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एसिड अटैक सर्वाइवर्स: हर मोर्चे पर दुश्वारियां...समय पर मुआवजा तक नहीं; रुला देगा इन पीड़िताओं का दर्द

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Thu, 11 Jun 2026 10:03 AM IST
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सार

एसिड अटैक पीड़िताएं हमले के बाद भी इलाज, रोजगार, आवास और आर्थिक सहायता के लिए लंबा संघर्ष कर रही हैं। उनका कहना है कि समय पर मुआवजा, आसान ऋण और सरकारी योजनाओं का लाभ मिले तो जीवन बेहतर हो सकता है।

Acid Attack Survivors Still Struggle for Compensation Housing and Livelihood Opportunities
एसिड अटैक पीड़िताएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

एसिड अटैक की शिकार महिलाओं के लिए जिंदगी हर दिन एक नई चुनौती लेकर आती है। हमले के दर्द से उबरने के बाद भी उन्हें इलाज, रोजगार, सामाजिक स्वीकार्यता और आर्थिक मदद के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता है। सरकार की ओर से मुआवजे के अलावा कई कल्याणकारी योजनाओं का प्रावधान है, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका लाभ ले पाना बेहद मुश्किल होता है। आगरा की पीड़िताओं का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से मिले तो उनका जीवन काफी हद तक बदल सकता है।

सरकार की ओर से एसिड अटैक पीड़िताओं को मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान कार्ड समेत अन्य योजनाओं से जोड़ने की पहल की जा रही है। आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा देकर उनके जीवन को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने की कवायद की जा रही है। इसके बावजूद कई पीड़िताएं आज भी आत्मनिर्भर बनने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

 
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स्वरोजगार या छोटे व्यवसाय के लिए बैंक से ऋण लेना भी उनके लिए आसान नहीं है। छांव फाउंडेशन के डायरेक्टर आशीष शुक्ला बताते हैं कि उनकी संस्था से लगभग 100 एसिड अटैक सर्वाइवर जुड़ी हुईं हैं। उनको रोजगार दिलाने के लिए आगरा, नोएडा, लखनऊ, दिल्ली और पुणे शीरोज कैफे, शीरोज वर्कशॉप खोले हैं, जिससे वह आत्मनिर्भर बनें और उन्हें आर्थिक सहायता मिल सकें। आगरा शीरोज हैंगआउट में 12 एसिड अटैक पीड़ित काम कर रही हैं। फिलहाल पुनर्वास की प्रक्रिया को और सरल बनाने की जरूरत है, ताकि पीड़िताएं सम्मानजनक जीवन जी सकें।
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आर्थिक समस्याएं आती हैं सामने
एसिड अटैक सर्वाइवर मधु ने बताया कि यदि आवास की सुविधा मिल जाए तो काफी राहत मिल सकती है, क्योंकि किराये के मकान में रहने के कारण कई बार बैंक ऋण भी आसानी से नहीं मिल पाता।

मुआवजे के लिए लंबा इंतजार
ताजगंज निवासी सुधा का कहना है कि मुआवजा और सरकारी सहायता प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ जरूरतमंदों तक समय पर पहुंचना चाहिए, ताकि पीड़िताओं को राहत मिल सके।

बैंक से नहीं मिलता जल्दी ऋण
ममता ने बताया कि वह आत्मनिर्भर बनने के लिए अपना काम शुरू करना चाहती हैं, लेकिन बैंक से ऋण प्राप्त करना आसान नहीं है। उनका कहना है कि यदि आसान शर्तों पर लोन उपलब्ध कराया जाए तो एसिड अटैक सर्वाइवर अपना रोजगार शुरू कर सम्मानजनक जीवन जी सकती हैं।

सहानुभूति नहीं, अवसर की जरूरत
बोदला निवासी डॉली का कहना है कि एसिड अटैक पीड़िताओं को केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि अवसरों की जरूरत है। आवास, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार से जुड़ी योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से मिले तो वे आत्मनिर्भर बनकर बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकती हैं।
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