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UP: राजकुमार चाहर का कटा पत्ता, आगरा BJP में नए सियासी समीकरणों की आहट; किस खेमे को होगा फायदा?
Tue, 18 Aug 2026 09:32 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 18 Aug 2026 09:32 AM IST
सार
राष्ट्रीय पद के चलते आगरा की राजनीति में मजबूत प्रभाव रखने वाले राजकुमार चाहर अब स्थानीय राजनीति में सक्रिय होते हैं तो विभिन्न भाजपा गुटों के बीच समीकरण बदल सकते हैं। केंद्रीय मंत्री, प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों और स्थानीय नेताओं के अलग-अलग खेमों के बीच उनकी अगली राजनीतिक भूमिका पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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सांसद राजकुमार चाहर।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के फतेहपुर सीकरी लोकसभा क्षेत्र से सांसद राजकुमार चाहर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में जगह नहीं मिल सकी है। पिछले करीब छह वर्षों से भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे चाहर का संगठन में गहरा प्रभाव था। राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा पद होने के कारण केंद्रीय राज्यमंत्री और तीन-तीन प्रदेश कैबिनेट मंत्रियों की मौजूदगी के बावजूद उन्हें मंच पर प्रमुख स्थान दिया जाता था, साथ ही शासन-प्रशासन में भी उनके निर्देशों को विशेष महत्व मिलता था।
संगठन से बाहर होने के बाद अब राजकुमार चाहर के गृह जिले आगरा के सियासी समीकरणों में बड़े बदलाव के कयास लगाए जा रहे हैं। स्थानीय राजनीति में विभिन्न गुट सक्रिय हैं। एक ओर केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय का गुट है, तो दूसरी ओर राज्यसभा सांसद नवीन जैन, एमएलसी विजय शिवहरे और महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता का खेमा डटा हुआ है। वहीं, कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य अलग राह पर चलती दिखती हैं।
दूसरी तरफ, विधायक चौधरी बाबूलाल और पक्षालिका सिंह से राजकुमार चाहर की पुरानी सियासी तनातनी किसी से छिपी नहीं है। यद्यपि जिलाध्यक्ष प्रशांत पौनिया को उनका करीबी माना जाता है, लेकिन जब चाहर खेमे की मानी जाने वालीं महापौर हेमलता दिवाकर विवादों में घिरीं, तब कोई उनके समर्थन में आगे नहीं आया। अब तक खुद को दिल्ली की राजनीति तक सीमित रखने वाले राजकुमार चाहर जब स्थानीय राजनीति में फिर से सक्रिय होंगे, तब जिला भाजपा का सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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संगठन से बाहर होने के बाद अब राजकुमार चाहर के गृह जिले आगरा के सियासी समीकरणों में बड़े बदलाव के कयास लगाए जा रहे हैं। स्थानीय राजनीति में विभिन्न गुट सक्रिय हैं। एक ओर केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय का गुट है, तो दूसरी ओर राज्यसभा सांसद नवीन जैन, एमएलसी विजय शिवहरे और महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता का खेमा डटा हुआ है। वहीं, कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य अलग राह पर चलती दिखती हैं।
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दूसरी तरफ, विधायक चौधरी बाबूलाल और पक्षालिका सिंह से राजकुमार चाहर की पुरानी सियासी तनातनी किसी से छिपी नहीं है। यद्यपि जिलाध्यक्ष प्रशांत पौनिया को उनका करीबी माना जाता है, लेकिन जब चाहर खेमे की मानी जाने वालीं महापौर हेमलता दिवाकर विवादों में घिरीं, तब कोई उनके समर्थन में आगे नहीं आया। अब तक खुद को दिल्ली की राजनीति तक सीमित रखने वाले राजकुमार चाहर जब स्थानीय राजनीति में फिर से सक्रिय होंगे, तब जिला भाजपा का सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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