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अलीगढ़: सरकारी पट्टिकाओं पर बड़े-छोटे का भेद खत्म, सभी माननीयों का नाम एक ही फॉन्ट साइज में चमकेगा;ADM का आदेश

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Vijay Singh Pundir Updated Wed, 17 Jun 2026 03:10 PM IST
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names of all dignitaries on government plaques will appear in the same font size
Aligarh News - फोटो : अमर उजाला
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सरकारी विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास पत्थरों पर अब नेताओं और जनप्रतिनिधियों के नामों के आकार को लेकर होने वाली खींचतान पूरी तरह खत्म होने जा रही है। उत्तर प्रदेश शासन के कड़े रुख के बाद अलीगढ़ जिला प्रशासन ने जिले के सभी निकायों को बेहद स्पष्ट और सख्त गाइडलाइन जारी कर दी है।



अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) सौरभ भट्ट द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश (पत्रांक: 2242/टीएसी-प्रथम) के तहत अब विकास कार्यों के शिलापट्ट पर सांसद, विधायक, महापौर और नगर पालिका अध्यक्षों के नामों का फॉन्ट साइज (अक्षरों का आकार) बिल्कुल बराबर रखना होगा। यानी किसी का नाम बड़ा या छोटा नहीं लिखा जा सकेगा।
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लापरवाही पर शासन सख्त, जारी हुए 4 बड़े निर्देश
एडीएम (प्रशासन) ने अलीगढ़ की सभी नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि शासन के पिछले आदेशों का कुछ निकायों द्वारा ठीक से पालन नहीं किया जा रहा था। अब इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आदेश में मुख्य रूप से 4 बातें कही गई हैं।
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प्रोटोकॉल के तहत दर्ज होंगे नाम
नगर विकास विभाग या वित्त आयोग के बजट से होने वाले हर काम की पट्टिका पर माननीय मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री, क्षेत्रीय लोकसभा सांसद, राज्यसभा सांसद, महापौर, क्षेत्रीय विधायक, जिले के नामित नोडल विधान परिषद सदस्य और नगर पालिका या पंचायत अध्यक्ष का नाम उनके प्रोटोकॉल के अनुसार अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा।

फॉन्ट साइज रहेगा एक समान
शिलापट्ट पर क्षेत्रीय सांसद, विधायक, महापौर और निकाय अध्यक्षों के नामों के अक्षरों का आकार  एक बराबर होगा, ताकि किसी भी जनप्रतिनिधि के सम्मान में कोई भेदभाव न दिखे।

शिलान्यास में ससम्मान आमंत्रण
जब भी किसी नई योजना का शिलान्यास या लोकार्पण होगा, संबंधित क्षेत्र के इन सभी माननीयों को प्रोटोकॉल के तहत 'ससम्मान' आमंत्रित करना अनिवार्य होगा। फोटो के बिना नहीं मिलेगी अगली किस्त सरकारी धन का उपयोग करने के बाद अगली किस्त पाने के लिए सिर्फ कागजी उपयोगिता प्रमाण-पत्र और पूर्णता प्रमाण-पत्र काफी नहीं होगा। अधिकारियों को अब उस शिलापट्ट की फोटो भी भेजनी होगी जिसपर माननीयों के नाम लिखे हैं, और इस फोटो को जिलाधिकारी, नगर आयुक्त या अधिशासी अधिकारी द्वारा प्रमाणित किया जाना जरूरी होगा।

अफसरों को अल्टीमेटम, कड़ाई से करें पालन
एडीएम प्रशासन ने जिले के सभी संबंधित अधिकारियों को दो टूक शब्दों में निर्देशित किया है कि इस शासनादेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

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