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UP: कैला मैया के दरबार में उमड़ा जनसैलाब, नेजा चढ़ाने पहुंचे लाखों श्रद्धालु; आस्था से गूंजा इटौरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 25 Mar 2026 10:45 PM IST
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सार
आगरा के कैला देवी ब्रज धाम मंदिर में चैत्र नवरात्र पर नेजा चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ रहा है। तीन दिवसीय मेले में लाखों भक्तों के पहुंचने की उम्मीद है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति और उत्साह से सराबोर है।
कैला मैया के दरबार में उमड़ा जनसैलाब
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित गांव इटौरा का कैला देवी ब्रज धाम मंदिर इन दिनों श्रद्धा और भक्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है,यहां हर वर्ष चैत्र मास की सप्तमी,अष्टमी और नवमी पर तीन दिवसीय भव्य मेले का आयोजन होता है,मेले के दूसरे दिन भक्तों की भारी भीड़ दिखाई दी,जिसमें तीन दिनों में कई लाख श्रद्धालु माता रानी के दर्शन के लिए पहुंचने की उम्मीद है।
मंदिर का इतिहास करीब ढाई सौ वर्ष पुराना बताया जाता है। मान्यता है कि मुरसान की महारानी कुंदन देवी ने इस मंदिर की स्थापना कराई थी,तब से यह स्थान क्षेत्र की आस्था का प्रमुख धाम बन गया है,मंदिर के गर्भगृह में मां काली,मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की प्रतिमाएं एक साथ विराजमान हैं,जो शक्ति,धन और विद्या का प्रतीक मानी जाती हैं।
मंदिर परिसर में स्थापित 38 फीट ऊंची हनुमान जी की विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं को दूर से ही आकर्षित करती है। इसके अलावा भगवान शिव-पार्वती,राधा-कृष्ण,राम सीता और शनिदेव की प्रतिमाएं भी यहां स्थापित हैं। नंदी महाराज और शेर की पीतल की मूर्तियां मंदिर की भव्यता में चार चांद लगाती हैं। इस धाम की सबसे खास परंपरा है(नेजा चढ़ाना) श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां नेजा अर्पित करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।यही कारण है कि मेले के दौरान बड़ी संख्या में भक्त नेजा लेकर माता के दरबार में पहुंचते हैं।स्थानीय मान्यता के अनुसार राजस्थान के करौली जिले में स्थित कैला देवी मंदिर जाने वाले अधिकांश श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन करते हैं।
ऐसा न करने पर उनकी यात्रा अधूरी मानी जाती है,यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है,इसी को देखते हुए लाखों श्रद्धालु माता रानी के दरबार पहुंचते हैं।मंदिर ट्रस्ट के संरक्षक प्रभु दयाल शर्मा ने बताया कि मुताबिक,मेले के पहले और दूसरे दिन भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए हैं, मंदिर के विषय में मान्यता है कि पैदल राजस्थान केला देवी मंदिर जाने वाले श्रद्धालु भी माता रानी के दर्शन करने के लिए आते हैं तभी उनकी यात्रा पूरी मानी जाती है।अनुमान है कि तीन दिनों में इटौरा का यह धाम अब सिर्फ धार्मिक स्थल ही नहीं,बल्कि एक प्रमुख स्थानीय पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित हो रहा है,आसपास के जिलों के लोग परिवार सहित यहां पहुंचते हैं और मेले का आनंद लेते हैं,पर्यटन मंत्रालय की तरफ से मंदिर में करीब 1 करोड रुपए की लागत से विकास कार्य कराए जा रहे हैं।
कैसे पहुंचे कैला मैया का दरबार
आगरा के भगवान टॉकीज से इलेक्ट्रिक बस द्वारा रोहता चौराहा पहुंचा जा सकता है। वहां से ऑटो या पैदल मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।इसके अलावा बिजलीघर चौराहे से सेवला होते हुए इटौरा के लिए ऑटो सेवाएं उपलब्ध हैं।रोहता नहर चौराहे से मंदिर की दूरी लगभग एक किलोमीटर है।
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मंदिर का इतिहास करीब ढाई सौ वर्ष पुराना बताया जाता है। मान्यता है कि मुरसान की महारानी कुंदन देवी ने इस मंदिर की स्थापना कराई थी,तब से यह स्थान क्षेत्र की आस्था का प्रमुख धाम बन गया है,मंदिर के गर्भगृह में मां काली,मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की प्रतिमाएं एक साथ विराजमान हैं,जो शक्ति,धन और विद्या का प्रतीक मानी जाती हैं।
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मंदिर परिसर में स्थापित 38 फीट ऊंची हनुमान जी की विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं को दूर से ही आकर्षित करती है। इसके अलावा भगवान शिव-पार्वती,राधा-कृष्ण,राम सीता और शनिदेव की प्रतिमाएं भी यहां स्थापित हैं। नंदी महाराज और शेर की पीतल की मूर्तियां मंदिर की भव्यता में चार चांद लगाती हैं। इस धाम की सबसे खास परंपरा है(नेजा चढ़ाना) श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां नेजा अर्पित करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।यही कारण है कि मेले के दौरान बड़ी संख्या में भक्त नेजा लेकर माता के दरबार में पहुंचते हैं।स्थानीय मान्यता के अनुसार राजस्थान के करौली जिले में स्थित कैला देवी मंदिर जाने वाले अधिकांश श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन करते हैं।
ऐसा न करने पर उनकी यात्रा अधूरी मानी जाती है,यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है,इसी को देखते हुए लाखों श्रद्धालु माता रानी के दरबार पहुंचते हैं।मंदिर ट्रस्ट के संरक्षक प्रभु दयाल शर्मा ने बताया कि मुताबिक,मेले के पहले और दूसरे दिन भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए हैं, मंदिर के विषय में मान्यता है कि पैदल राजस्थान केला देवी मंदिर जाने वाले श्रद्धालु भी माता रानी के दर्शन करने के लिए आते हैं तभी उनकी यात्रा पूरी मानी जाती है।अनुमान है कि तीन दिनों में इटौरा का यह धाम अब सिर्फ धार्मिक स्थल ही नहीं,बल्कि एक प्रमुख स्थानीय पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित हो रहा है,आसपास के जिलों के लोग परिवार सहित यहां पहुंचते हैं और मेले का आनंद लेते हैं,पर्यटन मंत्रालय की तरफ से मंदिर में करीब 1 करोड रुपए की लागत से विकास कार्य कराए जा रहे हैं।
कैसे पहुंचे कैला मैया का दरबार
आगरा के भगवान टॉकीज से इलेक्ट्रिक बस द्वारा रोहता चौराहा पहुंचा जा सकता है। वहां से ऑटो या पैदल मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।इसके अलावा बिजलीघर चौराहे से सेवला होते हुए इटौरा के लिए ऑटो सेवाएं उपलब्ध हैं।रोहता नहर चौराहे से मंदिर की दूरी लगभग एक किलोमीटर है।
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