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UP: ये हैं कुछ ऐसी आदतें, जो समय से पहले दे रहीं बुढ़ापा, खबर पढ़ते ही आप भी सोचने के लिए हो जाएंगे मजबूर
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 03 Apr 2026 11:20 AM IST
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सार
एसएन मेडिकल के अध्ययन में सामने आया कि देर रात तक जागने और स्क्रीन उपयोग से युवाओं में अनिद्रा और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। हार्मोन प्रभावित होने से कई लोग उम्र से 8-10 साल अधिक दिखने लगे हैं।
समय से पहले बुढ़ापा
- फोटो : एआई
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विस्तार
दिनभर काम और रात को आराम...स्वस्थ जीवनशैली के लिए आवश्यक इस दिनचर्या को अधिकांश लोग नहीं अपना रहे हैं। मोबाइल-लैपटॉप और पार्टियों के कारण देर रात तक जाग रहे हैं। इससे जैविक चक्र प्रभावित होने से हार्मोंस गड़बड़ा रहे हैं। लंबे समय तक ऐसी स्थिति से युवा उम्र से 10 साल बड़े दिख रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के अध्ययन में ऐसे 22 फीसदी युवाओं में ये परेशानी देखने को मिली है।
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मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. विशाल सिन्हा ने बताया कि ओपीडी में आने वाले 680 मरीजों पर अध्ययन किया गया। इनमें 12-25 साल के 18 फीसदी, 26-50 साल के 32 फीसदी और 51 साल से अधिक उम्र के 50 फीसदी लोगो में अनिद्रा की परेशानी मिली। पहली श्रेणी में पढ़ाई-प्रतिशतता के दबाव से नींद प्रभावित मिली।
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5 फीसदी में देर रात तक मोबाइल-लैपटॉप उपयोग भी वजह रही। इससे याददाश्त कमजोर और एकाग्रता की कमी मिली। दूसरी श्रेणी में मोबाइल-लैपटॉप पर लंबी चैटिंग और रात की पार्टियों के चलते 12 से एक बजे सोने वाले लोगों ने बताया कि 10 से अधिक साल से ऐसा चला आ रहा है। इससे आंखों की रोशनी-रोग प्रतिरोधक क्षमता कम मिली, चेहरे पर झुर्रियां, बाल कम होना-सफेद होना, मांसपेशियों में कमजोरी, आंखों के नीचे धब्बे, मोटापा की परेशानी मिली। साथ ही व्यवहार में चिड़चिड़ापन, तनाव, जल्द थकान होने जैसी समस्याएं मिलीं।
इनमें से 22 फीसदी की उम्र 8-10 साल अधिक प्रतीत दिख रही थी। 51 साल से अधिक के लोगों में आयु-बीमारी संबंधी वजह मिलीं। खास बात यह है कि दवाओं, पूरी नींद, पौष्टिक भोजन और दिनचर्या सुधारने से 64 फीसदी में अनिद्रा की परेशानी दूर हुई और स्वास्थ्य में सुधार हुआ।
रात में जागने से मेलाटोनिन हार्मोंस हुआ प्रभावित
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि मेलाटोनिन हार्मोंस से नींद आती है। इसकी उत्पत्ति पीनियल ग्रंथि अंधेरे में करती है। यही हार्माेंस जैविक सिस्टम को नियंत्रित करता है और मस्तिष्क को सोने-जागने का संकेत भी देता है। देर रात तक जागने से मेलाटोनिन कम बनता है। ऐसे ही एड्रेनेलिन हार्माेंस ऊर्जा देता है। ये सुबह 4 बजे से सूर्योदय तक ज्यादा प्रभावी होता है। देर से सोने-जागने पर ये दोनों ही हार्मोंस बेहतर स्थिति में नहीं होते। इससे मांसपेशियां और अन्य अंगों को जरूरी ऊर्जा नहीं मिलने से कमजोरी बढ़ने लगती है। इससे उम्र से पहले बुढ़ापे के लक्षण दस्तक देने लगते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि मेलाटोनिन हार्मोंस से नींद आती है। इसकी उत्पत्ति पीनियल ग्रंथि अंधेरे में करती है। यही हार्माेंस जैविक सिस्टम को नियंत्रित करता है और मस्तिष्क को सोने-जागने का संकेत भी देता है। देर रात तक जागने से मेलाटोनिन कम बनता है। ऐसे ही एड्रेनेलिन हार्माेंस ऊर्जा देता है। ये सुबह 4 बजे से सूर्योदय तक ज्यादा प्रभावी होता है। देर से सोने-जागने पर ये दोनों ही हार्मोंस बेहतर स्थिति में नहीं होते। इससे मांसपेशियां और अन्य अंगों को जरूरी ऊर्जा नहीं मिलने से कमजोरी बढ़ने लगती है। इससे उम्र से पहले बुढ़ापे के लक्षण दस्तक देने लगते हैं।
इतनी नींद जरूरी:
उम्र घंटे
8- 16: 8-10
17 से 59: 7- 8
60 से अधिक: 5-6
उम्र घंटे
8- 16: 8-10
17 से 59: 7- 8
60 से अधिक: 5-6
ये दिए सुझाव:
- सोने से एक-दो घंटे पहले स्क्रीन देखने से बचें।
- रात आठ बजे तक भोजन करें और 10 बजे तक सो जाएं।
- बेड से 4-6 मीटर दूर मोबाइल रखकर सोएं।
- सूरज उगने से पहले जागने की कोशिश करें।
- रोजाना 5-8 हजार कदम तेज गति से चलें।
- बेवजह-शौकिया मोबाइल-लैपटॉप के उपयोग से बचें।
- सोने से एक-दो घंटे पहले स्क्रीन देखने से बचें।
- रात आठ बजे तक भोजन करें और 10 बजे तक सो जाएं।
- बेड से 4-6 मीटर दूर मोबाइल रखकर सोएं।
- सूरज उगने से पहले जागने की कोशिश करें।
- रोजाना 5-8 हजार कदम तेज गति से चलें।
- बेवजह-शौकिया मोबाइल-लैपटॉप के उपयोग से बचें।
केस एक: सदर निवासी 39 साल के कारोबारी ऑनलाइन शॉपिंग का कार्य करते हैं। रात में 12 से एक बजे के बीच सोते हैं। धूम्रपान भी करते हैं। अनिद्रा से थकान-कमजोरी पर डॉक्टर को दिखाया। दवा-डॉक्टरी परामर्श से परेशानी में सुधार हो रहा है।
केस दो: दयालबाग निवासी 34 वर्षीय बैंककर्मी ने बाल गिरने, आंखों के नीचे गड्ढे और नींद न आने पर डॉक्टर को दिखाया। वह उम्र से अधिक आयु के लगने लगे थे। डॉक्टर की सलाह पर दिनचर्या में सुधार किया तो राहत मिली।