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UP: ताजमहल समेत 154 धरोहर खतरे में! 15 साल की लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से जवाब तलब

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Wed, 01 Apr 2026 11:20 AM IST
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सार

आगरा सर्किल के 154 संरक्षित स्मारकों पर संकट गहराया है, जिनमें ताजमहल और आगरा किला भी शामिल हैं। हाईकोर्ट ने 15 साल से नियम न बनने पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
 

Taj Mahal Among 154 Monuments at Risk High Court Seeks Answers Over 15-Year Neglect
ताजमहल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

 ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसे यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों सहित आगरा सर्किल के 154 स्मारकों पर संकट मंडरा रहा है। बीते 15 साल में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने संरक्षण के लिए नियम नहीं बनाए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस मामले में केंद्र और प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर आठ सप्ताह में स्पष्टीकरण दाखिल करने का आदेश दिया है।
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गाजियाबाद निवासी विरासत संरक्षण कार्यकर्ता आकाश वशिष्ठ की जनहित याचिका पर 23 मार्च को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश दिए। याचिका में आगरा, मथुरा, लखनऊ और झांसी जैसे ऐतिहासिक शहरों में विरासतों के खंडहर बनने और उन पर भूमाफिया के बढ़ते अतिक्रमण पर अंकुश लगाने की मांग की गई है। अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि आखिर क्यों प्रदेश की अनमोल धरोहरें प्रशासनिक विफलता के कारण जमींदोज हो रही हैं।
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लापरवाही पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2010 में संशोधित प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम (एएमएएसआर एक्ट) लागू किया था। इसके तहत स्मारकों के संरक्षण के लिए विशेष नियम (बाय-लॉज) बनाने थे, लेकिन 15 साल बीत जाने के बाद भी आगरा सर्किल के 154 संरक्षित स्मारकों में से एक के लिए भी नियम तैयार नहीं किए गए। यहां तक कि ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसे वैश्विक महत्व के स्मारकों के लिए भी अनिवार्य साइट-प्लान और सुरक्षा मानक सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।


लावारिस पड़े 4,995 प्राचीन ढांचे
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि उत्तर प्रदेश में कुल 5,416 ऐतिहासिक इमारतें चिह्नित हैं, जिनमें से केवल 421 ही सरकारी तौर पर संरक्षित हैं। शेष 4,995 प्राचीन ढांचे पूरी तरह लावारिस छोड़ दिए गए हैं। इनमें कई ऐतिहासिक हवेलियां, सराय और प्राचीन घाट शामिल हैं, जिन्हें ढहाकर या तो कॉम्प्लेक्स बना दिए गए हैं या उन पर अवैध कब्जे हो चुके हैं। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि सितंबर 2023 से अप्रैल 2025 के बीच आगरा के प्रतिबंधित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हुए, लेकिन एएसआई ने एक भी नया मामला दर्ज नहीं किया।

याचिका की पांच प्रमुख मांगें
- हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र निगरानी समिति गठित की जाए।
- 100 साल से पुरानी सभी इमारतों और घाटों को तुरंत संरक्षित श्रेणी में शामिल कर वहां सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएं।
- यमुना के 48 घाटों को बचाते हुए पूरे वृंदावन को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो।
- स्मारकों की सुरक्षा और रखरखाव में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
- एक स्वायत्त हेरिटेज प्रोटेक्शन एंड डेवलपमेंट बोर्ड बनाया जाए, जिसे अतिक्रमण हटाने के सीधे न्यायिक अधिकार हों।
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