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Potato: युद्ध ने बिगाड़ा गणित तो बेदम हुआ आलू, कंपनियों ने खींचे हाथ, आधे रह गए दाम

बृजेश चौहान, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Mon, 16 Mar 2026 03:05 AM IST
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सार

आलू की फसल पिटने व भाव गिरने की हताशा अलीगढ़ में इगलास क्षेत्र के गांव बढ़ाकलां निवासी विकास सह नहीं पाया और शुक्रवार को हाथरस में ट्रेन से कटकर जान दे दी।

impact of the US-Iran war on potatoes
अतरौली में ट्रैक्टर से आलू की खोदाई करता किसान - फोटो : संवाद
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विस्तार

ज्यादा रकबा, बंपर पैदावार, ऊपर से वैश्विक बाजार की चुनौतियों के बीच आलू के चिप्स और पाउडर बनाने वाली कंपनियों ने हाथ खींच लिए हैं। ऐसे में आलू के दाम पिछले साल के मुकाबले आधे रह गए हैं। किसानों की लागत भी निकलने की स्थिति नहीं बन रही है। घाटे की स्थिति देख किसान परेशान हैं। 

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आलू की फसल पिटने व भाव गिरने की हताशा अलीगढ़ में इगलास क्षेत्र के गांव बढ़ाकलां निवासी विकास सह नहीं पाया और शुक्रवार को हाथरस में ट्रेन से कटकर जान दे दी। पिता राजपाल सिंह ने बताया कि विकास ने 10 हजार रुपये प्रति बीघा की दर से अपने चाचा की 16 बीघा जमीन पट्टे पर ली थी। कुल एक लाख 60 हजार रुपये देने थे। कर्जा भी लिया था। आलू खोदाई के लिए मजदूरी, वारदाना का पैसा भी देना था।
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विकास ने कोल्ड स्टोर स्वामियों से एडवांस मांगा,लेकिन मंदी के चलते उन्होंने पैसा देने से मना कर दिया।बाजार में भी रेट आधा है, बाहर से आने वाली कंपनियां भी इस बार खरीद करने नहीं आ रही है। इसके चलते वह तनाव में था। हालांकि एसडीएम इगलास परितोष मिश्रा का कहना है कि प्रथम दृष्टया पारिवारिक तनाव से जुड़ा मामला लग रहा है, राजस्व निरीक्षक से प्रकरण की जांच रिपोर्ट मांगी गई है तदनुसार सम्यक कार्रवाई की जाएगी।

भले ही सही वजह जांच का विषय है, लेकिन इस बार आलू की फसल किसानों की कमर तोड़ रही है।अतरौली क्षेत्र के गांव चितावनी निवासी किसान देवेंद्र चौधरी का कहना है कि आलू का कट्टा पिछले साल इन दिनों में 500 रुपये प्रति कट्टा (50 किलोग्राम) बिक रहा था, बाद में 600-700 रुपये तक पहुंचा था। इस बार 200से 250में बिक रहा है। गुल्ला और किर्री (छोटे साइज के आलू) को तो कोई पूछ तक नहीं रहा।

जिले में भी भाव अलग-अलग चल रहा है। अतरौली में खैर के मुकाबले भाव 100 रुपये अधिक है। गांव एदलपुर निवासी किसान बृजपाल सिंह बताते हैं कि पिछले साल 700 रुपये प्रति कट्टा की दर से कोल्ड स्टोर में आलू रखा था, लेकिन इस बार 300 से 350 की दर पर रख रहे हैं। गांव नहल निवासी बनवारी लाल गौड़ और सिरसा निवासी लटूरी सिंह का भी कहना है कि आलू ने इस बार किसानों को रुला दिया है। लागत तक नहीं निकल रही है।

