{"_id":"6a6ad347a7cbcaf248068af2","slug":"ngt-orders-fresh-drainage-plan-for-rohta-drain-next-hearing-on-21-august-2026-07-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"रोहता नाले पर एनजीटी सख्त: अब नए सिरे से बनेगी जलनिकासी योजना, 21 अगस्त को होगी अगली सुनवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रोहता नाले पर एनजीटी सख्त: अब नए सिरे से बनेगी जलनिकासी योजना, 21 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
Thu, 30 Jul 2026 09:59 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 30 Jul 2026 09:59 AM IST
सार
ग्वालियर रोड पर जलभराव की समस्या को लेकर एनजीटी ने रोहता नाले की जलनिकासी योजना नए सिरे से तैयार करने के निर्देश दिए हैं। तीन सदस्यीय तकनीकी समिति नई योजना बनाकर 21 अगस्त से पहले एनजीटी में रिपोर्ट पेश करेगी।
विज्ञापन
एनजीटी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आगरा के ग्वालियर हाईवे पर रोहता, नगला माकरौल और ककुआ क्षेत्र में जलभराव के मामले में नाले की योजना दोबारा तैयार की जाएगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में इस मामले में अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी। याचिकाकर्ता रविंद्र सिंह ने बताया कि मंगलवार को सुनवाई में प्रशासन की ओर से जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था के लिए फिर से योजना बनाने और आवश्यक कार्रवाई के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया।
एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने 13 अप्रैल को स्थिति का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी आगरा को निर्देश दिया था कि नाला निर्माण की पूरी रिपोर्ट और अब तक हुई प्रगति की जानकारी अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले दाखिल करें। याचिकाकर्ता रविंद्र सिंह ने बताया कि आगरा-ग्वालियर हाईवे और सर्विस रोड पर जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से सड़क खराब होने और आम लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है।
इस याचिका पर रोहता नाले के लिए करीब 108.63 करोड़ रुपये की ट्रंक ड्रेन परियोजना तैयार की गई थी। इसमें नाले के पानी को नहर में डालने का प्रावधान किया गया था। हालांकि, जांच और तकनीकी परीक्षण के बाद इस पर आपत्ति जताई गई। इस पर नए सिरे से जलनिकासी की योजना तैयार की जाएगी।
विज्ञापन
तीन सदस्यीय कमेटी का गठन
प्रशासन ने समस्या के स्थायी समाधान के लिए सिंचाई विभाग, यूपी कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज और आगरा विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंताओं की तीन सदस्यीय तकनीकी समिति गठित की है। समिति कंटूर मैपिंग और हाइड्रोलॉजिकल सर्वे के आधार पर नई जलनिकासी योजना तैयार करेगी। 21 अगस्त की सुनवाई से पहले यह योजना एनजीटी में दाखिल करनी होगी।
क्या है कंटूर मैपिंग?
कंटूर मैपिंग जमीन की ऊंचाई, ढलान और भू-आकृति को द्वि-आयामी यानी 2डी नक्शे पर दिखाने की एक तकनीक है। इसमें समुद्र तल से समान ऊंचाई वाले बिंदुओं को आपस में जोड़ने वाली रेखाओं (कंटूर लाइनों) का उपयोग किया जाता है।
विज्ञापन
एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने 13 अप्रैल को स्थिति का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी आगरा को निर्देश दिया था कि नाला निर्माण की पूरी रिपोर्ट और अब तक हुई प्रगति की जानकारी अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले दाखिल करें। याचिकाकर्ता रविंद्र सिंह ने बताया कि आगरा-ग्वालियर हाईवे और सर्विस रोड पर जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से सड़क खराब होने और आम लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है।
विज्ञापन
इस याचिका पर रोहता नाले के लिए करीब 108.63 करोड़ रुपये की ट्रंक ड्रेन परियोजना तैयार की गई थी। इसमें नाले के पानी को नहर में डालने का प्रावधान किया गया था। हालांकि, जांच और तकनीकी परीक्षण के बाद इस पर आपत्ति जताई गई। इस पर नए सिरे से जलनिकासी की योजना तैयार की जाएगी।
विज्ञापन
तीन सदस्यीय कमेटी का गठन
प्रशासन ने समस्या के स्थायी समाधान के लिए सिंचाई विभाग, यूपी कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज और आगरा विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंताओं की तीन सदस्यीय तकनीकी समिति गठित की है। समिति कंटूर मैपिंग और हाइड्रोलॉजिकल सर्वे के आधार पर नई जलनिकासी योजना तैयार करेगी। 21 अगस्त की सुनवाई से पहले यह योजना एनजीटी में दाखिल करनी होगी।
क्या है कंटूर मैपिंग?
कंटूर मैपिंग जमीन की ऊंचाई, ढलान और भू-आकृति को द्वि-आयामी यानी 2डी नक्शे पर दिखाने की एक तकनीक है। इसमें समुद्र तल से समान ऊंचाई वाले बिंदुओं को आपस में जोड़ने वाली रेखाओं (कंटूर लाइनों) का उपयोग किया जाता है।