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UP: जिन्हें अपने बोझ समझ बैठे, उन्हें वृद्धाश्रम ने लगाया गले; एक सप्ताह में 13 बुजुर्गों को मिली शरण
संवाद न्यूज एजेंसी,आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 14 May 2026 11:21 AM IST
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सार
आगरा के रामलाल वृद्धाश्रम ने एक सप्ताह में 13 बेसहारा बुजुर्गों को नया सहारा दिया है। अपनों से ठुकराए इन वृद्धों को आश्रम में सम्मान, अपनापन और जीने की नई उम्मीद मिल रही है।
रामलाल वृद्धाश्रम पहुंचे बुजुर्ग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
किसी की आंखों में अपनों के बिछड़ने का गम है तो किसी के चेहरे पर वर्षों के अपमान की झुर्रियां। कोई बीमारी से टूट चुका है तो कोई अकेलेपन से। ऐसे लोगों के लिए रामलाल वृद्धाश्रम एक उम्मीद बनकर उभरा है। पिछले एक सप्ताह में आश्रम ने 13 बुजुर्गों को सहारा दिया है। यह आगरा ही नहीं बल्कि मेरठ, इटावा, राजस्थान और फरीदाबाद से आए हैं।
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रामबाग आगरा से ज्योति, दयालबाग के सुखवीर सिंह व शशि तायल, वाटरवर्क्स की विरमा देवी, मोती कटरा के पवन गुप्ता, एत्मादपुर के मोहर सिंह, शाहगंज के राजू, किरावली के भगवान सिंह और बर्फी देवी, अलवर, राजस्थान की दीया कुमारी, इटावा के आनंद कुमार, फरीदाबाद के विनोद वर्मा और मेरठ के सतीश चंद गौतम ने आश्रम में शरण ली है।
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आश्रम के अध्यक्ष शिव प्रसाद शर्मा, संयोजक सुनील कुमार जैन, संदेश जैन, विनय शर्मा, धीरज चौधरी ने सभी का स्वागत किया। मुख्य संरक्षक राजकुमार जैन ने बताया कि इन बुजुर्गों को रोटी से ज्यादा आत्मीयता और सम्मान की जरूरत है। आश्रम में रह रहे बुजुर्गों ने बताया कि यहां आने के बाद पहली बार महसूस हुआ कि इंसानियत अभी जिंदा है। आश्रम के अध्यक्ष ने लोगों से कहा है कि वृद्धजन के प्रति संवेदनशील बनें। आज जिन्हें हम बोझ समझ रहे है, कल हमें भी उसी मोड़ पर खड़ा होना है।