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UP: 100 रुपये का पाइप फटने पर युवक की हत्या, 6 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला; तीनों दोषियों को उम्रकैद

संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: आगरा ब्यूरो Updated Wed, 15 Apr 2026 12:47 PM IST
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सार

आगरा में मामूली पाइप विवाद के चलते युवक की गोली मारकर हत्या करने के मामले में अदालत ने तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मजबूत प्रत्यक्षदर्शी गवाही वैज्ञानिक साक्ष्यों की कमियों पर भारी पड़ी और परिवार को न्याय मिला।

Agra Murder Case: Three Get Life Imprisonment Over 100 Pipe Dispute Killing
court new - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

आगरा के खंदौली क्षेत्र में कार के पहिये से सड़क पर पड़ा 100 रुपये का पाइप फटने पर युवक की गोली मारकर हत्या करने के तीन दोषियों को एडीजे-17 नितिन कुमार ठाकुर की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही वैज्ञानिक साक्ष्यों की मामूली तकनीकी कमियों से ऊपर है। कोर्ट ने पिता-पुत्र सहित तीनों दोषियों पर 3.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
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घटना 12 जनवरी 2020 की सुबह करीब 10:30 बजे की है। थाना खंदौली के गढ़ी राठौर निवासी देवकी नंदन ने प्राथमिकी दर्ज कराते हुए पुलिस को बताया था कि उनके भाई अमन कुमार और अंकित कार से सादाबाद जा रहे थे। गांव गढ़ी महाराजा से निकलते ही सड़क पर पानी का पाइप कार के पहिये से फट गया तो वे रुक गए। तभी गढ़ी महाराजा निवासी प्रवीण परमार उसके पिता राकेश और नरहरा निवासी लवकुश और एक अन्य ने दोनों भाइयों को घेर लिया और पाइप फटने पर गाली-गलौज शुरू कर दी।

विरोध करने पर राकेश और लवकुश ने अंकित को पकड़ लिया और प्रवीण ने उसके सीने में गोली मार दी। अंकित की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने विवेचना के बाद अदालत में तीन अभियुक्तों राकेश, प्रवीण और लवकुश के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। अदालत ने साक्ष्यों व गवाही के आधार पर तीनों को अंकित की हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 3.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
 
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विज्ञान पर भारी पड़ी गवाही
अक्सर बैलिस्टिक रिपोर्ट और एफएसएल लैब की जांच रिपोर्ट को मजबूत कड़ी माना जाता है, लेकिन इस केस में न्याय का तराजू चश्मदीद के अटूट भरोसे की ओर झुका। जांच के दौरान पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल तमंचा और मृतक के शरीर से निकली गोली को जांच के लिए लैब भेजा था। लैब की रिपोर्ट निर्णायक नहीं थी, यानी वह स्पष्ट रूप से यह साबित नहीं कर पा रही थी कि गोली उसी तमंचे से चली थी।

बचाव पक्ष ने इसी तकनीकी खामी को ढाल बनाकर आरोपियों को बेगुनाह साबित करने की कोशिश की। मगर, मृतक अंकित के भाई अमन ने कोर्ट में आंखों देखी घटना का वर्णन किया। उसने बताया कि कैसे उसके सामने भाई को गोली मार दी गई। अदालत ने माना कि एक भाई अपने सगे भाई के हत्यारे को पहचानने में चूक नहीं कर सकता।

न्यायाधीश की महत्वपूर्ण टिप्पणी
न्यायाधीश ने अपने फैसले में एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कहा कि जब प्रत्यक्षदर्शी का बयान पूरी तरह स्पष्ट और विश्वसनीय हो, तो वैज्ञानिक साक्ष्यों की अनिश्चितता उसे कमजोर नहीं कर सकती। अंततः विज्ञान की तकनीकी उलझनों पर एक प्रत्यक्षदर्शी की सच्चाई भारी पड़ी और अंकित के परिवार को न्याय मिला।

दोषी प्रवीण की घटना से दो महीने पहले ही हुई थी शादी
दोषी प्रवीण की घटना से दो महीने पहले ही शादी हुई थी। 12 जनवरी 2020 को घटना के कुछ देर बाद ही पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। निशानदेही पर तमंचा बरामद किया। दूसरे दिन अदालत में पेश करने के बाद जेल भेजा था। तब से अभी तब जमानत भी नहीं मिली है। अब अदालत ने उम्रकैद की सजा सुना दी।

मृतक के परिजन खुश
मृतक के भाई देवकी नंदन ने बताया कि वैज्ञानिक साक्ष्यों (एफएसएल रिपोर्ट) के आधार पर दोषियों को सजा मिलना संभव नहीं दिख रहा था। अदालत ने गवाही के आधार पर आरोपियों को सजा सुनाई। अब दिल को सुकून मिला है। अदालत के फैसले से परिजन खुश हैं।
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