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आगरा कॉलेज भर्ती घोटाला: विजिलेंस जांच हुई तेज, नियुक्ति की फाइलें गायब; पांच पूर्व प्राचार्यों पर FIR
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 14 May 2026 09:49 AM IST
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सार
आगरा कॉलेज में वर्ष 2009 से 2016 के बीच हुई विवादित नियुक्तियों की विजिलेंस जांच में कई अहम पत्रावलियां गायब मिली हैं। मामले में पांच पूर्व प्राचार्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच तेज कर दी गई है।
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विस्तार
विजिलेंस की टीम ने आगरा कॉलेज में प्रबंध समिति के अनुमोदन के बिना हुईं शिक्षकों एवं कर्मचारियों की भर्ती के मामले की जांच शुरू कर दी है। इसमें सामने आया है कि नियुक्तियों से संबंधित कई पत्रावलियां गायब हैं। इनको तलाशना आसान नहीं है। प्राथमिकी में आरोपी पूर्व प्राचार्य हैं। उनको बयान के लिए बुलाया जाएगा।
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आगरा काॅलेज के तत्कालीन प्राचार्य मनोज रावत के कार्यकाल में वर्ष 2009 से 2016 के बीच 54 शिक्षकों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति हुई थीं। इनमें से किसी नियुक्ति के लिए प्रबंध समिति का अनुमोदन नहीं लिया गया। दिसंबर 2017 में आयुक्त कार्यालय में आगरा कॉलेज प्रबंध समिति की बैठक हुई, जिसमें स्ववित्त पोषित इंजीनियरिंग संकाय की वित्तीय स्थिति को देखते हुए जिन शिक्षकों एवं कर्मचारियों के पास वैध नियुक्ति पत्र नहीं थे, उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करने और संविदा की अवधि निश्चित करने का निर्णय लिया गया।
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इसके बाद पूर्व प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने पांच लैब तकनीशियनों को संविदा पर रखा। उन्हें सेवा विस्तार दिया। इंजीनियरिंग संकाय से निकाले गए कर्मचारी मुलायम सिंह ने शासन से लेकर लोकपाल तक से शिकायत की। वर्ष 2018-19 में लोकपाल ने जांच शुरू की। उन्होंने जांच में नियुक्तियों में गड़बड़ी की शिकायत सही पाई। लोकपाल ने शासन से विस्तृत जांच विजिलेंस से कराने की सिफारिश की थी। मामले में अब पांच पूर्व प्राचार्य मनोज कुमार रावत, डॉ. एवी सिंह, डॉ. उमेशचंद शर्मा, नरेंद्र सिंह व डॉ. अनिल कुमार गुप्ता के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में प्राथमिकी दर्ज हुई।
विजिलेंस ने जांच में नियुक्तियों से संबंधित दस्तावेज मांगे मगर संविदा पर नियुक्ति की कोई पत्रावली प्राचार्य कार्यालय पर उपलब्ध नहीं मिली। आशंका है कि इन पत्रावलियों को षड्यंत्र के तहत हटा दिया गया। एसपी विजिलेंस आलोक शर्मा ने बताया कि मामले में साक्ष्य संकलन किया जा रहा है। फर्जीवाड़े में अभी और भी नाम सामने आ सकते हैं।