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Agra: बिना सुरक्षा मानकों के गली-गली संचालित लाइब्रेरी और हॉस्टल, हादसे के बाद जागा विभाग; अब होगी कार्रवाई
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 01 Jun 2026 09:34 AM IST
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सार
आगरा में कई लाइब्रेरी और हॉस्टल बिना रजिस्ट्रेशन और अग्निशमन विभाग की एनओसी के बिना संचालित हो रहे हैं, जिससे सुरक्षा पर बड़ा सवाल उठ रहा है। हाल ही में आग हादसे में 100 छात्रों के फंसने के बाद प्रशासन ने निरीक्षण और कार्रवाई की बात कही है।
आगरा-ग्वालियर रोड पर ककुआ गांव के पास शनिवार शाम चार मंजिला इमारत में आग लग गई।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
डिजिटल युग में लाइब्रेरी भी डिजिटल हो गई हैं। ऐसे में गली-गली में लाइब्रेरी संचालित हो रही हैं। बिना रजिस्ट्रेशन और अग्निशमन विभाग की एनओसी के मानकों की अनदेखी के संचालित लाइब्रेरी में कभी भी हादसा हो सकता है। शनिवार को ककुआ में 4 मंजिला कांप्लेक्स में आग लगने पर उसमें संचालित लाइब्रेरी में 100 के करीब बच्चे फंस गए थे। गनीमत रही कि सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया था।
वर्तमान में लाइब्रेरी का स्वरूप बदल गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को शांत और पढ़ाई के लिए उपयुक्त माहौल चाहिए होता है। एक कमरे में क्रमवार कुर्सियां और टेबल लगाकर उन्हें केबिन की तर्ज पर बना दिया जाता है। पानी और वाई-फाई की सुविधा देकर उनसे प्रति घंटा के हिसाब से शुल्क लिया जाता है। जिन घर और हॉस्टल में पढ़ाई का माहौल नहीं बन पाता है, वहां से छात्र ऐसी लाइब्रेरी में आकर पढ़ाई करते हैं।
शहर के खंदारी, मऊ रोड, भगवान टॉकीज, नगला पदी, नगला बूढ़ी, कमलानगर और यमुनापार में सबसे अधिक लाइब्रेरी संचालित हो रही हैं। सिर्फ न्यू आगरा क्षेत्र में 50 से अधिक लाइब्रेरी बनी हुई हैं। इसके साथ ही लोगों ने घरों के ऊपरी तल पर छोटे- छोटे कमरे बनाकर हॉस्टल भी बना लिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों जैसे मलपुरा, पिनाहट, बाह, फतेहाबाद, अछनेरा आदि क्षेत्रों में तो लाइब्रेरी में 24 घंटे आकर पढ़ने की सुविधा दी जा रही है। अधिकतर लाइब्रेरी और हॉस्टल के रजिस्ट्रेशन भी नहीं हैं। किसी भी जगह आग से बचाव के लिए जरूरी उपकरण नहीं हैं और अग्निशमन विभाग की एनओसी भी नहीं है।
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मुख्य अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि लाइब्रेरियों का निरीक्षण कर उनमें आग से सुरक्षा के मानकों की जांच की जाएगी। कमी मिलने पर नोटिस जारी कर मानक पूरे करवाए जाएंगे। किसी को भी नियमों का उल्लंघन नहीं करने दिया जाएगा।
वर्तमान में लाइब्रेरी का स्वरूप बदल गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को शांत और पढ़ाई के लिए उपयुक्त माहौल चाहिए होता है। एक कमरे में क्रमवार कुर्सियां और टेबल लगाकर उन्हें केबिन की तर्ज पर बना दिया जाता है। पानी और वाई-फाई की सुविधा देकर उनसे प्रति घंटा के हिसाब से शुल्क लिया जाता है। जिन घर और हॉस्टल में पढ़ाई का माहौल नहीं बन पाता है, वहां से छात्र ऐसी लाइब्रेरी में आकर पढ़ाई करते हैं।
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शहर के खंदारी, मऊ रोड, भगवान टॉकीज, नगला पदी, नगला बूढ़ी, कमलानगर और यमुनापार में सबसे अधिक लाइब्रेरी संचालित हो रही हैं। सिर्फ न्यू आगरा क्षेत्र में 50 से अधिक लाइब्रेरी बनी हुई हैं। इसके साथ ही लोगों ने घरों के ऊपरी तल पर छोटे- छोटे कमरे बनाकर हॉस्टल भी बना लिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों जैसे मलपुरा, पिनाहट, बाह, फतेहाबाद, अछनेरा आदि क्षेत्रों में तो लाइब्रेरी में 24 घंटे आकर पढ़ने की सुविधा दी जा रही है। अधिकतर लाइब्रेरी और हॉस्टल के रजिस्ट्रेशन भी नहीं हैं। किसी भी जगह आग से बचाव के लिए जरूरी उपकरण नहीं हैं और अग्निशमन विभाग की एनओसी भी नहीं है।
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