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नकली दवाओं का खेल: ऐसे बेची जा रहीं सैंपल-एक्सपायर्ड दवाएं, नामी कंपनियों की दवा शामिल; जांच में बड़ा खुलासा

धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Arun Parashar Updated Sun, 14 Jun 2026 11:34 AM IST
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सार

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब का कहना है कि छापे में नामी कंपनियों की सैंपल दवाएं मिली हैं। साथ ही कई साक्ष्य मिले हैं। जांच पूरी होने के बाद ही रिपोर्ट जारी की जाएगी।

Sample and expired medicines being sold after re-labeling
दवाओं की जांच करती टीम। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

नॉट फॉर सेल, फिजिशियन सैंपल और एक्सपायर्ड तिथि को केमिकल से हटाकर नई कीमत प्रिंट कर दवाओं की बिक्री का खेल सामने आया है। दवा माफिया सरकारी, सैंपल और एक्सपायर्ड दवाओं की तस्करी कर रहे हैं। दवाओं को 20-30 फीसदी लाभ पर मेडिकल स्टोरों और अस्पतालों में खपाया जा रहा है। लखनऊ मुख्यालय की टीम के छापे में री-लेबलिंग का खेल पकड़ा गया है। अवैध गोदाम से एक्सपायर्ड और सैंपल की दवाएं भारी मात्रा में पकड़ी गईं। इसमें एंटीबायोटिक, त्वचा रोग, कॉस्मेटिक, हृदय रोग समेत अन्य मर्ज की दवाएं हैं। ये देश-विदेश की नामी कंपनियों की महंगी दवाएं हैं।


आगरा में नकली, फिजिशियन सैंपल और एक्सपायर्ड दवाओं की तस्करी की जड़ें बहुत गहरी हैं। दवा माफिया इन दवाओं को खपाने के लिए हाईटेक तरीका अपना रहे हैं। केमिकल के सहारे दवाओं के पैकेट से नॉट फॉर सेल, फिजिशियन सैंपल मिटाकर नई कीमत और 2-5 साल आगे की तिथि अंकित कर हॉकरों के जरिये मेडिकल स्टोरों और अस्पतालों में बिक्री की जा रही है।
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नामी कंपनियां और महंगी दवाएं होने के कारण सामान्य तौर पर इनकी खरीद जल्दी होती है। मोटा मुनाफा मिलने के कारण आसानी से खप भी रही हैं। औषधि विभाग की टीम की महीने भर की जांच में ये रैकेट सामने आया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब का कहना है कि छापे में नामी कंपनियों की सैंपल दवाएं मिली हैं। साथ ही कई साक्ष्य मिले हैं। जांच पूरी होने के बाद ही रिपोर्ट जारी की जाएगी।

दिल्ली-जयपुर से जुड़ रहे तार
छापे में टीम को सैंपल और एक्सपायर्ड दवाएं दिल्ली और जयपुर से मंगवाने के सुराग मिले हैं। ये नामी कंपनियों की दवाएं हैं। मधुमेह, हृदय रोग, त्वचा रोग, पेट रोग और कॉस्मेटिक की दवाएं अधिकांश हैं। बाजार में इनकी ज्यादा मांग रहती है। ऐसे में टीम दिल्ली और जयपुर भी टीम भेजकर जांच कराएगी।

 

एक्सपायर्ड दवाओं से मरीजों पर दुष्प्रभाव का खतरा
सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि सैंपल की दवाएं कंपनी प्रचार-प्रसार के लिए जारी करती हैं। ये मरीजों को निशुल्क दी जाती हैं। एक्सपायर्ड तिथि के बाद दवा बेअसर हो जाती है। साथ ही इसके दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। ऐसे में सैंपल-एक्सपायर्ड दवाओं की खरीद-बिक्री गैरकानूनी है। नकली-सैंपल की दवाओं की टोल फ्री नंबर 18001805533 पर शिकायत कर सकते हैं।

ऐसे पकड़ा खेल
औषधि विभाग की टीम ने 21 से 23 मई तक 18 फर्मों पर छापा मारकर नकली, एक्सपायर्ड और सरकारी (सैन्य-ईएसआई अस्पताल की) दवाएं जब्त की थीं। इनकी कीमत करीब दो करोड़ रुपये थी। छापे में प्रिंट को मिटाने वाला केमिकल, प्रिंटर समेत अन्य भी बरामद हुआ था। झूलेलाल मार्केट में दो अवैध गोदाम में भी सैंपल-सरकारी दवाएं मिली थीं। ये ज्योति ड्रग हाउस के संचालक नारायण दास हंसराजानी की थी। फर्म के बिल की जांच करने के बाद टीम ने 12 जून को फिर से छापा मारा। यहां भी कई गोदामों में सैंपल-एक्सपायर्ड दवाएं बरामद की हैं। इससे पहले फरवरी 2026 में औषधि विभाग ने हींग की मंडी मंटोला में एक घर से नामी कंपनी के इन्हेलर के आठ हजार रैपर, प्रिंटर पकड़े थे। आरोपी जुबैर अब तक पुलिस पकड़ में नहीं आया है।

ये भी पढ़ें-दवा माफिया का दुस्साहस: औषधि विभाग के ताले तोड़, गैलरी में फेंक दी सैंपल-एक्सपायर्ड दवा; टीम भी रह गई दंग



 
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