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गजब कर डाला: नौकर को मालिक बनाकर 7.70 लाख रुपये में बेचा प्लॉट, फर्जी बैनामे के खेल तहसीलकर्मी समेत 10 पर FIR
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 19 Mar 2026 09:54 AM IST
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सार
आगरा की सदर तहसील में फर्जी दस्तावेज और नौकर को असली मालिक बनाकर प्लॉट बेचने का मामला सामने आया है। न्यायालय के आदेश पर 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
आगरा सदर तहसील
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के तहसील सदर में फर्जी बैनामे का एक और मामला सामने आया है। न्यायालय के आदेश पर थाना सदर में तहसील के कर्मचारी सहित 10 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि एक फर्म संचालक ने अपने नौकर को जमीन मालिक बनाकर फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान से एक प्लॉट 7.70 लाख रुपये में बेच दिया। यह धोखाधड़ी 2014 में हुई थी, जिसका खुलासा अब हुआ है।
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सुरक्षा विहार कॉलोनी, ग्वालियर रोड निवासी मोहनीश कुमार ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया। उन्होंने बताया कि उनके पिता त्रिलोक चंद्र डीएमएसआरडीई (डीआरडीओ) कानपुर से सेवानिवृत्त हुए हैं। पिता की उम्र 70 साल है। उन्होंने 27 दिसंबर, 2006 में मलपुरा स्थित गणपति धाम में 200 वर्गगज का एक आवासीय प्लॉट उनके नाम पर खरीदा था। इस प्लॉट के मूल विक्रेता प्रिंस शेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड थे। इसका बैनामा उपनिबंधक तृतीय सदर, आगरा में पंजीकृत है।
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आरोप है कि विक्रेता रनवीर सिंह और उसके पुत्र कार्तिक चौधरी ने धोखा दिया। कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उनका (मोहनीश कुमार) फोटो लगाया और फर्जी हस्ताक्षर कर लिए। इसके बाद अपने यहां काम करने वाले नौकर को तहसील सदर में मोहनीश कुमार बनाकर खड़ा किया।
आरोपियों ने नौकर की ऑनलाइन फोटो खिंचवाकर फर्जी तरीके से 28 जनवरी, 2014 को उपनिबंधक तृतीय सदर के कार्यालय में बैनामा करा दिया। यह प्लॉट भिवानी, हरियाणा के राजफल स्योराण के नाम पर 7.70 लाख रुपये में बेचा गया। मोहनीश का कहना है कि जिस समय यह फर्जी बैनामा किया गया, वह नोएडा में थे। बैनामे में फोटो उनका है, जबकि अंगूठा निशानी, हस्ताक्षर और ऑनलाइन फोटो उनके नहीं हैं।
आरोपियों ने नौकर की ऑनलाइन फोटो खिंचवाकर फर्जी तरीके से 28 जनवरी, 2014 को उपनिबंधक तृतीय सदर के कार्यालय में बैनामा करा दिया। यह प्लॉट भिवानी, हरियाणा के राजफल स्योराण के नाम पर 7.70 लाख रुपये में बेचा गया। मोहनीश का कहना है कि जिस समय यह फर्जी बैनामा किया गया, वह नोएडा में थे। बैनामे में फोटो उनका है, जबकि अंगूठा निशानी, हस्ताक्षर और ऑनलाइन फोटो उनके नहीं हैं।
निर्माण कराने पहुंचे तो दी गई धमकी
मोहनीश ने बताया कि धोखाधड़ी का पता 3 नवंबर, 2025 को चला, जब वह प्लॉट पर निर्माण कराने पहुंचे। उन्होंने देखा कि आरोपियों ने प्लॉट पर कब्जे का बोर्ड लगा रखा था। विरोध पर आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी। मामले में भिवानी निवासी देवेंद्र, मयूर विहार निवासी यशपाल, दस्तावेज लेखक सदर तहसील नीतीश कुमार झा, राजफल स्योराण, डिफेंस एस्टेट निवासी रनवीर सिंह, कार्तिक चौधरी, एक परिचित नौकर और दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
मोहनीश ने बताया कि धोखाधड़ी का पता 3 नवंबर, 2025 को चला, जब वह प्लॉट पर निर्माण कराने पहुंचे। उन्होंने देखा कि आरोपियों ने प्लॉट पर कब्जे का बोर्ड लगा रखा था। विरोध पर आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी। मामले में भिवानी निवासी देवेंद्र, मयूर विहार निवासी यशपाल, दस्तावेज लेखक सदर तहसील नीतीश कुमार झा, राजफल स्योराण, डिफेंस एस्टेट निवासी रनवीर सिंह, कार्तिक चौधरी, एक परिचित नौकर और दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
तहसील में फर्जीवाड़े का पुराना इतिहास
तहसील सदर में फर्जी बैनामे का यह कोई पहला मामला नहीं है। पहले भी फर्जीवाड़ा कर बैनामे की कई घटनाएं सामने आई थीं। एक दर्जन से अधिक प्राथमिकी दर्ज हुई थीं और एसआईटी ने जांच की थी। जांच में तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई थी, तहसीलकर्मी जेल भी गए थे।
तहसील सदर में फर्जी बैनामे का यह कोई पहला मामला नहीं है। पहले भी फर्जीवाड़ा कर बैनामे की कई घटनाएं सामने आई थीं। एक दर्जन से अधिक प्राथमिकी दर्ज हुई थीं और एसआईटी ने जांच की थी। जांच में तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई थी, तहसीलकर्मी जेल भी गए थे।