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दरगाह में गूंजा सूफियाना रंग: उर्स-ए-मुबारक पर मुशायरे ने बांधा ऐसा समां, कलाम से महकी सीकरी की फिजा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 27 Mar 2026 12:26 PM IST
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सार
हजरत शेख सलीम चिश्ती दरगाह में उर्स-ए-मुबारक के अवसर पर आयोजित ‘रंग-ए-सूफियाना’ महोत्सव में ऑल इंडिया मुशायरे ने माहौल को रूहानी बना दिया। देश-विदेश के शायरों की शानदार प्रस्तुतियों ने न सिर्फ महफिल सजाई, बल्कि सूफी परंपरा और आपसी भाईचारे का संदेश भी दिया।
दरगाह में गूंजा सूफियाना रंग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
हजरत शेख सलीम चिश्ती के 456वें उर्स-ए-मुबारक के अवसर पर ऐतिहासिक दरगाह परिसर रूहानियत और अदब के अनूठे संगम का गवाह बना। सलीम चिश्ती फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ‘रंग-ए-सूफियाना’ महोत्सव के तहत शनिवार रात ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन हुआ, जिसने पूरी फिजा को सूफियाना रंग में सराबोर कर दिया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सांसद राजकुमार चाहर ने किया। उन्होंने कहा कि सूफी परंपरा भारत की साझा संस्कृति और अटूट भाईचारे का जीवंत प्रतीक है। समारोह की अध्यक्षता दरगाह के सज्जादा नशीन पीरजादा अरशद फरीदी ने की। मुशायरे में देश-विदेश के नामचीन शायरों ने अपनी मखमली आवाज और गहरे जज्बातों से श्रोताओं का दिल जीत लिया। विश्व प्रसिद्ध शायर मंजर भोपाली ने सुनाया-तू गिरेगी ऐ बिजली अब कहां-कहां देखें, शाख-शाख पर हम भी आशियां बनाएंगे। मोईन शादाब ने पढ़ा-दिल भी तोड़ा तो सलीके से न तोड़ा तूने, बेवफाई के भी आदाब हुआ करते हैं।
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डॉ. मुमताज आलम रिजवी ने उर्स की अकीदत में कहा-हां सलीम चिश्ती का उर्स हम मनाते हैं, रंग-ए-सूफियाना से महफिलें सजाते हैं। अभिषेक तीव्र ने गजल सुनाई-मुझे फूल ओ खुशबू की चाहत नहीं है, मोहम्मद का मुझको पसीना बना दे। महफिल में सारिका मलिक ने पढ़ा, जो कहते थे ये आसमां है तुम्हारा, वही मेरी शोहरत से जलने लगे हैं, वहीं अलंकृत ने खुदा की बंदगी में शेर पढ़े। डॉ. माजिद देवबंदी, डॉ. महताब आलम, डॉ. वसीम राशिद जैसे दिग्गजों की मौजूदगी ने इस शाम को यादगार बना दिया। देर रात तक चले इस मुशायरे में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और जायरीन मौजूद रहे। आयोजन ने न केवल सूफी रिवायत को जीवंत किया, बल्कि आपसी सौहार्द का संदेश भी दिया।