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UP: 11 करोड़ रुपये निवेश के बाद भी वीरान पड़ी बरौली अहीर मंडी, अवैध आढ़तों के खिलाफ व्यापारियों का फूटा गुस्सा

Mon, 13 Jul 2026 09:48 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 13 Jul 2026 09:48 AM IST
सार

आगरा की बरौली अहीर फल एवं सब्जी मंडी में करोड़ों रुपये निवेश करने वाले व्यापारी सात साल बाद भी कारोबार शुरू नहीं होने से नाराज हैं। अवैध मंडियों को बंद कर मंडी चालू कराने की मांग को लेकर व्यापारियों का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा।

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Traders Protest Over Non-Operational Barauli Ahir Market Despite Crores of Investment
व्यापारियों का फूटा गुस्सा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा के बरौली अहीर स्थित नवीन फल एवं सब्जी मंडी में लाखों रुपये की व्यापारियों ने दुकानें खरीदीं। करोड़ों रुपये निवेश किए लेकिन, मंडी प्रशासन ने उप मंडी के नाम पर छलावा किया। नतीजा बसई चौराहा के सामने सड़क पर अवैध आढ़तें गुलजार हैं, जबकि बसई में व्यापारी लाचार हैं।
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बसई में संचालित निजी मंडी के विरोध में बरौली अहीर में दुकानें खरीदने वाले व्यापारी आक्रोशित हैं। सात साल पहले 35 से 60 लाख रुपये तक की बोली लगाकर बरौली में दुकान खरीदने वाले व्यापारी आज एक-एक रुपये के व्यापार को मोहताज हैं। बसई की मंडी को अवैध बताते हुए बंद कराने की मांग की। बरौली अहीर मंडी में व्यापार शुरू कराने की मांग को लेकर व्यापारियों का धरना रविवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रशासन को आठ दिन का अल्टीमेटम दिया गया है, मांगें पूरी न होने पर व्यापारियों ने भूख हड़ताल की चेतावनी दी है।
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अवैध मंडियों की चांदी, वैध व्यापारी परेशान
व्यापारियों का आरोप है कि बरौली अहीर मंडी का संचालन इसलिए नहीं हो पा रहा है क्योंकि बसई में कलुआ राम उप मंडी स्थल के पास बड़े पैमाने पर अवैध आढ़तें संचालित हो रही हैं। हालात यह हैं कि एक ही परिसर में 125 से अधिक व्यापारी फड़ लगाकर लाखों रुपये कमा रहे हैं। इन अवैध मंडियों के कारण किसान बरौली अहीर मंडी तक पहुंचते ही नहीं हैं।

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करोड़ों की लागत से बनी मंडी बदहाल
बरौली अहीर मंडी में 43 आढ़त और 30 सुपर मार्केट की दुकानें बनाई गई थीं। पूरे परिसर में लाइट, पेयजल के लिए पानी की टंकी और चार छोटी टंकियां लगाई गई थीं। फसल नीलामी के लिए बड़ा टिनशेड और चारों ओर सीसी सड़कें बनाई गई थीं, लेकिन मंडी समिति की लापरवाही से सब बर्बाद हो रहा है। परिसर में झाड़ियां उग आई हैं, टंकियां और शौचालय टूट चुके हैं। नीलामी शेड में गंदगी का अंबार है और दुकानें जर्जर हो रही हैं। मंडी समिति कार्यालय के गेट तक टूटे पड़े हैं। बरौली अहीर मंडी परिसर में धरने के तीसरे दिन व्यापारियों को अन्य संगठनों का भी साथ मिला। उनके समर्थन में सिकंदरा फल एवं सब्जी मंडी के आढ़ती, राष्ट्रीय दिव्यांग संघ के सदस्य और कई किसान धरनास्थल पर पहुंचे। उपाध्यक्ष प्रवेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि प्रशासन को दिया गया आठ दिन का समय तेजी से बीत रहा है। यदि जल्द ही बसई की अवैध मंडी बंद कर बरौली अहीर मंडी को सुचारू नहीं किया गया तो व्यापारी आमरण अनशन और भूख हड़ताल के लिए बाध्य होंगे।

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धरने के बाद जागा प्रशासन
व्यापारियों के धरने पर बैठने के बाद मंडी समिति हरकत में आई है। अब जेसीबी से झाड़ियां साफ कराई जा रही हैं और पानी के टैंकर से शेड धुलवाया जा रहा है, हालांकि लाइट और शौचालय की मरम्मत अब भी नहीं हुई है। नवीन फल एवं सब्जी मंडी बरौली अहीर के उपाध्यक्ष प्रवेंद्र कुमार ने बताया कि वर्ष 2019, 2020 और 2022 में दुकानों का आवंटन किया गया था। आढ़तों की बोली 35 लाख से 60 लाख रुपये तक लगी थी। व्यापारियों ने 50 फीसदी राशि जमा करके 11 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर दिया, लेकिन संचालन शुरू नहीं हो सका।

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व्यापारियों का दर्द
व्यापारी होतम सिंह ने बताया कि वर्ष 2020 में 56 लाख रुपये की बोली लगाकर आढ़त खरीदी थी। आधी रकम जमा कर दी, लेकिन व्यापार शुरू नहीं हुआ। मंडी समिति से रुपये भी वापस नहीं मिल रहे। अब मजबूरन अपनी खेती कर गुजारा कर रहा हूं। वहीं व्यापारी प्रवीण बघेल का कहना है कि 2019 में 60 लाख की बोली लगाकर आढ़त ली थी। मंडी समिति ने पैसे ले लिए लेकिन कोई सुविधा नहीं दी। आज घर चलाने के लिए प्राइवेट नौकरी करनी पड़ रही है। 

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