदेह का लाभ आरोपियों को दिया जाता है।
मामला 7 नवंबर 2019 का है। स्टेडियम रोड, दर्पण सिटी टर्न, खरड़ में दिनदहाड़े फायरिंग में इंदरजीत सिंह की मौत हो गई थी। पुलिस ने मौके से खून से सनी मिट्टी और 7.65 बोर के 15 खाली खोल बरामद किए थे। मृतक के भाई बलबीर सिंह के बयान पर हत्या, आपराधिक साजिश और आम्र्स एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
इस प्रकरण में पहले नामजद अन्य आरोपियों रोहित सेठी समेत कई लोगों को 22 दिसंबर 2022 को अदालत ने बरी कर दिया था। गुरदेव सिंह, अमित डागर और कौशल को बाद में धारा 173(8) सीआरपीसी के तहत पूरक चालान में साजिशकर्ता बताते हुए गिरफ्तार किया गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 14 गवाह पेश किए, जिनमें जांच अधिकारी भी शामिल थे। हालांकि, मुख्य गवाह व मृतक के भाई बलबीर सिंह ने अदालत में आरोपियों की पहचान नहीं की और पुलिस पर खाली कागजों पर हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया। वह अपने पहले बयान से मुकर गए, जिसके बाद उन्हें शत्रुतापूर्ण घोषित किया गया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों के खिलाफ न तो कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य है और न ही कॉल डिटेल या इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, जिससे साजिश साबित हो सके। उनके पास से कोई हथियार या आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद नहीं हुई। जांच अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि आरोपियों को केवल गुप्त सूचना के आधार पर नामजद किया गया था।
इन परिस्थितियों में अदालत ने कहा कि अभियोजन आरोप सिद्ध करने में असफल रहा है। तीनों आरोपियों को 20-20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया गया है। केस संपत्ति नियमों के अनुसार निस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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मामला 7 नवंबर 2019 का है। स्टेडियम रोड, दर्पण सिटी टर्न, खरड़ में दिनदहाड़े फायरिंग में इंदरजीत सिंह की मौत हो गई थी। पुलिस ने मौके से खून से सनी मिट्टी और 7.65 बोर के 15 खाली खोल बरामद किए थे। मृतक के भाई बलबीर सिंह के बयान पर हत्या, आपराधिक साजिश और आम्र्स एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
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इस प्रकरण में पहले नामजद अन्य आरोपियों रोहित सेठी समेत कई लोगों को 22 दिसंबर 2022 को अदालत ने बरी कर दिया था। गुरदेव सिंह, अमित डागर और कौशल को बाद में धारा 173(8) सीआरपीसी के तहत पूरक चालान में साजिशकर्ता बताते हुए गिरफ्तार किया गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 14 गवाह पेश किए, जिनमें जांच अधिकारी भी शामिल थे। हालांकि, मुख्य गवाह व मृतक के भाई बलबीर सिंह ने अदालत में आरोपियों की पहचान नहीं की और पुलिस पर खाली कागजों पर हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया। वह अपने पहले बयान से मुकर गए, जिसके बाद उन्हें शत्रुतापूर्ण घोषित किया गया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों के खिलाफ न तो कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य है और न ही कॉल डिटेल या इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, जिससे साजिश साबित हो सके। उनके पास से कोई हथियार या आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद नहीं हुई। जांच अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि आरोपियों को केवल गुप्त सूचना के आधार पर नामजद किया गया था।
इन परिस्थितियों में अदालत ने कहा कि अभियोजन आरोप सिद्ध करने में असफल रहा है। तीनों आरोपियों को 20-20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया गया है। केस संपत्ति नियमों के अनुसार निस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं।