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काली यादें: आपातकाल में सिर्फ अधिकार ही नहीं, इमारतों पर भी चला था हथौड़ा; आगरा में चला था भूमिगत आंदोलन

अखिलेश कुमार, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Thu, 25 Jun 2026 01:20 PM IST
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सार

आपातकाल के दौरान आगरा में न केवल नागरिक अधिकारों पर पाबंदियां लगाई गईं, बल्कि धारा 144, गिरफ्तारियों और इमारतों पर बुलडोजर कार्रवाई जैसे कदम भी उठाए गए। शाह आयोग की रिपोर्ट और उस दौर के दस्तावेज बताते हैं कि शहर में भूमिगत आंदोलन चला और जेलों में बंदियों को भी कठोर यातनाएं झेलनी पड़ीं।

Emergency 1975: Not Just Rights Even Buildings Faced the Hammer as Agra Witnessed an Underground Movement
आपातकाल की दास्तान - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

25 जून 1975...आपातकाल के एलान का दिन। इसके बाद जो हुआ, वह शाह आयोग की जांच में साफ हुआ। इस बीच जनता के अधिकारों पर ही नहीं इमारतों पर भी हथौड़ा चला था। बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों के पीछे मुख्यमंत्रियों के फरमान भी सामने आए थे। आगरा में तब भूमिगत आंदोलन चलाया गया था।

28 जून 1975 को प्रकाशित खबर के मुताबिक,आपातकाल के बाद आगरा में धारा 144 लागू कर दी गई थी। जुलूसों, सभाओं, प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

3 दिसंबर 1977 को प्रकाशित महेंद्र नाथ शर्मा के हवाला से, तब जिला जेल में बंदियों से क्रूर व्यवहार किया जाता था। अपातकाल के बंदियों को सर्दी में ठीक से कपड़े नहीं दिए जाते थे। इससे कई बीमार हो गए। 4 जनवरी 1976 को 81 बंदी भूख हड़ताल पर बैठ गए। अगले दिन महिलाएं भी शामिल हो गईं। तत्कालीन डिप्टी जेलर ने तब लाठीचार्ज के आदेश दे दिए। बंदी सत्याग्रहियों को बैरक में पीटा गया था।
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वहीं 3 सितंबर 1978 को प्रकाशित खबर के मुताबिक शाह आयोग ने तीसरी और अंतिम रिपोर्ट में कहा, इमारतें गिराने और तोड़फोड़ में पुलिस शक्ति और बुलडोजरों का प्रयोग किया गया। आगरा के सौंदर्यीकरण से संजय गांधी संबद्ध् थे। यहां भी हथौड़ा चला। उत्तर प्रदेश में 425 इमारतें टूटी थीं।
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गृह मंत्रालय और मंत्रिमंडल को नहीं पता था फैसला
शाह आयोग के सामने बयानों और लिखित साक्ष्यों के हवाले से 7 दिसंबर 1977 को अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक, आंतरिक आपातकाल इंदिरा गांधी का खुद का निर्णय था। गृह मंत्रालय और मंत्रिमंडल को इस बाबत कुछ भी नहीं बताया गया था। तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद भी पहले इसके लिए तैयार नहीं थे। वहीं एलान के बाद गिरफ्तारियों का लंबा दौर चला था। 10 दिसंबर 1977 में प्रकाशित समाचार के मुताबिक शाह आयोग के सामने बयान देने वाले राज्यों के अधिकारियों के स्वीकार किया था कि 25 और 16 जून को गिरफ्तारियां मुख्यमंत्रियों के आदेश से की गई थीं। आगरा में भी लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
 
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