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एएमयू छात्रसंघ चुनाव: छह साल, 14 मुकदमे और फरहान की अध्यक्ष पद की दावेदारी खत्म
Sat, 31 Oct 2026 12:53 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Sat, 31 Oct 2026 12:53 PM IST
सार
नवंबर 2020 में फ्रांस में हुई घटना और ईसाइयों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक व भड़काऊ बयान देने के मामले में भी फरहान के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। सितंबर 2023 में एएमयू के सुलेमान हॉल में एक हिंदू युवक के साथ मारपीट के प्रकरण में उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी। इस मामले में मारपीट समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई की गई थी।
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फरहान जुबैरी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एएमयू छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर हुए छात्र नेता फरहान जुबैरी के नामांकन निरस्त होने के बाद उनके पुराने मुकदमों का रिकॉर्ड चर्चा में है। वर्ष 2017 से सितंबर 2023 तक उनके खिलाफ अलग-अलग मामलों में 14 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 12 मुकदमे सिविल लाइंस थाने में दर्ज बताए गए हैं। नामांकन की मुख्य सूची को अंतिम रूप दिए जाने के बाद चुनाव अधिकारी की टीम के संज्ञान में यह ब्योरा आया, जिसके बाद फरहान की दावेदारी खत्म हो गई।
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बदायूं जिले के इस्लामनगर थाना क्षेत्र के निवासी फरहान एएमयू से सोशल वर्क में शोध की पढ़ाई कर रहे हैं। विश्वविद्यालय परिसर में विरोध-प्रदर्शनों और विवादों से जुड़े मामलों में उनका नाम पहले भी सामने आता रहा है। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों में दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा से जुड़े मामले भी शामिल बताए जाते हैं।
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फ्रांस की घटना से लेकर हॉस्टल में मारपीट तक के मामले
नवंबर 2020 में फ्रांस में हुई घटना और ईसाइयों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक व भड़काऊ बयान देने के मामले में भी फरहान के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। सितंबर 2023 में एएमयू के सुलेमान हॉल में एक हिंदू युवक के साथ मारपीट के प्रकरण में उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी। इस मामले में मारपीट समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई की गई थी।
नामांकन की जांच के बाद बदला चुनावी समीकरण
छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने के बाद फरहान की दावेदारी पर उस समय विराम लग गया, जब उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों का विवरण चुनाव अधिकारी की टीम के संज्ञान में आया। मुख्य सूची को अंतिम रूप दिए जाने के बाद नामांकन निरस्त किए जाने से चुनाव प्रक्रिया में उम्मीदवारों के रिकॉर्ड की जांच भी चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि, नामांकन निरस्त करने के आधिकारिक आधार और लागू चुनाव नियमों की पुष्टि चुनाव अधिकारी के आदेश से ही हो सकेगी।