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UP: दुश्मन के घर में घुसकर मारा, किस तरह पाकिस्तान ने टेके घुटने; 1971 के रणबांकुरे ने सुनाई युद्ध की कहानी
Fri, 14 Aug 2026 02:36 PM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 14 Aug 2026 02:36 PM IST
सार
1971 के भारत-पाक युद्ध के वीरों ने वीरांगना सम्मान समारोह में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के अपने अनुभव साझा किए और भारतीय सेना की निर्णायक जीत को याद किया। पूर्व सैन्य अफसरों ने बताया कि भारतीय जवानों ने दुश्मन के इलाकों में जाकर अहम पुल और ठिकानों पर कब्जा किया, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने आत्मसमर्पण किया।
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पाकिस्तान से 1971 का युद्ध लड़ने वाले पूर्व सैन्य अफसर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मंच से एक-एक करके जब अमर सपूतों की वीरगाथा सुनाई जा रही तो पूरा हॉल तालियां से गूंज रहा था। इन्हीं में 1971 में पाकिस्तान से हुए युद्ध के हीरो भी बैठे हुए थे। उम्र जरूर बढ़ गई, लेकिन जोश युवाओं जैसा था। 55 साल पहले हुए युद्ध का जिक्र करते ही उनकी आंखें चमक गईं और सीना चौड़ा करते हुए पूर्व सैन्य अफसर बोले-बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में हमने दुश्मन के घर में घुसकर मारा और जीत हासिल की।
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टक्कर रोड, सदर निवासी कर्नल (सेवानिवृत्त) कंवलजीत सिंह बक्शी ने कहा कि 1971 में पूर्वी पाकिस्तान में पुल और रेलवे ट्रैक उड़ाने के लिए आदेश मिला। इंजीनियर होने के नाते पुल पर माइंस लगाकर इनको उड़ा दिया। चार दिन तक वे दुश्मन की सीमा के अंदर ही ऑपरेशन करते रहे। सीज फायर होते ही दुश्मनों के हजारों सैनिक भारतीय फौज के आगे नतमस्तक रहे। मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) प्रताप दयाल एयरबोर्न असॉल्ट फोर्स में थे।
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उन्होंने बताया कि 1971 में बांग्लादेश के पुंगली ब्रिज पर कब्जा करने का ऑर्डर मिला। सामरिक दृष्टि से ये बेहद महत्वपूर्ण था, यहां से ही पाकिस्तान के जवान पूर्वी पाकिस्तान जाते थे। हमने हमला बोलकर इस कब्जे में ले लिया। इसके बाद पाकिस्तानी सेना सरेंडर करने लगी। हम आगे बढ़ते गए और सबसे पहले ढाका पहुंचने वाले भारतीय सैनिकों का दल था।
कर्नल (सेवानिवृत्त) आरएस सोढ़ी का भी 1971 युद्ध का हाल बयां करते हुए सीना चौड़ा हो गया। उन्होंने बताया कि पंजाब के फाजिल्का सेक्टर में 4 जाट रेजिमेंट में पोस्ट थे। इसी क्षेत्र के गुरमुख खेड़ा गांव में उनको कमान मिली। वहां से दिन-रात 17,700 के फायर किए, इससे दुश्मनों के हौसले पस्त हो गए। पाकिस्तान के टैंकों को भी भारी नुकसान पहुंच गया। इसके लिए गैलेंट्री अवॉर्ड भी मिला। आखिरकार हमारी जीत हुई। सभी ने एकसुर में अमर उजाला के वीरांगना सम्मान समारोह की सराहना करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम का पूरे साल इंतजार रहता है।