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UP: आयुध निर्माणी में करोड़ों का घोटाला, बांटे फर्जी टेंडर, हवाई यात्रा के टिकट, पत्नियों के खातों में रिश्वत
Thu, 09 Jul 2026 01:29 PM IST
Sharukh Khan
राहुल दक्ष, अमर उजाला, फिरोजाबाद
राहुल दक्ष, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: Sharukh Khan
Updated Thu, 09 Jul 2026 01:29 PM IST
सार
सीबीआई ने फिरोजाबाद की रक्षा मंत्रालय के अधीन आयुध वस्त्र निर्माणी में करीब 12 करोड़ रुपये के कथित टेंडर घोटाले का खुलासा करते हुए चार एफआईआर दर्ज की हैं। मामले में पूर्व मुख्य महाप्रबंधक समेत 10 लोगों पर फर्जी टेंडर, रिश्वत, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं।
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UP Defence Factory Corruption
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
रक्षा मंत्रालय के अधीन फिरोजाबाद के हजरतपुर स्थित आयुध उपस्कर निर्माणी (ओईएफएच) में भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सीबीआई जांच में खुला है। सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा गाजियाबाद ने कारखाने के तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) अमित सिंह, कनिष्ठ कार्य प्रबंधकों (जेडब्ल्यूएम) और कई ठेकेदारों व छद्म (डमी) कंपनियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की 4 अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं। इनमें कुल 10 आरोपी बनाए गए हैं। एक प्राथमिकी में फिरोजाबाद के सबसे बड़े कांच-चूड़ी उद्यमी राजकुमार मित्तल को भी आरोपी बनाया गया है।
सीबीआई जांच में साफ हुआ है कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच नियमों को ताक पर रखकर करीब 12 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी टेंडर बांटे गए और कारखाने के भीतर के ही कंप्यूटरों का इस्तेमाल कर चहेती कंपनियों को टेंडर दिलाए गए। इसके एवज में अफसरों को लाखों की रिश्वत, दक्षिण कोरिया की हवाई यात्रा के टिकट और उनकी पत्नियों के खातों में मोटी रकम ट्रांसफर की गई।
पहली प्राथमिकी 5.67 करोड़ के छद्म कंपनी घोटाला से संबंधित है। बिना किसी तकनीकी योग्यता और फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों के आधार पर मैसर्स एमएसएम एंटरप्राइजेज को 5.67 करोड़ रुपये के कुल 50 टेंडर दे दिए गए। तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक अमित सिंह ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के नियमों का उल्लंघन कर टेंडर की शर्तें बदल दीं। ठेकेदार ने टेंडर डालने के लिए आयुध कारखाने के ही सरकारी कंप्यूटर तंत्र और इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) पते का इस्तेमाल किया।
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सीबीआई जांच में साफ हुआ है कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच नियमों को ताक पर रखकर करीब 12 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी टेंडर बांटे गए और कारखाने के भीतर के ही कंप्यूटरों का इस्तेमाल कर चहेती कंपनियों को टेंडर दिलाए गए। इसके एवज में अफसरों को लाखों की रिश्वत, दक्षिण कोरिया की हवाई यात्रा के टिकट और उनकी पत्नियों के खातों में मोटी रकम ट्रांसफर की गई।
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पहली प्राथमिकी 5.67 करोड़ के छद्म कंपनी घोटाला से संबंधित है। बिना किसी तकनीकी योग्यता और फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों के आधार पर मैसर्स एमएसएम एंटरप्राइजेज को 5.67 करोड़ रुपये के कुल 50 टेंडर दे दिए गए। तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक अमित सिंह ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के नियमों का उल्लंघन कर टेंडर की शर्तें बदल दीं। ठेकेदार ने टेंडर डालने के लिए आयुध कारखाने के ही सरकारी कंप्यूटर तंत्र और इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) पते का इस्तेमाल किया।
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दूसरी प्राथमिकी 5.26 करोड़ के घोटाले की है। यह ट्रॉली बैग घोटाला है। मैसर्स एम के इंडस्ट्रीज (जो बाद में एम के हाईटेक प्राइवेट लिमिटेड बनी) को कागजों पर दिखाकर 5.26 रुपये के 17 टेंडर दिए गए। सीबीआई जांच में पता चला कि जिस फरीदाबाद के पते पर कंपनी पंजीकृत थी, वहां कोई काम ही नहीं हो रहा था। बल्कि वहां संपत्ति विक्रेता का कार्यालय और बर्फखाना चल रहा था। तीसरी प्राथमिकी स्थानीय क्रय समिति (एलपीसी) के माध्यम से मैसर्स आयुष एंटरप्राइजेज और मैसर्स अर्बन वॉल को फर्जी मूल्य-उद्धरण (कोटेशन) के आधार पर 29 टेंडर देने की है।
