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Republic Day: संविधान निर्माण में एएमयू की ऐतिहासिक भूमिका, इन्होंने चलाई कलम और इन मस्तिष्कों ने दिए विचार
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Tue, 27 Jan 2026 12:02 PM IST
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सार
शेख अब्दुल्लाह, जो जम्मू-कश्मीर की राजनीति के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। उन्होंने संघीय व्यवस्था और राज्यों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। वजीर उद्दीन अहमद एक प्रख्यात न्यायविद थे, जिनकी कानूनी समझ ने संविधान की भाषा और संरचना को मजबूती दी।
एएमयू
- फोटो : संवाद
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विस्तार
जब भी 26 जनवरी का सूरज उगता है, देश अपने संविधान, अपने लोकतंत्र और अपने गणतंत्र पर गर्व करता है, लेकिन इस गौरवपूर्ण अवसर पर यह याद करना भी उतना ही जरूरी है कि भारत के संविधान के निर्माण में किन हाथों ने कलम चलाई, किन मस्तिष्कों ने विचार दिए और किन संस्थानों ने ऐसे व्यक्तित्व गढ़े, जिन्होंने राष्ट्र की आधारशिला रखी। इस गौरवशाली अध्याय में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है।
शेख अब्दुल्लाह, जो जम्मू-कश्मीर की राजनीति के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। उन्होंने संघीय व्यवस्था और राज्यों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। वजीर उद्दीन अहमद एक प्रख्यात न्यायविद थे, जिनकी कानूनी समझ ने संविधान की भाषा और संरचना को मजबूती दी। मिर्जा अफजल बेग ने राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती पर बल दिया।
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संविधान की मूल प्रति पर दर्ज ये हस्ताक्षर केवल स्याही के निशान नहीं हैं, बल्कि वे उस ऐतिहासिक जिम्मेदारी की गवाही हैं, जिसे यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों ने पूरी निष्ठा और दूरदर्शिता के साथ निभाया। आने वाली पीढ़ियों के लिए यह अध्याय सदा यह याद दिलाता रहेगा कि अलीगढ़ की धरती ने भारत के गणतंत्र को आकार देने में एक अविस्मरणीय भूमिका निभाई है। यूनिवर्सिटी के पूर्व जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राहत अबरार ने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद सात में एएमयू को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा दिया गया है।