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Gold Price 2026: सोना 15 हजार रुपये हुआ सस्ता, चांदी में भी भारी गिरावट; फिर भी नए आभूषण नहीं खरीद रहे लोग

Mon, 13 Jul 2026 09:23 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 13 Jul 2026 09:23 AM IST
सार

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट तथा आयात शुल्क बढ़ने के बाद सराफा बाजार में पुराने आभूषणों को गलाकर नए डिजाइन बनवाने का चलन तेजी से बढ़ा है। नई ज्वेलरी खरीदने के बजाय ग्राहक केवल मेकिंग चार्ज देकर पुराने गहनों को मॉडर्न लुक दे रहे हैं।

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Gold Price Falling  Silver Prices Boost Exchange and Jewellery Remodeling Trend
सोना व आभूषण निर्यात - फोटो : ANI

विस्तार

 सोने और चांदी की कीमतों में पिछले तीन महीनों में आई मंदी और आयात शुल्क में बढ़ोतरी ने सराफा बाजार का मिजाज पूरी तरह से बदल दिया है। विदेशी आयात में 50 प्रतिशत तक की भारी कमी दर्ज की गई है। वहीं, कीमतों में अनिश्चितता के कारण ग्राहक नया सोना-चांदी खरीदने के बजाय घरों में रखे पुराने आभूषणों को गलाकर नए बनवाने (पलटे के कारोबार) पर जोर दे रहे हैं। बाजार में मंदी के बावजूद पलटे के इस नए ट्रेंड पर ही अब सराफा कारोबारी और स्थानीय कारीगर निर्भर हैं।
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सराफा बाजार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन महीनों में सोने की कीमतों में लगभग 15,000 रुपये प्रति 10 ग्राम (प्रति तोला) की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रविवार को सोना 1.40 लाख रुपये प्रति तोला था, जबकि यह 1.65 लाख रुपये तक पहुंच चुका था। औद्योगिक और आभूषण मांग घटने के साथ चांदी के भाव भी 70 से 80 रुपये प्रति किलो तक गिरे हैं। रविवार को चांदी 2.30 लाख प्रति किलो थी। तीन महीने पहले यह तीन लाख रुपये तक पहुंच गई थी। लगातार गिरते दामों के कारण निवेशक और आम खरीदार इंतजार करो और देखो की स्थिति में आ गए हैं।



 
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यह है पलटे का कारोबार और ऐसे बढ़ रहा है चलन
सराफा बाजार की भाषा में पलटा का अर्थ है, पुराने जेवर देकर उनके बदले नए जेवर लेना या पुराने जेवरों को गलाकर नए डिजाइन तैयार करवाना। वर्तमान बाजार में यह ट्रेंड रफ्तार पकड़ चुका है। इसके पीछे कई कारण हैं। नई धातु खरीदने के बजाय, ग्राहक अब केवल मेकिंग चार्ज (बनवाई) और जीएसटी देकर लेटेस्ट डिजाइन के आभूषण पहनना पसंद कर रहे हैं।

 
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महंगाई और कीमतों की अनिश्चितता के बीच, पुराने आभूषणों को रिसाइकिल करना मध्यम वर्ग के लिए सबसे सुरक्षित आर्थिक विकल्प बन गया है। आगामी वैवाहिक सीजन के लिए लोग नई खरीदारी का जोखिम उठाने के बजाय, पुश्तैनी और आउटडेटेड डिजाइनों को ट्रेंडी लुक दे रहे हैं। इसके अलावा, आयात शुल्क में वृद्धि और प्रधानमंत्री की अर्थव्यवस्था को लेकर की गई अपीलों का भी घरेलू बाजार में पलटे का कारोबार बढ़ने पर सीधा असर देखा जा रहा है।

 

ये बोले सराफा कारोबारी- नई धातु की मांग घटी
व्यावसायिक स्वर्णकार समिति के संरक्षक राजू मेहरा का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से सोने की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है। ग्राहक डरा हुआ है कि कहीं भाव और न गिर जाएं। इसलिए नई धातु की खरीद न के बराबर है, लेकिन पलटे के काम ने बाजार को थामे रखा है और व्यापार चल रहा है। 

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कारीगरों का बढ़ा रोजगार
आभूषण निर्माता तरुण अग्रवाल ने बताया कि आयात शुल्क बढ़ने और आयात में 50 फीसदी की कमी आने से भले ही व्यापार को नुकसान हो रहा हो, लेकिन पुराने जेवर गलाकर नए बनाने के काम से हमारे स्थानीय कारीगरों के हाथ में लगातार काम बना हुआ है।

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शादियों के सीजन का असर
ज्वेलरी शोरूम संचालक आनंद प्रकाश का कहना है कि आने वाले समय में शादियों का सीजन है। लोग समझदारी दिखा रहे हैं। वे अपनी पुरानी भारी-भरकम और आउटडेटेड ज्वेलरी को देकर आजकल के चलन वाले लाइटवेट और मॉडर्न डिजाइन बनवा रहे हैं। इसमें उनका पैसा भी बच रहा है।

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बजट को संतुलित कर रहे हैं ग्राहक
आभूषण निर्माता धन कुमार जैन ने बताया कि महंगाई के इस दौर में मध्यम वर्गीय परिवार नया सोना और चांदी खरीदने का बजट नहीं जुटा पा रहा है। ऐसे में पलटा उनके लिए सबसे बेहतर विकल्प है। वे सिर्फ बनवाई का खर्च देकर नई ज्वेलरी पहनने का शौक पूरा कर रहे हैं।

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