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UP: किताबों के बीच छिपी मिली जंगली बिलाव, लोगों की संवेदनशीलता ने बचाई जान

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Thu, 25 Jun 2026 12:42 PM IST
सार

आगरा के सिकंदरा स्थित एलआईसी कार्यालय की लाइब्रेरी में एक सहमी हुई एशियाई पाम सिवेट (जंगली बिलाव) घुस गई, जिसे वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू किया। 24 घंटे तक उपचार और निगरानी के बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया, जिसने घटते जंगलों और बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष पर नए सवाल खड़े कर दिए।

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Lost From the Forest Found Among Books: Frightened Asian Palm Civet Rescued and Released Back Into the Wild
जंगली बिलाव - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

जंगल सिकुड़ रहे हैं और वन्य जीव अब अनजाने में शहरों की दहलीज तक पहुंचने लगे हैं। इसकी एक मार्मिक तस्वीर सोमवार को सिकंदरा स्थित एलआईसी कार्यालय में देखने को मिली। एक मादा एशियाई पाम सिवेट (जंगली बिलाव) लाइब्रेरी में घुस गई। अनजान माहौल और लोगों की आवाजाही से घबराई यह बेजुबान एक टेबल के नीचे सहमी बैठी रही।
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कार्यालय कर्मचारियों ने देखा तो मानवता का परिचय देते हुए उसे भगाने या नुकसान पहुंचाने के बजाय लाइब्रेरी का दरवाजा बंद कर दिया और तुरंत वाइल्डलाइफ एसओएस की हेल्पलाइन पर सूचना दी। कुछ देर बाद पहुंची रैपिड रिस्पॉन्स टीम ने सावधानीपूर्वक रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित बाहर निकाला।
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जांच में पता चला कि सिवेट की नाक पर हल्की चोट लगी है। इसके बाद उसे वाइल्डलाइफ एसओएस की ट्रांजिट फैसिलिटी में ले जाकर उपचार शुरू किया गया। करीब 24 घंटे तक उसकी निगरानी की गई, घाव की ड्रेसिंग की गई और जब डॉक्टरों ने उसे पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर दिया तो उसे फिर से जंगल में उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
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वाइल्डलाइफ एसओएस से संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण का कहना है कि एशियाई पाम सिवेट बेहद शर्मीले और रात्रिचर जीव होते हैं। यह अपनी मर्जी से इंसानी बस्तियों में नहीं आते। मगर तेजी से घटती हरियाली और जंगलों पर बढ़ते दबाव ने इन्हें शहरों की ओर भटकने पर मजबूर कर दिया है। यह घटना सिर्फ एक रेस्क्यू नहीं, बल्कि इंसानों और वन्य जीवों के बीच बदलते रिश्तों की कहानी भी है। यह घटना एक सवाल छोड़ गई है कि आखिर जंगलों के बाशिंदे शहरों की ओर आने को क्यों मजबूर हो रहे हैं।
 
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