'साहब, मैं जिंदा हूं': राशन रुका, पहचान छिनी, एक साल से चक्कर काट रहा सरकारी कागजों में मृत बेनामी अमर सिंह
पुराने धारावाहिक ऑफिस-ऑफिस में मुसद्दीलाल की तरह अलीगढ़ के बेनामी के साथ भी अजीब हुआ है। वह जिंदा है, एक साल से दर-दर भटक रहा है, पर उसको सरकारी सिस्टम मृतक ही समझ रहा है।
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अलीगढ़ के लोधा ब्लॉक के गांव गोविंदपुर फगोई निवासी बेनामी पुत्र अमर सिंह सरकारी कागजों में मृत घोषित हो चुके हैं। वह पिछले एक साल से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं और सिर्फ एक ही गुहार लगा रहे हैं कि साहब, मैं जिंदा हूं। मुश्किल यह है कि उनका आधार कार्ड निष्क्रिय हो गया और उन्हें राशन सहित सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो गया। यह खुलासा तब हुआ, जब करीब एक साल पहले बेनामी अपने राशन कार्ड की ई-केवाईसी कराने पहुंचे।
जब मशीन पर उनका विवरण दर्ज किया गया, तो प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। जांच करने पर पता चला कि आधार डेटाबेस में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया है। एक तरफ बेनामी हाड़-मांस के शरीर के साथ सबके सामने खड़े हैं, लेकिन सिस्टम को यह मंजूर नहीं। उन्हें खुद को जीवित साबित करने के लिए अनूठे प्रमाणपत्र जुटाने पड़ रहे हैं।
बेनामी अब हर उस दफ्तर की चौखट पर दस्तक दे रहे हैं, जहां से उन्हें न्याय मिल सके। उनकी मांग बेहद साधारण, लेकिन लापरवाह सिस्टम के लिए पेचीदा बन चुकी है। उनका कहना है कि कागजी मौत के इस फैसले को बदला जाए, रिकॉर्ड दुरुस्त हो और मेरा आधार कार्ड दोबारा चालू किया जाए।
इस प्रकरण में क्या विसंगतियां रहीं और यह स्थिति क्यों आई है, इसकी संबंधित खंड विकास अधिकारी से जांच कराई जाएगी।- योगेंद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी
डीएम कार्यालय में दिए प्रार्थना पत्र के साथ उन्होंने ये दस्तावेज लगाए हैं
- सांसद अनूप प्रधान का सत्यापन पत्र (जो गवाही देता है कि बेनामी जीवित हैं)।
- ग्राम प्रधान (गोविंदपुर फगोई) का आधिकारिक सत्यापन पत्र और मतदाता पहचान पत्र, जो यह साबित करता है कि वे देश के सक्रिय नागरिक हैं।