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UP: 'तोड़ दिया घर का सामान', पिता ने बताई कार्तिक के क्रिकेटर बनने की बहानी; IPL के सबसे महंगे अनकैप्ड प्लेयर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 17 Dec 2025 02:32 AM IST
सार
आईपीएल की मिनी नीलामी में चेन्नई सुपर किंग्स की टीम ने आगरा के कार्तिक शर्मा को अपनी टीम में शामिल किया है। नीलामी में उन्होंने इतिहास भी रच दिया है। 14.20 करोड़ की राशि हासिल कर वह सबसे महंगे अनकैप्ड प्लेयर बन गए हैं।
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परिवार के साथ कार्तिक शर्मा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आईपीएल की मिनी नीलामी में चेन्नई सुपर किंग्स द्वारा 14 करोड़ 20 लाख रुपये में खरीदे गए आगरा के युवा क्रिकेटर कार्तिक शर्मा की सफलता के पीछे एक लंबा संघर्ष, परिवार के भीतर बहस और पिता का अटूट विश्वास छिपा है। कार्तिक के पिता मनोज शर्मा ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बेटे के क्रिकेट सफर की शुरुआती यादों को साझा किया।
मनोज शर्मा बताते हैं कि कार्तिक ने महज तीन साल की उम्र में पहली बार बल्ला उठाया था। वह पल आज भी उनके जेहन में ताजा है। मैं खुद क्रिकेट खेलता था। घर में रखा बल्ला कार्तिक ने उठाया और एक गेंद पर ऐसा शॉट लगाया कि घर का काफी सामान टूट गया। उसी दिन मुझे उसके भीतर छिपी प्रतिभा नजर आ गई। मनोज शर्मा कहते हैं कि यहीं से उन्होंने ठान लिया कि उनका बेटा क्रिकेटर बनेगा।
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मनोज शर्मा बताते हैं कि कार्तिक ने महज तीन साल की उम्र में पहली बार बल्ला उठाया था। वह पल आज भी उनके जेहन में ताजा है। मैं खुद क्रिकेट खेलता था। घर में रखा बल्ला कार्तिक ने उठाया और एक गेंद पर ऐसा शॉट लगाया कि घर का काफी सामान टूट गया। उसी दिन मुझे उसके भीतर छिपी प्रतिभा नजर आ गई। मनोज शर्मा कहते हैं कि यहीं से उन्होंने ठान लिया कि उनका बेटा क्रिकेटर बनेगा।
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हालांकि यह फैसला आसान नहीं था। मनोज शर्मा के मुताबिक, जब उन्होंने कार्तिक को क्रिकेटर बनाने का निर्णय लिया तो परिवार और रिश्तेदारों ने विरोध किया। कार्तिक के दादाजी भी उस समय उसे क्रिकेट की बजाय किसी अच्छी सरकारी नौकरी में भेजने के पक्ष में थे। बातचीत के दौरान जब यह बात छिड़ी तो दादाजी अपनी सलाह को लेकर कुछ डिफेंसिव नजर आए। उन्होंने कहा, उस दौर में क्रिकेट में इतना सुरक्षित और बड़ा करियर नजर नहीं आता था, इसलिए हमने पढ़ाई और सर्विस की बात सोची थी।
मनोज शर्मा ने बताया कि तमाम मुश्किलों और विरोध के बावजूद उन्होंने बेटे का हाथ नहीं छोड़ा। करीब पांच साल की उम्र में कार्तिक को आगरा की लोकेंद्र चाहर क्रिकेट अकादमी ले जाया गया। वहां अनुभवी कोच लोकेंद्र चाहर की देखरेख में कार्तिक का हुनर निखरता गया। नियमित अभ्यास, अनुशासन और सही मार्गदर्शन ने उसे आगे बढ़ाया।
आज जब कार्तिक शर्मा को आईपीएल में करोड़ों की पहचान मिली है, तो यह सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि एक पिता के भरोसे, एक कोच की मेहनत और परिवार के भीतर चली लंबी बहस का सुखद परिणाम है। आगरा के लिए यह कहानी युवाओं को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की हिम्मत देती है।
