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Aligarh: रामादेवी धर्मशाला गिराने पहुंची टीम का हुआ विरोध, हंगामे के बाद रुका ध्वस्तीकरण, तीन माह का मांगा समय

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sun, 03 May 2026 04:12 PM IST
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सार

रामा देवी धर्मशाला गुजरे जमाने के दिग्गज अभिनेता भारत भूषण के परिवार की विरासत है। भारत भूषण के परिवार का गहरा नाता अलीगढ़ से था। रामघाट रोड पर स्थित यह प्रॉपर्टी भारत भूषण के परिवार की है। वर्तमान में इसे रामा देवी धर्मशाला के नाम से जाना जाता है।

Aligarh Nagar team reached to demolish Ramadevi Dharamshala
रामादेवी धर्मशाला तोड़ने पहुंची नगर निगम टीम व पुलिस - फोटो : संवाद
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विस्तार

अलीगढ़ के मीनाक्षी पुल के पास स्थित जर्जर रामादेवी धर्मशाला को खाली कराने और ध्वस्त करने पहुंची नगर निगम, प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम को शनिवार को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। टीम के साथ लोगों की नोकझोंक हुई। इस दौरान एक महिला बेहोश हो गई। लोगों ने तीन माह का समय मांगा है, जिसके बाद टीम लौट गई।

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हाईकोर्ट के आदेश पर शनिवार को धर्मशाला खाली कराने और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू करने के लिए नगर निगम अपर नगर आयुक्त वीर सिंह, प्रशासन की ओर से एसीएम द्वितीय दिग्विजय सिंह, पुलिस से सीओ सिविल लाइन सर्वम सिंह की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। टीम के पहुंचते ही वहां रह रहे परिवारों और महिलाओं ने धर्मशाला को खाली करने और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते मौके पर नारेबाजी व हंगामे का माहौल बन गया। 
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नगर निगम की टीम जेसीबी के साथ धर्मशाला पहुंची और वहां रह रहे लोगों को भवन खाली करने के निर्देश दिए। इस पर महिलाओं ने कार्रवाई रोकने की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। विरोध के दौरान एक महिला अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी, जिससे मौके पर खलबली मच गई और अधिकारियों को अपनी कार्रवाई रोकनी पड़ी। 1947 में लाहौर से आए धर्मशाला में रह रहे लोगों का दावा है कि 40 से 50 शरणार्थी परिवारों को अभिनेता भारत भूषण ने यहां आश्रय दिया था।

वर्तमान में यहां लगभग 10 से 15 परिवार निवास कर रहे हैं। इन परिवारों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की इस संपत्ति पर कब्जा करने के लिए भू-माफिया सक्रिय हैं। वे फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर लोगों पर मकान खाली करने का दबाव बना रहे हैं। इन परिवारों ने धर्मशाला को खाली करने के लिए नगर निगम अधिकारियों से कम से कम तीन महीने का समय मांगा। उनका कहना था कि भीषण गर्मी में बच्चों और सामान के साथ अचानक दूसरी जगह जाना संभव नहीं है। उन्होंने मांग उठाई कि धर्मशाला को गिराने से पहले किसी बड़ी संस्था से भवन की तकनीकी जांच कराई जाए। यदि मरम्मत संभव हो तो भवन को ध्वस्त न किया जाए। 

धर्मशाला में रहने वाली जनक रानी ने बताया कि उनका परिवार 1975 से रह रहा है। उन्हें यह जगह दान में मिली थी। बुजुर्ग रामदत्त ने बताया कि उनके पास यहां रहने की पुरानी रसीदें मौजूद हैं, फिर भी उन्हें हटाया जा रहा है। अपर नगर आयुक्त वीर सिंह ने स्पष्ट किया कि धर्मशाला जर्जर और खतरनाक स्थिति में है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में भवन खाली कराने और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, लोगों के अनुरोध को देखते हुए शनिवार को टीम यहां से वापस लौट गई।

धर्मशाला प्रकरण में पांच मई को हाईकोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। नगर निगम अब वहां रह रहे लोगों की मांग और समय दिए जाने का पक्ष अदालत में रखेगा। हाईकोर्ट के आदेश के बिना नगर निगम अपने स्तर से समय नहीं दे सकता। अब न्यायालय जो भी निर्णय देगा, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।- प्रेम प्रकाश मीणा, नगर आयुक्त

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नगर निगम की टीम देख बेहोश हुई वृद्धा - फोटो : संवाद

भारत भूषण के परिवार से जुड़ी है रामा देवी धर्मशाला
रामा देवी धर्मशाला गुजरे जमाने के दिग्गज अभिनेता भारत भूषण के परिवार की विरासत है। भारत भूषण (1920-1992) का जन्म मेरठ में हुआ था, लेकिन उनके परिवार का गहरा नाता अलीगढ़ से था। उनके पिता रायबहादुर मोतीलाल एक सरकारी वकील थे। भारत भूषण ने अपनी शिक्षा अलीगढ़ के धर्म समाज कॉलेज से पूरी की थी। रामघाट रोड पर स्थित यह प्रॉपर्टी भारत भूषण के परिवार की है। वर्तमान में इसे रामा देवी धर्मशाला के नाम से जाना जाता है और यह सिविल लाइन्स थाना क्षेत्र के पंजाबी बाग इलाके में स्थित है। 

50 के दशक में ''बैजू बावरा'' जैसी कालजयी फिल्म से शोहरत की बुलंदियों को छूने वाले भारत भूषण की मां रामा देवी की स्मृति में बनवाई गई थी। इस धर्मशाला में 1947 में हुए भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान से आए करीब 50 परिवार रह रहे थे। मामला तब सुर्खियों में आया जब भारत भूषण के परिजनों ने इसको बेच दिया। खरीदने वाले पक्ष ने इसकी जर्जर हालत को देखते हुए खाली कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया। 2025 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद, जर्जर भवन मानते हुए इस धर्मशाला के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसका निवासियों द्वारा विरोध भी किया गया था। अब यहां पर 12 परिवार ही हैं। इन्हें एक महीने का समय दिया गया है।

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