ये दोनों कंपनियां एक ही व्यक्ति अजीत गौतम द्वारा अपनी पत्नी और बेटे के नाम पर संचालित की जा रही थीं। तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक अमित सिंह ने कनिष्ठ कार्य प्रबंधक दीपेश गुप्ता को बार-बार स्थानीय क्रय समिति का सदस्य बनाया ताकि इन कंपनियों को टेंडर मिल सके। चौथी प्राथमिकी फैक्टरी के प्रतिबंधित दायरे यानी सुरक्षा क्षेत्र में 30 लाख की रिश्वत लेकर अवैध निर्माण से संबंधित है। इसमें आरोप है कि फिरोजाबाद के कांच-चूड़ी कारोबारी राज कुमार मित्तल को कारखाने की दीवार से महज 20 फीट की दूरी पर 18 फीट ऊंची और 300 मीटर लंबी अवैध कंक्रीट की दीवार बनाने की छूट दे दी गई।
इनको बनाया सीबीआई ने आरोपी
- अमित सिंह (तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक, ओईएफएच): वर्तमान में मुख्य महाप्रबंधक, ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड (टीसीएल), कानपुर (सभी चारों मामलों में मुख्य साजिशकर्ता, पत्नियों के खातों में रकम लेने और विदेश यात्रा का आरोप)
- दीपेश गुप्ता (तत्कालीन कनिष्ठ कार्य प्रबंधक, ओईएफएच): वर्तमान में कनिष्ठ कार्य प्रबंधक, आयुध वस्त्र निर्माणी, शाहजहांपुर, मूल निवासी शिव भवन, गणेश नगर, सवाई माधोपुर, राजस्थान। (टेंडरों में हेरफेर और लाखों की रिश्वत लेने का आरोप)
- मनोज कुमार (तत्कालीन चार्जमैन/ कनिष्ठ कार्य प्रबंधक): वर्तमान में कार्यालय आयुध निदेशालय (सीएंडएस), नई दिल्ली में तैनात। (रिश्वत लेने और मुख्य महाप्रबंधक के लिए सियोल की टिकट बुक कराने का आरोपी)
- रघुनंदन शर्मा (वस्त्र-शिल्पी/टेलर, ओईएफएच): (अमित सिंह के लिए 30 लाख रुपये की रिश्वत की किश्तें वसूलने वाला बिचौलिया)
- संतोष कुमार (संचालक, मैसर्स एमएसएम एंटरप्राइजेज): निवासी उसायनी, फिरोजाबाद। (सरकारी कंप्यूटरों से टेंडर डालने वाली छद्म फर्म का मालिक)
- कपिल कुमार पांडेय (निजी प्रबंधक, देव ट्रेडर्स) निवासी- ग्राम चिन्नौर, पोस्ट पैना बुजुर्ग, जिला शाहजहांपुर (धन स्थानांतरण और फर्जीवाड़े में मददगार)
- अजीत गौतम (निजी व्यक्ति) निवासी- 126, नीरव निकुंज, चरण-2, केके नगर रोड, सिकंदरा, आगरा। (अपनी पत्नी भावना गौतम और बेटे आयुष गौतम के नाम पर फर्जी कंपनियां बनाकर टेंडर हथियाने का आरोपी)
- रविंद्र सिंह (साझेदार, मैसर्स एम के इंडस्ट्रीज): निवासी- 13ए, द्वितीय तल, बापू पार्क, कोटला मुबारकपुर, नई दिल्ली। (फर्जी पते पर टेंडर लेने और मुख्य महाप्रबंधक की पत्नी को पैसे भेजने का आरोपी)।
- विजय रतन (साझेदार, मैसर्स एमके इंडस्ट्रीज): निवासी- सी-156, ईस्ट गोकलपुर, अमर कॉलोनी, गोकलपुर, उत्तर पूर्वी दिल्ली।
- राजकुमार मित्तल (उद्यमी): निवासी- ऑर्चिड ग्रीन, राजा का ताल, फिरोजाबाद। (30 लाख की रिश्वत देकर कारखाने के पास अवैध दीवार खड़ी करने वाला कारोबारी)।
ओईएफ के बारे में जनिए
फिरोजाबाद स्थित कारखाने का आधिकारिक नाम ऑर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्टरी (ओईएफ) है, जो आगरा-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर टूंडला तहसील के हजरतपुर में स्थित है। यह भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के तहत एक रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है, जो ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड का हिस्सा है।
फिरोजाबाद स्थित कारखाने का आधिकारिक नाम ऑर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्टरी (ओईएफ) है, जो आगरा-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर टूंडला तहसील के हजरतपुर में स्थित है। यह भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के तहत एक रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है, जो ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड का हिस्सा है।
यहां भारतीय सशस्त्र बलों के लिए विश्व स्तरीय उपकरण और कपड़ा उत्पाद तैयार होता है। मुख्य उत्पादों में पैराशूट, केमोफ्लाज (छलावरण) नेट और एरेस्टर बैरियर शामिल हैं। यह इकाई लगभग चार दशकों से अधिक समय से भारतीय रक्षा क्षेत्र की सेवा कर रही है।