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UP: घने कोहरे में यमुना एक्सप्रेस-वे होगा बंद! सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी, ये सुझाव भी दिए

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Wed, 17 Dec 2025 09:03 AM IST
सार

घना कोहरा एक्सप्रेस-वे पर 11 साल में 75 लोगों की जिंदगी छीन चुका है। वहीं इन वर्षों में 338 दुर्घटनाओं में 665 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। शून्य दृश्यता होने पर यमुना एक्सप्रेस-वे पर वाहनों का प्रवेश रोकने का सुझाव दिया गया है। 

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Yamuna Expressway will be closed due to dense fog Preparation to file petition in Supreme Court
मथुरा हादसा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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मथुरा में घने कोहरे में हुए हादसे में यात्रियों की मौत के बाद यमुना एक्सप्रेस-वे पर शून्य दृश्यता में वाहनों के संचालन पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक्सप्रेस-वे पर बीते 11 साल में हुए हादसों में 75 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 665 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। कोहरे के कारण सिर्फ यमुना एक्सप्रेस-वे पर ही 338 सड़क दुघर्टनाएं हो चुकी हैं। सड़क सुरक्षा से जुड़ी कमेटियों के विशेषज्ञों ने हादसे की फॉरेंसिक जांच के साथ शून्य दृश्यता में एक्सप्रेस-वे पर वाहनों का संचालन बंद करने की मांग की है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर करने की तैयारी है।
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यमुना एक्सप्रेस-वे पर 12 बसों और तीन कारों के आपस में टकराने और आग लगने के हादसे के बाद सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक्सप्रेस-वे की इंजीनियरिंग के साथ यहां कोहरे में वाहनों की रफ्तार कम करने और शून्य दृश्यता में संचालन पूरी तरह से रोक देने का सुझाव दिया गया है। सड़क सुरक्षा समिति से जुड़े और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता केसी जैन ने कहा कि वह शून्य दृश्यता में एक्सप्रेस-वे पर कुछ घंटों के लिए यातायात पूरी तरह से बंद करने की याचिका दायर करेंगे। आंखों पर सफेद पट्टी बांधने की तरह ही कोहरे में जब कुछ नहीं दिखता तो संचालन क्यों किया जाना चाहिए। एक्सप्रेस-वे पर प्रवेश नियंत्रित किया जा सकता है। वह सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका में ये मांग करेंगे।

 
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कोहरे में रफ्तार बन गई जानलेवा
यमुना एक्सप्रेस-वे पर कोहरे में वाहनों के पीछे से टकराने के मामले ज्यादा हैं। सड़क हादसों के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012 से 2023 के बीच घने कोहरे के कारण यमुना एक्सप्रेस-वे पर ही 338 सड़क दुघर्टनाएं हो चुकी हैं। इनमें 75 लोगों की मौत हुई और 665 से अधिक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुए। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और नेशनल हाईवे का आंकड़ा जोड़ लें तो स्थिति बेहद भयावह है। अधिवक्ता केसी जैन के मुताबिक मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 115 में राज्य सरकार सुरक्षा, सुविधा के लिए सड़क पर आवागमन नियंत्रित या अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर सकती है। घने कोहरे में जब शून्य दृश्यता हो तो आवागमन बंद किया जाना चाहिए।


 

सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य डॉ. संजय चतुर्वेदी ने बताया कि यमुना एक्सप्रेस-वे पर इस हादसे की पूरी फॉरेंसिक जांच की जरूरत है ताकि टकराने के बाद आग लगने की जानकारी हो सके। यह ऐसा हादसा है, जिससे सबक सीखना होगा। यह इंजीनियरिंग नहीं, बल्कि कोहरे में संचालन व्यवहार में लापरवाही का मामला लगता है। विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
 

सुनामी ऑन रोड्स संस्था के अध्यक्ष डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने बताया कि घने कोहरे में और हादसे न हों, इसलिए वाहन तुरंत हटाने की व्यवस्था होनी चाहिए। एलईडी, रिफ्लेक्टर टेप के बिना कोई गाड़ी एक्सप्रेस-वे और हाईवे पर न जाए, यह संबंधित अथॉरिटी की जिम्मेदारी है, जिसमें लापरवाही बरती गई है। कोहरे में गाड़ियों को चलाने की एसओपी का सख्ती से पालन कराया जाए।
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