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Chandra Grahan 2026: दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में दिखा चंद्र ग्रहण का खूबसूरत नजारा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Tue, 03 Mar 2026 07:19 PM IST
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सार

धार्मिक मान्यताओं के चलते कई लोग ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप और स्नान आदि भी करते रहे। हालांकि वैज्ञानिक इसे एक खगोलीय घटना मानते हैं, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। 

when Chandra Grahan lunar eclipse visible in Delhi Noida Ghaziabad and Gurugram
दिल्ली में ऐसा दिखा चंद्र ग्रहण - फोटो : ANI/PTI
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विस्तार

साल का पहला चंद्र ग्रहण अब खत्म हो गया है। दुनिया के कई हिस्सों में चंद्र ग्रहण दिखाई दिया। भारत में सबसे पहले पूर्वी हिस्सों में चंद्र ग्रहण दिखाई दिया। ग्रहण के 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हुआ। जिसमें सभी मांगलिक कार्य वर्जित रहे। चंद्रग्रहण की शुरूआत मंगलवार दोपहर 3:20 बजे से हुई और शाम को 6:46 बजे समाप्त हो गया। यह साल का पहला चंद्रग्रहण था जिसने सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जगह बनाई।

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लोगों में उत्सुकता बढ़ी
इस बीच दिल्ली-एनसीआर में चंद्र ग्रहण को लेकर लोगों में उत्सुकता दिखाई दी। खगोल प्रेमियों से लेकर आम श्रद्धालुओं तक सभी की नजरें आसमान पर टिकी रहीं। इस बार चंद्र ग्रहण का समय शहरों के अनुसार कुछ मिनटों के अंतर से अलग-अलग रहा, जिससे लोगों में इसे लेकर खास दिलचस्पी रही।

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नोएडा-दिल्ली में कब दिखा ग्रहण
दिल्ली में चंद्र ग्रहण शाम 6 बजकर 22 मिनट पर दिखाई दिया। सूर्यास्त के आस-पास लगे इस ग्रहण को देखने के लिए लोग खुले स्थानों और छतों का रुख करते हुए दिखाई दिए। वहीं, नोएडा में ग्रहण 6 बजकर 20 मिनट पर दिखा। 

गाजियाबाद और गुरुग्राम में चंद्र ग्रहण का समय
गाजियाबाद में चंद्र ग्रहण 6 बजकर 25 मिनट से शुरू हुआ, जो एनसीआर में सबसे बाद का समय माना जा रहा है। दूसरी ओर, गुरुग्राम में यह 6 बजकर 02 मिनट पर शुरू हुआ, यानी यहां सबसे पहले ग्रहण दिखाई दिया।

क्यों होता है ग्रहण के समय में अंतर
खगोलविदों के अनुसार कुछ मिनटों का यह अंतर भौगोलिक स्थिति और देशांतर के फर्क के कारण होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रहण को नंगी आंखों से देखा जा सकता है, लेकिन दूरबीन या टेलीस्कोप से देखने पर इसका दृश्य और स्पष्ट होगा।

बंद रहे मंदिरों के कपाट
धार्मिक मान्यताओं के चलते कई लोग ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप और स्नान आदि भी करते हैं। हालांकि वैज्ञानिक इसे एक खगोलीय घटना मानते हैं, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं ताकि पूजा करने वाले लोग भगवान की प्रतिमा और शुभ चिह्नों को स्पर्श न कर सकें। बताया कि इस समय खाना पकाना या भोजन करना भी वर्जित होता है। इसमें पूजा, हवन यज्ञ और नए काम की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। सूतक काल से पहले अपने घर में मौजूद तरल पदार्थों जल, दूध, घी, तेल, अचार, शहद में कुशा और तुलसी डालना अच्छा होता है।

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