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CBSE 12th Result:  कम नंबर आए तो निराश न हों, 'मुझे अकेला छोड़ दो' कहे बच्चा तो तुरंत हो जाएं अलर्ट

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Thu, 14 May 2026 10:22 AM IST
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सार

विशेषज्ञों ने कहा है कि कम अंक आने का मतलब असफलता नहीं होता और बच्चों को ताने देने के बजाय उनका मनोबल बढ़ाना चाहिए। यदि बच्चा उदास रहने लगे, अकेला रहने की बात करे या चिड़चिड़ा हो जाए तो तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेने की जरूरत है।

Low Marks Are Not Failure: Experts Urge Parents to Support Children After Results
डॉ. विशाल सिन्हा, डॉ. दिनेश राठौर, डॉ. सागर लवानियां - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

 योग्यता का पैमाना सिर्फ अंक नहीं है। मनमाफिक प्रतिशत न पाने वाले भी सफलता का शिखर छूते रहे हैं। ऐसे में आपके सहपाठी या मित्र से कम अंक आए हैं तो निराश होने की जरूरत नहीं है। इससे भविष्य की तैयारियां प्रभावित होने लगती हैं। जहां कमी रह गई उसे दूर कर सपने पूरे करने में लग जाएं।
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परिणाम के बाद छात्र-छात्राओं के व्यवहार में बदलाव होने, भूख न लगने और उदास रहने पर मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के टेलीमानस टोल फ्री नंबर (14416) पर सहायता ली जा सकती है। यहां 24 घंटे विशेषज्ञ बैठते हैं जो किसी भी मानसिक परेशानी पर काउंसलिंग करते हैं।
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मुझे अकेला छोड़ दो...कहने पर हो जाएं अलर्ट
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि ज्यादा अंक सफलता की गारंटी नहीं है। अब हर जगह प्रवेश परीक्षा होने लगी है। अगर फिर भी कोई बच्चा उदास है, निराशा के भाव हैं और कहता है कि मुझसे बात मत करोे, मुझे अकेला छोड़ दो। चिडचिड़ापन, भोजन न करने जैसे लक्षण हैं तो उसे नजरअंदाज न करें और उसे अकेला नहीं छोड़े। विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श जरूर कर लें। 
 

प्लान-बी बनाकर लोगों ने पाई है सफलता
पूर्व सचिव आगरा साइकेट्री सोसाइटी डॉ. सागर लवानियां का कहना है कि बच्चों के बंपर नंबर मिल रहे हैं। कई ऐसे हैं, जिनको मनमाफिक या फिर अपने साथी के मुकाबले कम नंबर रह गए हैं। ऐसे में निराश होने का मतलब ही नहीं बनता। अब नंबर ही एकमात्र मेधावी होने का विकल्प नहीं हैं। कई ऐसे भी हैं जो हमेशा प्लान-बी लेकर चलते हैं। ऐसे कई छात्र-छत्राएं हैं जिन्होंने प्लान-बी बनाकर तैयारियां की और बेहतर मुकाम हासिल किया।

दूसरों के बच्चों से तुलना कर न दें ताना
एसएन मेडिकल कॉलेज विभागाध्यक्ष मानसिक रोग डॉ. विशाल सिन्हा ने बताया कि अक्सर परिजन दूसरे बच्चे के अंकों से तुलना कर ताने मारते हैं। ऐसा न करें, इससे बच्चा तनाव-अवसाद में आ सकता है। मनमाफिक अंक नहीं आने पर बच्चों के साथ समय बिताएं और उसकी सुनें। सामान्य माहौल होने पर बच्चे को समझाएं और उसे आगे और बेहतर करने के लिए प्रेरित करें। उसे बताएं कि अभी और मौके हैं, निराश होने से नुकसान ही होगा।
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