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दिल तेज धड़के तो हो जाएं सावधान: इसलिए बढ़ गए हार्ट अटैक के मामले, कम उम्र में हो रही मौत; जानें बड़े कारण

Tue, 29 Sep 2026 12:47 PM IST
Dhirendra Singh धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Tue, 29 Sep 2026 12:47 PM IST
सार

एसएन मेडिकल कॉलेज की कैथ लैब में बीते 18 महीनों में हुई 2402 हृदय प्रक्रियाओं में 21 फीसदी मरीज 35 साल से कम उम्र के रहे। तनाव, खराब खान-पान, मोटापा, धूम्रपान और शराब जैसे कारणों के साथ लक्षणों को नजरअंदाज करना युवाओं में दिल की बीमारी का जोखिम बढ़ा रहा है।
 

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Heart Attack Cases Rising Among Young People Know the Major Causes Behind Early Heart Disease
दिल तेज धड़कने लगे तो हो जाएं सावधान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल का जोर-जोर से धड़कना फिल्मों में प्यार की पहली निशानी दिखाया जाता है। असल जिंदगी में ये बीमारी की दस्तक है। इसे नजरअंदाज करना मतलब हार्टअटैक का इंतजार करना है। एसएन मेडिकल कॉलेज में हृदय की सर्जरी कराने वालों में ऐसे 21 फीसदी युवा हैं, जो कई बार संकेतों के बाद भी इलाज से बचते रहे।
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एसएन के हृदय रोग विभाग की कैथ लैब में बीते 18 महीने में 2402 मरीजों की हृदय सर्जरी (1429 एंजियोग्राफी, 785 एंजियोप्लास्टी और 188 पेसमेकर) हुईं। इनमें से 21 फीसदी मरीजों की उम्र 35 साल से कम रही। 36 से 50 साल के 30 फीसदी, 51 से 70 साल के 32 और बाकी के मरीज 70 साल के रहे।

 
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युवा मरीजों से पूछताछ में कॅरियर-अच्छी जॉब का तनाव, देर रात तक जागना, फास्टफूड, धूम्रपान, अल्कोहल और मोटापा की वजह से बीमारी पाई गई। इनको कई बार सीने में दर्द, धड़कन का अनियंत्रित होना, सांस फूलना, घबराहट हुई लेकिन इसे सामान्य समझना इन लोगों की भूल रही और हार्टअटैक के शिकार हो गए।

 
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28 साल की उम्र के मरीज की हुई हार्ट सर्जरी
 विभागाध्यक्ष हृदय रोग डॉ. बसंत गुप्ता ने बताया कि कैथ लैब में हृदय की सर्जरी कराने वालों में हर पांचवें मरीज की उम्र 35 वर्ष से कम है। सबसे कम उम्र का मरीज 28 साल का था। इनमें बढ़ा हुआ वजन, कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह और तनाव की परेशानी मिली। लक्षण दिखने पर भी इन्होंने जांच नहीं कराई थी।


 

धड़कन अनियंत्रित हो तो कराएं ईसीजी
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ . सौरभ नागर का कहना है कि धड़कन बढ़ना-कम होना, बेचैनी और सीने में दर्द हो रहा है तो इसे नजरअंदाज न करें। डॉक्टर को दिखाकर ईसीजी जरूर कराएं। इससे काफी हद तक बीमारी पकड़ में आ जाती है। 30 की उम्र के बाद ईसीजी और 40 की उम्र के बाद ईको करानी चाहिए।


 

स्वस्थ लोग की ये है मानक
धड़कन: 60-100 बार
पुरुष: 70-75 महिला: 80-85
रक्तचाप: 120/80 एमएमएचजी
हाईबीपी: 140/90 एमएमएचजी से अधिक होना।
नमक: दो से तीन ग्राम
चीनी: दो से पांच ग्राम

 

ये लक्षण दिखे तो कराएं ईसीजी
सीने में भारीपन, तेज दर्द होना। दर्द बाएं हाथ, जबड़े या गर्दन तक पहुंचना।

थोड़ी दूरी चलने या एक-दो सीढ़ियां चढ़ने पर सांस अचानक सांस फूलना।
थोड़ा काम करने पर थकान होना, कमजोरी महसूस करना। घबराहट होना।

चक्कर आना, पसीना आना, बेहोश हो जाना, पेट-पैरों में असामान्य सूजन।

 

इन बातों का रखें ध्यान
रोजाना 5 से 10 हजार कदम पैदल चलना।

छोटी दूरी के लिए साइकिल का उपयोग करना।
तले हुए भोजन, फास्टफूड से पेट नहीं भरना।

धूम्रपान शराब से बचें, 6-8 घंटे स्वस्थ नींद।
मोबाइल टीवी, लैपटॉप का देर रात तक उपयोग न करें।

हरी सब्जी, दाल, फल, मोटा अनाज, ड्राईफ्रूट्स खाएं

 

एसएन की कैथ लैब में हृदय की सर्जरी के आंकड़े
2402: हृदय ऑपरेशन

1429: एंजियोग्राफी
785: एंजियोप्लास्टी

188: पेसमेकर

 

इस उम्र के हैं मरीज
35 से कम: 21 फीसदी

36-50: 30 फीसदी
51-70: 32 फीसदी

70 से अधिक: 17 फीसदी
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