अकराबाद क्षेत्र के गांव मनीपुर निवासी किसान निवेश बघेल की पीड़ा है कि उन्होंने पट्टे पर खेत लेकर आलू बोया था। एक तो सही दाम नहीं मिल रहा है और ऊपर से कोल्डस्टोरेजों में आलू रखने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही है। अलीगढ़ में किसान भाव बढ़ने की उम्मीद में आलू कोल्ड स्टोर में रख रहे हैं, जबकि हाथरस में किसान बाद में भाव न गिर जाए, इस आशंका के चलते मंडियों का रुख कर रहे हैं। अलीगढ़ अधिकांश कोल्ड स्टोर भर गए हैं।

1400 हेक्टेयर बढ़ गया अलीगढ़ में रकबा

वर्ष 2024 में 30150 हेक्टेयर में आलू बोया गया था। 2025-26 में यह बढ़कर 31550 हेक्टेयर हो गया। अतरौली निवासी कोल्ड स्टोरेज स्वामी नीरज माहेश्वरी बताते हैं कि इस बार उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बंगाल,गुजरात, राजस्थान में रकबा बढ़ा है और पैदावार ज्यादा है। दूसरे आलू से चिप्स व पाऊडर बनाने वाली कंपनियां भी इस बार नहीं आ रही है। अतरौली क्षेत्र में ही हर साल छह कंपनियां खरीद करती थी, इस बार अनुबंध पर खेती कराने वाली एक कंपनी ही खरीद कर रही है।

उन्होंने बताया कि अंतर राष्ट्रीय बाजार में पाऊडर का भाव भारतीय मुद्रा के हिसाब से 200 रुपये से घटकर 70 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है। यूरोपीय देशों में अच्छी फसल हुई है और मांग कम है, इसलिए पाऊडर बनाने के लिए खरीद करने वाली कंपनियां नहीं आ रही है। सरकार को सब्सिडी देनी चाहिए। खैर निवासी आनंद शर्मा मोनू ने बताया कि उनके कोल्ड स्टोरेज की लगभग 12 लाख पैकेट रखने की क्षमता है और कोल्ड स्टोरेज भर गए हैं, यही स्थिति अन्य कोल्ड स्टोरेज की भी है।

फसल आने पर भाव कम ही रहता है, लेकिन इस बार बाजार में अस्थिरता है। अमेरिका -इस्राइल युद्ध के चलते खाड़ी के देशों में होने वाले निर्यात पर असर पड़ रहा है। एक माह बाद स्थिति सुधर सकती है। किसानों को धैर्य रखना चाहिए।-बलजीत सिंह, उपनिदेश उद्यान, अलीगढ़ मंडल

वैश्विक बाजार में भी अच्छे नहीं हालात
एक रिपोर्ट की माने तो यूरोपीय संघ में पिछले साल 24 मिलियन टन की मांग के मुकाबले 27 मिलियन टन आलू पहुंचा था और कीमतें 22 प्रतिशत तक गिर गई थी। फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम और नीदरलैंड में इस सीजन में आलू की रिकॉर्ड पैदावार हुई है। बाजार में आपूर्ति मांग से कहीं अधिक हो गई है। अमेरिका ने यूरोपीय संघ से फ्रोजन आलू पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगा दिया है, रेट पहले से ही कम थे, जिससे वहां का निर्यात प्रभावित हुआ। इसका असर आलू पाऊडर और स्टार्ज बनाने वाली कंपनियों पर पड़ा है। खाड़ी देशों में हालात खराब है।

लागत का यह है हिसाब
किसानों के अनुसार आलू को कोल्ड स्टोर में रखने का भाड़ा करीब 150 रुपये प्रति पैकेट है। ट्रैक्टर भाड़ा और वारदान लगाकर 30 रुपये प्रति पैकेट का खर्च आ रहा है। 2000 रुपये प्रति बीघा की लागत बुवाई और 2500 की प्रति बीघा की खोदाई व ढुलाई की लागत आ रही है। कुल खर्च पूरी फसल पर करीब 10 हजार रुपये प्रति बीघा बैठ रहा है। एक बीघा में 45 कट्टे आलू निकल रहा है। भाव 200 से 300 के बीच साइज और वैरायटी के अनुसार चल रहा है। 200 के रेट पर तो लागत भी नहीं निकल रही है।

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