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राज चौहान हत्याकांड: यूपी पुलिस का ऐसा खौफ, हिस्ट्रीशीटर खुद पहुंचा जेल; अब आऱोपी से होगी पूछताछ

अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Thu, 19 Mar 2026 09:43 AM IST
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सार

राज चौहान हत्याकांड में नाम आने के डर से हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव ने पुराने मामले में खुद जमानत कटवाकर जेल जाना बेहतर समझा। पुलिस और एसटीएफ अब उससे जेल में पूछताछ कर साजिश की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
 

History-Sheeter Lands in Jail to Avoid Encounter in Agra Murder Case
राज चौहान हत्याकांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

राज चौहान हत्याकांड में अपनी गर्दन फंसती देख हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव पुलिस को चकमा देकर जेल पहुंच गया। उसने पुराने मामले में न्यायालय में पेश होकर अपनी जमानत कटवाई है। राज की मां ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी, जिसके बाद पुलिस आयुक्त ने सात दिन में जांच के आदेश दिए थे। पुलिस अब उससे जेल में पूछताछ करेगी।
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बीती 23 दिसंबर की रात ट्रांसयमुना के टेढ़ी बगिया क्षेत्र के एक गेस्ट हाउस में आपसी गैंगवार में राज चौहान की गोली मारकर हत्या की गई थी। पांच युवकों ने करीब 18 गोलियां चलाई थीं। हालांकि राज के शरीर में सात गोलियां लगने की पुष्टि हुई थी। पुलिस अब तक नौ आरोपियों को जेल भेज चुकी है। मुख्य आरोपी अरबाज मंसूरी हथियार बरामद कराने के दौरान दरोगा की पिस्टल लेकर भागते समय मुठभेड़ में मारा गया था।
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घटना के बाद से ही राज चौहान की मां क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा रही थीं। उन्होंने एक इंस्पेक्टर पर संरक्षण देने का भी आरोप लगाया। पुलिस आयुक्त दीपक कुमार के आदेश के बाद पुलिस मोनू की संलिप्तता की जांच कर रही थी। हत्या करने वालों का संबंध गैंगस्टर आलोक यादव से होने का भी पुलिस को पता चला था, जो पहले से ही जेल में बंद है।

मुख्यमंत्री से की थी राज की मां ने शिकायत
कार्रवाई नहीं होने पर राज की मां ने सत्ताधारी नेताओं के साथ लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की थी। मामला पुलिस महानिदेशक समेत अन्य पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा। राज की मां ने मोनू यादव से जान का खतरा होने की बात कही थी, एसटीएफ ने उन्हें सुरक्षा का वादा किया था। पांच दिनों से एसटीएफ आगरा यूनिट भी उसके बारे में जानकारी जुटाने लगी थी।

पुराने रंगदारी के मामले में पहुंचा
मोनू यादव को डर था कि भागते-भागते कहीं वह पुलिस मुठभेड़ का शिकार न हो जाए। वह गुपचुप तरीके से अपने वकील के साथ न्यायालय पहुंचा। उसने पुराने रंगदारी और एससी-एसटी एक्ट के मामले में खुद को प्रस्तुत किया। न्यायालय में जमानत कटवाने का प्रार्थनापत्र दिलवाया, जिसके बाद न्यायालय ने उसे जेल भेज दिया। मोनू की इस चालाकी ने पुलिस का शक उसके ऊपर गहरा दिया है। वह अब उसे हत्याकांड के मामले में पूछताछ के लिए रिमांड पर भी ले सकती है।

 
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